नई दिल्ली: गुरुवार (12 जून) को एयर इंडिया का विमान लंदन जाने के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक रिहायशी इलाक़े में गिर गया था, जिसके बाद देर रात एयर इंडिया ने इसमें सवार 242 लोगों में से 241 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की. विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर थे. हादसे में सभी 12 सदस्यों ने अपनी जान गंवा दी.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इस हादसे में मारे गए विमान की कमान संभालने वाले पायलट से लेकर फ्लाइट अटेंडेंट तक सभी अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित थे, उनके जाने के बाद उनके घरों के साथ ही उन पूरे इलाकों में मातम पसरा है, जहां वे रहते थे.
रिटायर होने वाले थे पायलट
इस विमान के पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल की उम्र 60 साल थी. वे एयर इंडिया के चालक दल के सबसे वरिष्ठ सदस्य थे. वही अहमदाबाद से लंदन जा रहे इस विमान को उड़ा रहे थे. कैप्टन सभरवाल के पास बतौर पायलट कई सालों का अनुभव था.
वे पवई के जलवायु विहार में अपने 90 साल के पिता के साथ रहते थे. उनके पड़ोसियों ने बताया कि वे कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले थे. उन्होंने रिटायरमेंट के बाद अपने पिता के साथ ज़्यादा समय बिताने की योजना बनाई थी.
अखबार से बातचीत में एक पड़ोसी ने बताया, ‘वे बहुत शांत और अनुशासित थे. हम उन्हें अक्सर वर्दी में आते-जाते देखते थे, लेकिन वे बहुत ही शांत स्वभाव के व्यक्ति थे.’
सभरवाल की बड़ी बहन दिल्ली में रहती हैं, जिनके दोनों बेटे भी पायलट हैं. उनकी मौत से उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पवई के लोग भी सदमे में हैं.
कैप्टन सभरवाल के साथ फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर भी विमान उड़ा रहे थे. शुरुआती जांच में पता चला है कि विमान में लंबी दूरी की उड़ान के लिए ज़्यादा ईंधन भरा गया था. इस वजह से धमाका और भी ज़्यादा शक्तिशाली था.
दीपक पाठक
बदलापुर निवासी दीपक पाठक दुर्घटनाग्रस्त विमान के क्रू सदस्य थे. वे 11 साल से ज़्यादा समय से एयर इंडिया में काम कर रहे थे. दीपक हमेशा उड़ान भरने से पहले अपने घर पर फोन करते थे. उन्होंने गुरुवार को भी ऐसा ही किया था.
उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया, ‘उन्होंने हमें हमेशा की तरह फोन किया, जैसे वे हमेशा करते थे, निकलने से पहले. हमने कभी नहीं सोचा था कि यह आखिरी बार होगा.’
शुरुआत में परिवार को उनके बचने की उम्मीद थी क्योंकि उनका फोन दुर्घटना के बाद भी बज रहा था… जिससे उन्हें लगा कि शायद वे सुरक्षित होंगे. लेकिन बाद में अधिकारियों ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी.
दीपक के रिश्तेदारों ने उन्हें कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित बताया. वे अपने काम के प्रति समर्पित थे और कभी भी अपने परिवार से दूर नहीं हुए.
साइनीता चक्रवर्ती
जुहू कोलीवाड़ा की रहने वाली 35 वर्षीय साईनीता चक्रवर्ती, जिन्हें पड़ोसी और दोस्त प्यार से ‘पिंकी’ बुलाते थे, वे भी इस विमान के चालक दल का हिस्सा थीं. वे हाल ही में गो एयर छोड़कर एयर इंडिया में शामिल हुई थीं.
उनकी बचपन की दोस्त निक्की डी’सूजा ने बताया कि साइनीता हमेशा से अपने काम के प्रति समर्पित थीं. उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की थी.
मैथिली मोरेश्वर पाटिल
मैथिली मोरेश्वर पाटिल 24 साल की थीं और न्हावा गांव, पनवेल की निवासी थीं. विमान दुर्घटना की खबर सुनने के बाद गांव के लोग उनके घर पर जमा हो गए. सभी लोग उनकी उस मेहनत को याद कर रहे थे, जो उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपना करिअर बनाने के लिए की थी.
मैथिली चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं. उनके परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद उनका पूरा साथ दिया था. वे न्हावा गांव और उसके आसपास की अनगिनत युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई थीं. मैथिली के एक पड़ोसी ने कहा, ‘वह हमारी शान थीं. उनकी उपलब्धियों से हमें बहुत खुशी मिली. दुर्घटना की खबर से हम सब सुन्न हो गए हैं.’
रोशनी राजेंद्र सोंघरे
डोंबिवली के मधाबी बंगला इलाके में रहने वाली रोशनी 27 साल की थीं. वे हाल ही में एयर इंडिया में शामिल हुई थीं. वह अपने माता-पिता और भाई के साथ डोंबिवली पूर्व में रहती थीं. उनके एक रिश्तेदार ने बताया कि वह फ्लाइट अटेंडेंट के तौर पर काम कर रही थीं. एयर होस्टेस बनना उनका सपना था. वे मेहनती और बुद्धिमान थीं. इंस्टाग्राम पर उनके 54,000 फॉलोअर्स थे. वह नियमित रूप से अपनी जिंदगी से जुड़ी बातें वहां पोस्ट करती थीं.
इन सभी के अलावा इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले केबिन क्रू सदस्यों में मणिपुर की दो महिलाएं- नगनथोई शर्मा कोंगब्राईलटपम और लैमनुनथेम सिंगसन भी शामिल थीं, जिनमें से एक मेईतेईऔर दूसरी कुकी-ज़ो समुदाय की थीं.
