ईरान-इज़रायल संघर्ष: तेहरान में फंसे कई भारतीयों को निकाला गया, दूतावास की शहर छोड़ने की सलाह

ईरान-इज़राइल संघर्ष के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कई भारतीय छात्रों और नागरिकों को शहर से बाहर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. दूतावास ने लोगों को राजधानी छोड़ने की सलाह दी है. भारी बमबारी और इंटरनेट ठप होने के चलते हालात बिगड़ते जा रहे हैं.

इज़रायली हमले के बाद ईरान की ऑयल स्टोरज फैसिलिटी. (फ़ोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: जैसे-जैसे ईरान का आसमान खतरनाक होता गया, राजधानी और अन्य बड़े शहरों के लोग सुरक्षित इलाकों की ओर भागने लगे. सड़कों पर भारी ट्रैफिक जमा हो गया क्योंकि लोग किसी भी तरह से शहर छोड़ने की कोशिश कर रहे थे. इन लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल थे, जिन्हें बसों से बाहर निकाला गया, लेकिन कई भारतीय अब भी फंसे हुए हैं — या तो ट्रैफिक के कारण कहीं पहुंच नहीं पाए या अपनी तय गाड़ी छूट गई.

हालांकि इज़रायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया था, लेकिन मिसाइल हमले अब आम नागरिक इलाकों तक भी पहुंचने लगे हैं, जिससे पूरे देश में डर और बेचैनी फैल गई है.

सोशल मीडिया पर आ रही तस्वीरों में तेहरान की मुख्य सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिख रही हैं, जहां लोग राजधानी से बाहर निकलने की कोशिश में फंसे हुए हैं.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इज़रायली हमलों में ईरान में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में इज़रायल में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं.

सोमवार (17 जून) की तड़के, भारत के विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरान में मौजूद छात्रों को देश के अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करेगा.

इसी दिन बाद में मंत्रालय ने बताया कि उसने 24×7 नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित कर दिया है.

नियंत्रण कक्ष के संपर्क विवरण इस प्रकार हैं:

टोल फ्री: 1800118797
अन्य नंबर: +91-11-23012113, +91-11-23014104, +91-11-23017905
व्हाट्सऐप: +91-9968291988
ईमेल: [situationroom@mea.gov.in] (mailto:situationroom@mea.gov.in)

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भी 24×7 आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की है, जिसके विवरण हैं:

सिर्फ कॉल के लिए:

1. +98 9128109115, +98 9128109109

व्हाट्सऐप पर संपर्क के लिए:
2. +98 901044557, +98 9015993320, +91 8086871709

अन्य शहरों के लिए:
3. बंदर अब्बास: +98 9177699036
4. ज़ाहेदान: +98 9396356649

ईमेल: [cons.tehran@mea.gov.in] (mailto:cons.tehran@mea.gov.in)

मंगलवार सुबह, तेहरान में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे सभी भारतीय नागरिकों से अपील की कि वे इन नंबरों पर तुरंत संपर्क करें:

+98 9010144557
+98 9128109115
+98 9128109109

इसके साथ ही दूतावास ने यह भी सलाह दी कि जो भी भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग अपनी व्यवस्था से तेहरान से बाहर निकल सकते हैं, वे ऐसा कर लें.

निर्देश और कुछ भ्रम की स्थिति

रविवार को तेहरान में एक छात्रावास पर इज़रायली हमले के बाद दो भारतीय छात्रों को मामूली चोटें आईं. यह घटना शुक्रवार से फैले तनाव और चिंता को और बढ़ा गई.

ईरान में 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं. इनमें से लगभग 20% छात्र हैं, जिनमें अधिकतर कश्मीर से हैं.

एक संदेश में भारतीय छात्रों को निर्देश दिया गया कि वे सुबह 9:30 बजे तक ‘वेलेंजक यूनिवर्सिटी’ के गेट नंबर 2 पर रिपोर्ट करें, जहां से बसों की व्यवस्था की गई थी.

इसी ऑनलाइन कोऑर्डिनेशन ग्रुप में एक अन्य आयोजक ने स्पष्ट निर्देश दिया: ‘हमें चाहिए कि तेहरान में मौजूद हर व्यक्ति आज ही शहर छोड़ दे. कृपया यह बात सब तक पहुंचाएं.’

कम अवधि के वीज़ा पर ईरान आए पर्यटकों और व्यापारियों को भी बस प्रस्थान स्थल तक पहुंचने को कहा गया. लेकिन तेहरान जैसे विशाल शहर में स्थानीय परिवहन और इंटरनेट की खराब व्यवस्था के चलते वहां तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ.

इंटरनेट तक सीमित पहुंच के कारण कई लोगों ने शिकायत की कि वे दूतावास के पंजीकरण फॉर्म भरने में असमर्थ हैं, जो उन्हें दूतावास की निगरानी में लाने के लिए ज़रूरी था.

दिन के अंत तक, लगभग 600 भारतीय छात्रों को तेहरान से निकाल लिया गया और उन्हें क़ोम ले जाया गया, जो राजधानी के दक्षिण में लगभग 140 किलोमीटर दूर है. इनमें से ज़्यादातर छात्र तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ और शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ से थे.

देश के पश्चिमी छोर पर स्थित उरमिया यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई थी.

‘सड़कें बंद हैं’

यह साफ़ हो गया कि कई भारतीय नागरिक अब भी तेहरान में फंसे हुए हैं — कुछ लोग समय पर जानकारी नहीं मिलने की वजह से, तो कुछ ने फ़िलहाल वहीं ठहरने का फ़ैसला किया है.

