नई दिल्ली: सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवालों से पता चला है कि केंद्र सरकार के पास उन सोशल मीडिया हैंडल के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जिन्होंने पिछले महीने पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री और उनकी बेटी पर भयंकर ट्रोल हमले किए थे.
द वायर ने रिपोर्ट किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल होने के बाद मिस्री ने 11 मई को अपना एक्स एकाउंट लॉक कर दिया था.
गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित केंद्र सरकार के किसी भी मंत्री ने अभी तक ट्रोलिंग की निंदा नहीं की है या उनके समर्थन में सामने नहीं आया है.
विदेश सचिव के रूप में मिस्री ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग का नेतृत्व किया था.
उल्लेखनीय है कि विदेश सचिव मिस्री के एक्स एकाउंट को लॉक किए जाने की खबर तब सामने आई, जब दक्षिणपंथी एक्स एकाउंट यूजर्स ने उन्हें ‘देशद्रोही’ कहा और पाकिस्तान के साथ भारत के संघर्ष विराम के लिए उन्हें दोषी ठहराया. इतना ही नहीं इस पूरे मामले में उनके परिवार को भी घसीट लिया गया और उनके द्वारा साझा किए गए पुराने पोस्ट निकाल कर उनकी बेटी को विदेश में पढ़ाई करने और म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए निशाना बनाया गया.
कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के निदेशक वेंकटेश नायक ने विदेश मंत्रालय के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अलग-अलग आरटीआई दायर कर उन सोशल मीडिया एकाउंट की सूची मांगी है, जिनकी पहचान प्रत्येक मंत्रालय की सक्षम एजेंसी द्वारा की गई है और जिनके बारे में ज्ञात है कि उन्होंने मिस्री और उनके परिवार के खिलाफ ट्रोलिंग और ऑनलाइन दुर्व्यवहार शुरू किया और इसमें भाग लिया.
दोनों मंत्रालयों ने एक जैसा जवाब देते हुए कहा कि इस विषय पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.
विदेश मंत्रालय द्वारा कोई जानकारी न होने के जवाब के बाद दायर अपनी अपील में नायक ने लिखा कि सरकार ने अतीत में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफार्मों से अन्य प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए कार्रवाई की है.
उन्होंने अपनी अपील में लिखा, ‘इस सरकार के तहत अन्य सार्वजनिक प्राधिकरणों ने अतीत में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म से अन्य प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और लागू सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को लागू करने के लिए तुरंत कार्रवाई की है. यह अविश्वसनीय है कि इस मंत्रालय ने विदेश सचिव की हाल ही में हुई ट्रोलिंग के संबंध में इस तरह से काम नहीं किया है.’
उन्होंने कहा, ‘सीपीआईओ (केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी) का अस्पष्ट और टालमटोल वाला जवाब यह स्वीकार करने के बराबर है कि इस सरकार ने उन सोशल मीडिया एकाउंट और उन्हें चलाने वाले आक्रामक हुए लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कुछ नहीं किया, जिन्होंने विदेश सचिव पर अत्यधिक पूर्वाग्रह के साथ और बहुत ही आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए हमला किया था.’
उन्होंने कहा, ‘इससे हम नागरिकों के मन में इस बात को लेकर कोई भरोसा नहीं पैदा होता कि सरकार अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमलों से बचाने में सक्षम है. यह इस सरकार की उस नीति के अनुरूप भी नहीं है जिसमें कहा गया है कि जब बाहरी दुश्मनों और उनके स्थानीय एजेंटों द्वारा भारतीय नागरिकों और उनकी संपत्ति के खिलाफ हिंसा की जाती है तो सरकार चुप नहीं रहती.’
हालांकि, उनकी अपील के जवाब में नायक को विदेश मंत्रालय से यही जवाब मिला, ‘यह जानकारी इस कार्यालय के पास उपलब्ध नहीं है.’
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी कहा है कि उसके पास इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है, नायक ने अभी तक उसके समक्ष अपील दायर नहीं की है.
