दलाई लामा के उत्तराधिकारी: तिब्बती बौद्ध परंपरा, चीन की आपत्ति और भारत की सफाई

बीते दिनों हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में तिब्बती बौद्ध धर्म के वरिष्ठ लामाओं की एक धार्मिक बैठक में दलाई लामा ने ऐलान किया था कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की गद्दी चलती रहेगी. इसका सीधा मतलब था कि मौजूदा दलाई लामा का उत्तराधिकारी होगा. जहां चीन ने इसका विरोध किया है, भारत ने कहा है कि भारत सरकार धार्मिक मामलों में कोई राय नहीं रखती.

दलाई लामा. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु मौजूदा दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो रविवार (6 जुलाई) को अपना 90वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस बीच उनके उत्तराधिकारी का मुद्दा सुर्खियों में है. इसकी प्रमुख वजह दलाई लामा का बुधवार (2 जुलाई) का एक वीडियो संदेश है, जिसमें उन्होंने ऐलान किया था कि उनकी मृत्यु के बाद भी दलाई लामा की गद्दी चलती रहेगी. इसका सीधा मतलब था कि मौजूदा दलाई लामा का उत्तराधिकारी होगा.

बीते दिनों हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के मैक्लोडगंज में तिब्बती बौद्ध धर्म के वरिष्ठ लामाओं की एक बैठक हुई थी. इसमें दलाई लामा ने यह बात एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश के ज़रिए कही. उनके इस संदेश से भविष्य में दलाई लामा की संस्था के जारी रहने को लेकर चल रहे तमाम कयासों पर तो रोक लग गई, लेकिन चीन और दलाई लामा के बीच एक नया विवाद जरूर खड़ा हो गया.

क्या कहा था दलाई लामा ने अपने संदेश में?

रिकॉर्डेड वीडियो संदेश में दलाई लामा ने बताया कि साल 2011 में उन्होंने कहा था कि तिब्बती लोगों को यह फैसला करना चाहिए कि भविष्य में दलाई लामा के पुनर्जन्म को जारी रहना चाहिए या नहीं.

उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं हुई है, लेकिन पिछले 14 वर्षों में तिब्बत की आध्यात्मिक परंपराओं के नेताओं, निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों, विशेष आम सभा की बैठक में भाग लेने वालों, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सदस्यों, ग़ैर-सरकारी संगठनों, हिमालय क्षेत्र, मंगोलिया, रूसी संघ के बौद्ध गणराज्यों और चीन सहित एशिया के बौद्धों ने उन्हें कारणों के साथ पत्र लिखकर आग्रह किया है कि दलाई लामा की संस्था जारी रहे.

इस दौरान उन्होंने ये भी बताया था कि उन्हें तिब्बत में रहने वाले तिब्बतियों से अलग-अलग माध्यमों से संदेश मिले हैं जिनमें यही अपील की गई है.

दलाई लामा ने कहा था, ‘इन सभी अनुरोधों के मुताबिक़, मैं पुष्टि कर रहा हूं कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी.’

दलाई लामा के अनुसार, अगले दलाई लामा को मान्यता देने की ज़िम्मेदारी उस गादेन फोडरंग ट्रस्ट को होगी, जो उन्हीं के दफ़्तर का एक हिस्सा है.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गादेन फोडरंग ट्रस्ट को ही अगले दलाई लामा के पुनर्जन्म को मान्यता देने का एकमात्र अधिकार है और किसी अन्य को इस मसले में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

दलाई लामा के इस बयान कोअप्रत्यक्ष रूप से चीन की तरफ इशारा माना गया, जिसका कहना है कि अगला दलाई लामा चीनी कानून के मुताबिक ही बनेगा.

चीन ने दलाई लामा के संदेश को खारिज किया

इस संबंध में दलाई लामा के संदेश के बाद चीन की प्रतिक्रिया भी सामने आई. चीन के विदेश मंत्रालय ने इस संदेश को खारिज करते हुए कहा कि उनके पुनर्जन्म को चीनी सरकार की मंजूरी की ज़रूरत है. साथ ही चीन ने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकार की प्रक्रिया में चीन के क़ानूनों और नियमों के साथ-साथ ‘धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं’ का पालन होना चाहिए.

एक ख़बर के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी की पहचान केवल लॉटरी सिस्टम के माध्यम से की जा सकती है – जहां नाम एक सुनहरे कलश से निकाले जाते हैं.

उल्लेखनीय है कि यह प्रथा 1792 में शुरू की गई थी और इसका उपयोग पिछले लामाओं को चुनने के लिए किया गया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि चीनी अधिकारियों ने इसमें हेराफेरी की है.

हालांकि, चीन इस आरोप का खंडन करता है. उसका कहना है कि यह प्रथा तिब्बती बौद्ध धर्म का एक ‘अद्वितीय रूप’ है और चीनी सरकार की ‘धार्मिक विश्वासों की स्वतंत्रता’ की प्रथा के अनुरूप है.

