श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (4 जुलाई) को मुस्लिम बहुल क्षेत्र की राजधानी श्रीनगर के बीचों-बीच खुली शराब की दुकान को कथित तौर पर बंद कर दिया, क्योंकि उदारवादी हुर्रियत अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी.
मालूम हो कि 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद शायद यह पहली बार है कि अधिकारियों ने सकारात्मक रूप से काम किया है और हुर्रियत नेता के व्यापक विरोध प्रदर्शन की चेतावनी के बाद अपने फैसले को वापस ले लिया है.
उल्लेखनीय है कि मीरवाइज की यह चेतावनी शुक्रवार (4 जुलाई) को श्रीनगर में व्यापारियों के एक समूह द्वारा कश्मीर में शराब की बिक्री की निंदा करने और श्रीनगर के बटमालू इलाके में शराब की दुकान खोलने के विरोध में बंद की घोषणा करने के बाद आई है.
द वायर को प्राप्त एक बिना तारीख के नोटिस में बटमालू के व्यापारियों ने बंद के आह्वान को ‘शांतिपूर्ण विरोध का प्रतीक’ बताया. इसमे ज़ोर देकर कहा गया कि यह निर्णय बटमालू में सभी बाजार संघों और सड़क विक्रेताओं के अध्यक्षों के साथ परामर्श के बाद लिया गया है.
इस नोटिस पर इलाके के आधा दर्जन व्यापारी संघों और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मुहर और हस्ताक्षर हैं. इसमें कहा गया है कि ये बंद ‘हमारे इलाके में शराब की दुकान के नकारात्मक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव पर व्यापारिक समुदाय की गहरी चिंताओं को दर्शाता है. हम संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने और तुरंत कार्रवाई करने की अपील करते हैं.’
इस संबंध में बटमालू ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष वसीम अफरोज खान ने कहा कि इलाके के दुकानदारों और निवासियों ने शराब की दुकान खुलने पर चिंता जताई है.
उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा नहीं होने देंगे. हमने हमेशा कश्मीर में शराब की दुकानें खोलने का विरोध किया है. इसे इस आधार पर उचित ठहराया जा रहा है कि हम एक पर्यटन राज्य हैं, लेकिन पर्यटक यहां शराब पीने नहीं आते हैं. वे ठंडी हवा, जंगल, पहाड़ और प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं.’
अमरनाथ यात्रा के चलते शराब की दुकान को पंथा चौक इलाके से बटमालू में स्थानांतरित किया गया
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ यात्रा के चलते शराब की दुकान को श्रीनगर के पंथा चौक इलाके से बटमालू में स्थानांतरित कर दिया गया था.
इससे पहले श्रीनगर के डाउनटाउन में ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में शुक्रवार (4 जुलाई) को अपने संबोधन में मीरवाइज ने कश्मीर में शराब की दुकानें खोलने के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी. उन्होंने शराब की दुकान को यहां के ‘लोगों के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताया था.
शुक्रवार को उदारवादी हुर्रियत प्रमुख ने बटमालू के व्यापारियों द्वारा तीन दिनों के लिए अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करने के फैसले की सराहना की.
इस दौरान मीरवाइज ने आरोप लगाया कि अधिकारी मुस्लिम बहुल क्षेत्र में शराब को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने शराब की दुकान खोलने को ‘धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों’ पर हमला करार दिया.
उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लोगों और हमारी आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है. हम पहले से ही ड्रग्स के नशे की लत के खतरे से जूझ रहे हैं और अब अधिकारी लोगों और हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को और बर्बाद करने के लिए शराब को बढ़ावा दे रहे हैं.’
इस मामले को लेकर मीरवाइज ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि यह कार्रवाई रोकी जाए.
उन्होंने कहा था, ‘यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है कि इस तरह के प्रस्तावों को शुरू में ही रोक दिया जाए. अगर वे विफल होते हैं, तो उलेमा, नागरिक समाज और आम जनता के पास विरोध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.’
व्यापारियों के अनुसार, शुक्रवार को अधिकारियों ने दुकान को सील कर दिया.
जम्मू-कश्मीर में 305 शराब की दुकानों के लिए बोलियां आमंत्रित की गई थी
उल्लेखनीय है कि इस साल 15 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के आबकारी विभाग ने केंद्र शासित प्रदेश में 305 शराब की दुकानों के लिए बोलियां आमंत्रित की थी, जिनमें से 14 कश्मीर के चार जिलों, सोनमर्ग, पहलगाम और गुलमर्ग के पर्यटन स्थलों और उत्तरी कश्मीर के बारामूला और कुपवाड़ा जिलों के कुछ हिस्सों में खोले जाने का प्रस्ताव है.
नई आबकारी नीति के तहत अधिकारियों ने श्रीनगर शहर के सात वार्डों में शराब की दुकानें खोलने का भी प्रस्ताव रखा है.
इससे पहले अब्दुल्ला को आबकारी विभाग द्वारा बोलियां आमंत्रित किए जाने के बाद सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा था, क्योंकि अब्दुला जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री भी हैं.
इस कदम से खुद को दूर रखने के प्रयास में अब्दुल्ला ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
नई नीति के तहत आबकारी विभाग ने कहा था कि संबंधित अधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्वामित्व वाली पर्यटक सुविधाओं और दो हवाई अड्डों पर शराब की दुकानें खोली जाएंगी.
इस संबंध में हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक मीर मुहम्मद फैयाज मीर ने जम्मू-कश्मीर में शराब के विज्ञापन, बिक्री, खरीद, खपत और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था.
गौरतलब है कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी कश्मीर में शराब की बिक्री के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था.
वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं – पूर्व उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह और जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी ने भी केंद्र शासित प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध का समर्थन किया था.
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