श्रीनगर: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) ने मंगलवार (17 जून, 2025) को जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में एक एकजुटता मीटिंग बैठक के दौरान केंद्र सरकार से अपील की कि वह ईरान और फिलिस्तीन में जारी संघर्ष पर अपनी चुप्पी तोड़े और शांति की वकालत करे.
यह बैठक श्रीनगर के गुपकर रोड पर आयोजित की गई, जहां माकपा के महासचिव एमवाई तारिगामी के नेतृत्व में दर्जनों पार्टी नेता और कार्यकर्ता जमा हुए और फिलिस्तीन में इज़रायल द्वारा किए जा रहे ‘नरसंहार और युद्ध अपराधों’ की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया.
इज़रायल के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए माकपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ‘राष्ट्र निर्माण, गरिमा और स्वतंत्रता की न्यायोचित लड़ाई’ में फिलिस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की.
पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से यह भी मांग की कि वह फिलिस्तीनी मुद्दे पर भारत की ऐतिहासिक स्थिति के अनुरूप ‘सिद्धांत आधारित रुख अपनाए और इज़रायल के साथ सभी सैन्य और सुरक्षा सहयोग को तुरंत समाप्त करे.’
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में तारिगामी ने कहा कि फिलिस्तीन में आम नागरिकों पर इज़रायल के लगातार हमले और ईरान के साथ उसका ताज़ा सैन्य टकराव एक बड़े संघर्ष की आशंका पैदा कर रहा है.
उन्होंने बताया कि माकपा ने मंगलवार को देशभर में प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें फिलिस्तीन और ईरान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई और आम लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों से निकलकर इज़रायल की ‘आक्रामकता’ के खिलाफ आवाज़ उठाएं.
‘वैश्विक शांति के लिए खतरा’
तारिगामी ने कहा कि फिलिस्तीन में जारी संकट, जिसे उन्होंने विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बताया, के बाद अब इज़रायल द्वारा ईरान पर किया जा रहा हमला वैश्विक शांति के लिए खतरा बन गया है.
‘यह खेदजनक है कि अमेरिका और यूरोपीय देश ईरान में जारी युद्ध का पूरा समर्थन कर रहे हैं, जो एक वैश्विक संकट को जन्म दे सकता है. युद्ध की चिंगारियां भड़केंगी और पूरे क्षेत्र में फैल जाएंगी.’
तारिगामी ने कहा कि विश्व के नेताओं को फिलिस्तीन और ईरान के लोगों के खिलाफ इज़रायल द्वारा किए जा रहे ‘बर्बरता’ को रोकना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘हम यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन इसलिए कर रहे हैं ताकि दुनिया को पता चले कि कश्मीर और हमारे देश के लोग उन आवाज़ों के साथ खड़े हैं जो ईरान और फिलिस्तीन में हो रही बर्बरता के खिलाफ बोल रही हैं. हम फिलिस्तीन और ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह शांति और फिलिस्तीनी जनता के साथ खड़े होने की अपनी परंपरा को बनाए रखे.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हम चुप नहीं रह सकते. अगर आज ईरान में युद्ध है तो कौन जानता है कल क्या होगा? केंद्र सरकार को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और शांति व न्याय के पक्ष में बोलना चाहिए, ताकि युद्ध की चिंगारियां फिर से न भड़कें.’
बता दें कि तारिगामी, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुलगाम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

‘हम एकजुटता में खड़े हैं’
बैठक में शामिल शोपियां से माकपा के कार्यकर्ता अब्दुल राशिद ने कहा कि पार्टी ने मंगलवार को पूरे देश में ‘फिलिस्तीन दिवस’ मनाया ताकि इज़रायल के युद्ध से प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता जताई जा सके.
उन्होंने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि फिलिस्तीन में इज़रायली आक्रामकता और गाजा के बच्चों की शहादत को तुरंत रोका जाए. अमेरिका के समर्थन से इज़रायल ने अब ईरान पर हमला किया है. दुनिया को मानवता पर हो रहे इन अकारण हमलों पर ध्यान देना चाहिए. हम इन दोनों देशों के लोगों के साथ एकजुटता में खड़े हैं.’
माकपा कार्यकर्ता ज़हूर अहमद ने कहा कि भारत का फिलिस्तीन के प्रति समर्थन देश की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को फिलिस्तीन के ‘बेबस’ लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि फिलिस्तीनी लोगों को उनकी ज़मीन और उनके अधिकार वापस मिलें.’
माकपा की जम्मू-कश्मीर राज्य समिति के सदस्य ग़ुलाम मोहिउद्दीन ने कहा कि पार्टी ने फिलिस्तीन में इज़रायल की ‘बर्बरता’ के ख़िलाफ़ देशभर में ज़िला और तहसील स्तर पर प्रदर्शन किए हैं.
उन्होंने कहा, ‘हम इज़रायल की आक्रामकता के ख़िलाफ़ और फिलिस्तीन के लोगों के पक्ष में अपनी आवाज़ उठाने आए हैं.’
गाजा में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा शुरू किया गया एक बेरोक-टोक सैन्य अभियान इस साल अक्टूबर में दो साल पूरा कर लेगा. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, इस दौरान कम से कम 55,432 फिलिस्तीनी मारे गए हैं और 1,28,923 घायल हुए हैं.
7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमले में इज़रायल में कम से कम 1,139 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक को बंधक बना लिया गया था.
ईरान और इज़रायल के बीच जारी संघर्ष मंगलवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गया, जिसमें इज़रायल के हमलों में अब तक 220 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 70 महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. वहीं, ईरान के हमलों में इज़रायल में 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
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