वहीं, निर्वासित तिब्बती सरकार या सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के राष्ट्रपति पेन्पा सेरिंग ने भी चीन को एक सीधा संदेश दिया है.

सेरिंग ने अपने बयान में कहा, ‘परम पावन दलाई लामा के पुनर्जन्म को मान्यता देने की मूल प्रक्रिया अद्वितीय तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुरूप है. इसलिए हम न केवल पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना द्वारा अपने राजनीतिक लाभ के लिए पुनर्जन्म विषय के उपयोग की कड़ी निंदा करते हैं, बल्कि इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे.’

विवाद में भारत का पक्ष

इस पूरे विवाद में भारत का पक्ष भी सामने आया, जब केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने 3 जुलाई को दलाई लामा के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर फैसला सिर्फ उन्हीं की मान्यता प्राप्त संस्था और स्वयं दलाई लामा द्वारा लिया जाएगा, किसी और को यह अधिकार नहीं है.

गौरतलब है कि यह पहली बार था, जब भारत सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री ने दलाई लामा की उनके उत्तराधिकारी से संबंधित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी.

रिजिजू का यह बयान तब आया, जब चीन ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी की योजना को खारिज कर दिया था और कहा था कि कोई भी उत्तराधिकारी तभी मान्य होगा जब उसे चीन की मंजूरी मिलेगी.

हालांकि, रिजिजू की इस  टिप्पणी पर चीन की ओर से शुक्रवार (4 जुलाई) को कड़ी आपत्ति देखी गई और चीन ने भारत को तिब्बत से जुड़े मामलों पर सावधानी बरतने को कहा.

बीजिंग में मीडिया से बात करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, ‘भारत को 14वें दलाई लामा के चीन विरोधी अलगाववादी रवैये को समझना चाहिए और शिजांग (चीन तिब्बत को ‘शिजांग’ कहता है) से जुड़े मामलों पर अपने वादों का सम्मान करना चाहिए. भारत को अपने शब्दों और कार्रवाइयों में सावधानी बरतनी चाहिए और शिजांग से जुड़े मामलों के बहाने चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करना चाहिए ताकि दोनों देशों के संबंधों पर असर न पड़े.’

इसके बाद भारत सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि भारत सरकार किसी धर्म से जुड़े मामलों में कोई राय नहीं रखती.

इस संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमने दलाई लामा को लेकर दिए गए बयान की खबरें देखी हैं. भारत सरकार आस्था और धर्म से जुड़ी मान्यताओं और प्रथाओं के मामलों में कोई पक्ष नहीं लेती और ना ही इन पर कोई टिप्पणी करती है. सरकार भारत में सभी के लिए धर्म की स्वतंत्रता का हमेशा समर्थन करती रही है और आगे भी करती रहेगी.’

दलाई लामा के उत्तराधिकारी चयन की प्रक्रिया

तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार, दलाई लामा 14वें सर्वोच्च धर्मगुरु हैं. उनका नाम तेनजिन ग्यात्सो है. माओत्से तुंग के नेतृत्व वाली चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ असफल विद्रोह के बाद वे साल 1959 में हजारों तिब्बतियों के साथ भारत चले आए थे.

अगला दलाई लामा कौन होगा, यह तय करने के लिए तिब्बती बौद्ध धर्म  में एक लंबी प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसे ‘तुल्कु प्रणाली’ कहते हैं. यह एक विशिष्ट परंपरा है, जिसके तहत दलाई लामा की मृत्यु के बाद उनके पुनर्जन्म (नए दलाई लामा) की खोज की जाती है.

ऐसी मान्यता है कि तिब्बती बौद्ध धर्म में दलाई लामा को चुना नहीं, बल्कि ढूंढ़ा जाता है. मृत्यु के बाद दलाई लामा एक नए शरीर में जन्म लेते हैं. इसके लिए ऐसे बच्चों की तलाश की जाती है, जिनका जन्म दलाई लामा की मृत्यु के समय के आस-पास हुआ हो, जिनमें असाधारण बुद्धि और असामान्य गुण हों या वे कुछ महत्‍वपूर्ण बातें याद कर पा रहे हों.

इस साल मार्च में प्रकाशित हुई दलाई लामा की किताब ‘वॉयस फॉर द डायसलेस‘ में भी उन्होंने लिखा है कि उनका पुनर्जन्म चीन के बाहर एक स्वतंत्र दुनिया में होगा, जहां तिब्बती बौद्ध धर्म की स्वतंत्रता बनी रहे.

इस किताब में उन्होंने लिखा है कि उनके पुनर्जन्म का उद्देश्य उनके कार्य को आगे बढ़ाना है. इसलिए, नया दलाई लामा एक स्वतंत्र दुनिया में जन्म लेगा, ताकि वह तिब्बती बौद्ध धर्म का नेतृत्व और तिब्बती लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक बन सके.