जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस शुरू किया

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब करने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है. यह क़दम ईडी द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन जारी करने के कुछ समय बाद आया है, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था. ईडी के समन की काफ़ी आलोचना हुई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Allen Allen/Flickr CC BY 2.0)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा कानूनी सलाह देने वाले या मामलों में पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को तलब करने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ 14 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगी.

यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन जारी करने के कुछ समय बाद आया है, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था. ईडी के समन की काफी आलोचना हुई थी.

25 जून को जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस एनके सिंह की एक शीर्ष अदालत की पीठ ने जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब करने के मुद्दे को आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया था.

पीठ ने कहा था कि, ‘कानूनी पेशा न्याय प्रशासन की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है. जो वकील अपनी कानूनी प्रैक्टिस में लगे हैं, उन्हें कुछ अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जो इस तथ्य के कारण सुनिश्चित हैं कि वे कानूनी पेशेवर हैं, और वैधानिक प्रावधानों के कारण भी. जांच एजेंसियों/पुलिस को किसी मामले में पक्षकारों को सलाह देने वाले बचाव पक्ष के वकील/अधिवक्ताओं को सीधे बुलाने की अनुमति देना कानूनी पेशे की स्वायत्तता को गंभीर रूप से कमजोर करेगा और न्याय प्रशासन की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा भी होगा.’

अदालत ने कहा था, ‘जो दांव पर लगा है, वह है न्याय प्रशासन की प्रभावशीलता और वकीलों की कर्तव्यनिष्ठा, और उससे भी महत्वपूर्ण निडरता से अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने की क्षमता. चूंकि यह मामला सीधे न्याय प्रशासन को प्रभावित करता है, इसलिए किसी पेशेवर को, जहां वह इस मामले में वकील है, जांच एजेंसी/अभियोजन एजेंसी/पुलिस के इशारे पर काम करने देना, प्रथमदृष्टया अस्वीकार्य प्रतीत होता है.’

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने वरिष्ठ वकील अरविंद दातार को कानूनी सलाह के संबंध में समन जारी करने के लिए ईडी की निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश से मामले का स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था. साथ ही इसे एक ‘परेशान करने वाली प्रवृत्ति’ करार देते हुए कानूनी पेशे की नींव पर प्रहार बताया था.

एससीएओआरए ने कहा था कि ईडी द्वारा की गई कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि जांच में अतिशयोक्ति की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति को दर्शाती है जो कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है और कानून के शासन की नींव को कमजोर करती है.