दिल्ली के कारोबारी तेजपाल सिंह साहनी, जो एक हफ्ते पहले बिजनेस वीज़ा पर तेहरान आए थे, ने कहा, ‘मैं भी निकलना चाहता हूं, लेकिन बात ये नहीं है कि निकलना है या नहीं, बल्कि कैसे निकलें. क़ोम जाने वाले सभी रास्ते और हाईवे बंद हैं.’

उन्होंने द वायर को बताया, ‘मैं जिस इलाके में हूं, वो अभी तक सुरक्षित है. मैं तेहरान में मौजूद दस-बारह अन्य भारतीयों के संपर्क में हूं और हम सभी मिलकर तय कर रहे हैं कि क्या करना है.’

हालात को और उलझाने वाला था ग़लत जानकारी का तेज़ी से फैलना. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में झूठा दावा किया गया कि भारतीयों को 48 घंटे के भीतर ईरान छोड़ने का आदेश दिया गया है. इन पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स तेज़ी से वायरल हुए, जिसके बाद विश्वसनीय चैनलों को बार-बार सफाई देनी पड़ी कि यह फ़र्ज़ी ख़बर है.

ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण लोग वैकल्पिक रास्तों की तरफ़ देखने लगे— जैसे अज़रबैजान, अर्मेनिया या तुर्की के रास्ते बाहर निकलना.

एक भारतीय नागरिक, जो ईरान और अज़रबैजान की सीमा तक पहुंचे थे, उन्होंने बताया कि उन्हें सीमा पार करने की अनुमति नहीं मिली जब तक कि अज़रबैजान में भारतीय दूतावास की तरफ़ से अनुमति पत्र नहीं आया.

एक दिन पहले तक भारतीय दूतावास की ओर से आधिकारिक सलाह यही थी कि लोग ज़मीन या समुद्री रास्तों से यात्रा न करें. लेकिन कई भारतीयों ने बताया कि वे किसी ‘ज्यादा सुरक्षित’ जगह तक पहुंच चुके हैं और अब चाहते हैं कि सीमा पर उन्हें मदद मिले, क्योंकि ज़्यादातर सीमा चौकियों पर भारतीय पासपोर्टधारकों को वीज़ा की ज़रूरत होती है.

सीमा तक पहुंचने की चुनौतियां अब भी बहुत कठिन हैं. जब तेहरान में पीछे रह गए एक भारतीय नागरिक ने पूछा कि क्या और बसें चलेंगी, तो एक ऑफिशियल कोऑर्डिनेटर ने ईमानदारी से कहा कि अब यह स्पष्ट नहीं है कि क़ोम तक जाने वाला रास्ता ‘अब भी सुरक्षित है या नहीं.’

सोमवार देर रात इज़रायली वायुसेना ने दावा किया कि उसने तेहरान और क़ोम के बीच एक हाईवे पर हथियार ले जा रहे एक ट्रक को बमबारी करके नष्ट कर दिया है. इससे दहशत और बढ़ गई.

क़ोम एक तरह का सुरक्षित इलाक़ा बन गया था, जहां तेहरान और क़ज़्वीन, आराक जैसे अन्य शहरों से भारतीय इकट्ठा हो रहे थे. लेकिन जो लोग पहले से ही क़ोम में मौजूद थे, उनके लिए अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.

एक व्यक्ति ने पूछा, ‘हम 14 लोग क़ोम में हैं. अब क्या करें?’ दूसरे ने पुष्टि की, ‘हम भी 28 लोग क़ोम में फंसे हैं. क्या मैं यहां मौजूद लोगों की सूची कहां भेजूं?’ एक तीसरे ने जोड़ा, ‘कृपया बताएं कि क्या क़ोम से इवैक्यूएशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है?’

उन्हें जवाब मिला कि वे धैर्य रखें और क़ोम में ही रहें, वहां उनके रहने की व्यवस्था की जाएगी. आगे की सूचना मिलने तक वहीं रुकने को कहा गया.

मिश्रित नागरिकता वाले परिवारों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. एक महिला ने लिखा: मैं क़ोम में रहती हूं और मेरे दो बच्चे भारतीय नागरिक हैं. मैं ईरानी हूं. मैं भारत कैसे लौटूं?

तेहरान से भी ऐसी ही चिंता एक अन्य व्यक्ति ने जताई: मेरे दो छोटे बच्चे हैं. मैं भारतीय मूल की हूं. क्या दूतावास हमारे इवैक्यूएशन में मदद करेगा?

सोमवार को इज़रायली सेना ने फारसी भाषा में एक चेतावनी जारी की जिसमें कहा गया कि वह तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 3 में ईरानी सेना से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमला करने वाली है और निवासियों से तत्काल क्षेत्र खाली करने को कहा गया. इसके कुछ समय बाद, इज़रायल के हमले में एक सरकारी प्रसारण संस्था की इमारत को निशाना बनाकर उड़ाया गया.

जैसे-जैसे रात हुई, उन शहरों से और बसों की मांग आने लगी जहां दिन में पहले ही एक खेप रवाना की जा चुकी थी. सोमवार देर रात पुष्टि की गई कि अगली सुबह तेहरान से एक और बसों का जत्था रवाना किया जाएगा. संदेश में कहा गया: कृपया अपना पासपोर्ट साथ रखें. सामान कम से कम रखें.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)