ईरान-इज़रायल संघर्ष: तेहरान में फंसे भारतीय छात्रों को दूतावास दिला रहा सुरक्षित जगह, हालात बेहद गंभीर

ईरान और इज़रायल के बीच तीसरे दिन भी जारी संघर्ष के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास कुछ छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर रहा है. भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है, लेकिन इवैक्यूएशन को फिलहाल ‘बेहद ख़तरनाक’ बताया गया है.

शनिवार (15 जून 2025) को दक्षिणी तेहरान में हुए एक विस्फोट के बाद के हालात. (फ़ोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के तीसरे दिन, भारत का तेहरान स्थित दूतावास ईरान में मौजूद कुछ भारतीय छात्रों को देश के अंदर ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने में मदद कर रहा है.

रविवार (15 जून) तक यह संघर्ष अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका था और दोनों देशों में रह रहे भारतीय डरे से अपने ठिकानों पर छिपे हुए हैं.

सोमवार (16 जून) सुबह विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि तेहरान में भारतीय दूतावास छात्रों की सुरक्षा को लेकर सक्रिय है और ‘कुछ मामलों में’ उन्हें दूतावास की मदद से ईरान के भीतर ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है.

बयान में आगे कहा गया, ‘अन्य व्यावहारिक विकल्पों की भी समीक्षा की जा रही है.’ हालांकि मंत्रालय ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी.

ईरान से मिल रही रिपोर्ट्स में बताया गया है कि वहां कार बम धमाके हो रहे हैं और तेहरान के रिहायशी इलाकों को इज़रायली हमलों का निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, इज़रायल में छोटे शहरों के रिहायशी इमारतें ईरानी मिसाइलों की चपेट में आकर मलबे में तब्दील हो रही हैं.

इज़रायल और ईरान में कितने भारतीय?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जबकि इज़रायल में इनकी संख्या इससे दोगुनी है.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार (15 जून) को ट्वीट कर बताया कि उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से ईरान में मौजूद कश्मीरी छात्रों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की स्थिति को लेकर बात की है.

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि तेहरान के एक हॉस्टल में रहने वाले दो कश्मीरी छात्र उस समय मामूली रूप से घायल हो गए जब वह हॉस्टल इज़रायली हमले की चपेट में आ गया. उन्होंने छात्रों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने की अपील की है.

छात्रों के अलावा, ईरान के बंदरगाहों पर फंसे नाविक, तेहरान और अन्य शहरों में मौजूद कारोबारी और पेशेवर भी मदद का इंतजार कर रहे हैं.

वॉट्सऐप नंबर और लैंडलाइन नंबर जारी किया गया

ईरान में भारतीय दूतावास ने तेहरान, इस्फहान और उरमिया में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी इकट्ठा करने का काम तेज़ी से शुरू कर दिया है. इनमें से कई छात्र विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि कुछ भारतीय नागरिक ऐसे भी हैं जो अपने ईरानी जीवनसाथियों के साथ वहां रह रहे हैं, लेकिन फिलहाल अधिकारी केवल भारतीय नागरिकों की जानकारी ही इकट्ठा कर रहे हैं.

चूंकि इंटरनेट की पहुंच कई जगहों पर बाधित है, इसलिए भारतीय दूतावास ने वॉट्सऐप नंबर के साथ-साथ तेहरान स्थित मिशन और बंदर अब्बास व ज़ाहेदान स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावासों के लैंडलाइन नंबर भी साझा किए हैं.

कुछ भारतीय नागरिकों ने दूतावास के अधिकारियों को बताया कि वे ईरान में दो सप्ताह से कम समय के लिए आए थे, जिसके लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं होती. अब वे चिंतित हैं कि जब उनकी तय अवधि पूरी हो जाएगी तो क्या होगा, क्योंकि युद्ध के चलते वे लौट नहीं पा रहे हैं.

अधिकारियों ने कहा है कि वे ईरानी अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात कर उनके सुरक्षित बाहर निकलने की अनुमति लेने की कोशिश करेंगे.

घरों के अंदर रहने का निर्देश

भारतीय नागरिकों को वहां से निकालने की मांग उठ रही है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने रविवार शाम को स्थिति का आकलन करते हुए कहा था कि इस समय बमबारी और मिसाइल हमलों के बीच इस तरह की कोई भी गतिविधि करना ‘बेहद खतरनाक’ होगा.

निर्देशों में अब भी यही कहा गया है कि लोग घरों के अंदर ही रहें और बाहर न निकलें. अधिकारियों ने यह भी सलाह दी है कि यदि इवैक्यूएशन की स्थिति आती है तो भारतीय नागरिक अपने पासपोर्ट की एक प्रति अपने साथ रखें.

ईरान में ताज़ा संघर्ष शुरू होने के बाद से ही देश का हवाई क्षेत्र बंद है. इस बीच कई भारतीय नागरिकों ने पूछा है कि क्या वे सड़क मार्ग से देश की सीमा पार कर सकते हैं या फिर ईरान के बंदरगाहों से जहाज़ के ज़रिए बाहर निकल सकते हैं.

लेकिन भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस समय न सड़क मार्ग से यात्रा करना उचित है और न ही समुद्री रास्ते से.

इसी तरह, इज़रायल में भारतीय दूतावास ने अपनी ताज़ा सलाह में सभी भारतीयों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और इज़रायली अधिकारियों व आपात सेवाओं द्वारा जारी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने को कहा है.

दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष तेज

रविवार को इज़रायल और ईरान ने एक-दूसरे पर अपने सैन्य हमले और तेज़ कर दिए. दोनों देशों ने लगातार तीसरे दिन एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय की इमारतों से धुआं उठता देखा गया. रॉयटर्स ने बताया है कि एक दिन पहले, एक इज़रायली हमले में शहर की एक रिहायशी बिल्डिंग ढह गई थी, जिसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी.

वहीं, तेल अवीव के पास स्थित बात याम शहर में ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले में कम से कम छह लोगों की जान चली गई.

यह संघर्ष शुक्रवार शाम को शुरू हुआ, जब इज़रायल ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ चलाया. इस अभियान के तहत इज़रायल ने ईरान के कुछ शीर्ष सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों को मार गिराया और उसके परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया.

इज़रायल का दावा था कि अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही थी, जिससे इज़रायल के अस्तित्व को खतरा हो सकता था. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इज़रायल पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए. ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है.

इज़रायली सेना ने रविवार को दावा किया कि उसने ईरान के मशहद एयरपोर्ट (ईरान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित) पर एक ईंधन भरने वाले सैन्य विमान को निशाना बनाकर तबाह किया है. सेना ने कहा कि यह हमला ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ की शुरुआत के बाद अब तक की सबसे लंबी दूरी से किया गया हमला है.

भारत के समयानुसार रविवार दोपहर तक इज़रायल में मरने वालों की संख्या 13 थी, जो वहां की सरकारी प्रेस सेवा ने बताई.

वहीं, तेहरान की ओर से अब तक आधिकारिक तौर पर मौत का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. हालांकि स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया गया है कि शनिवार दोपहर तक ईरान में लगभग 130 लोगों की मौत हो चुकी थी और 900 से अधिक लोग घायल हुए थे. अनुमान है कि इसके बाद से मृतकों की संख्या और बढ़ी होगी.