भारत ने बांग्लादेश स्थित सत्यजीत रे के पैतृक घर को संरक्षित करने में मदद की पेशकश की

भारत ने प्रसिद्ध फिल्मकार सत्यजीत रे के बांग्लादेश स्थित पैतृक घर को संरक्षित करने में मदद करने की पेशकश की है. रे के दादा और बांग्ला साहित्य एवं सांस्कृतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण हस्ती- उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी का पैतृक घर ढहाया जा रहा है ताकि उसकी जगह एक नई इमारत बनाई जा सके.

सत्यजीत रे के दादा उपेंद्र किशोर राय चौधरी का बांग्लादेश स्थित पैतृक घर ढहाया जा रहा है ताकि उसकी जगह एक नई इमारत बनाई जा सके. (फोटो साभार: क्रियेटिव कॉमन्स)

नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार (15 जुलाई) को प्रसिद्ध फिल्मकार सत्यजीत रे के बांग्लादेश स्थित पैतृक घर को संरक्षित करने में मदद करने की पेशकश की है. यह कदम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा रे के घर को तोड़े जाने की खबरों पर चिंता जताने के बाद उठाया गया.

बांग्लादेशी अख़बार डेली स्टार ने रिपोर्ट किया है कि मायमेनसिंह शहर स्थित रे के दादा और बांग्ला साहित्य एवं सांस्कृतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण हस्ती, उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी का पैतृक घर ढहाया जा रहा है ताकि उसकी जगह एक नई इमारत बनाई जा सके.

भारत रत्न से सम्मानित और भारत के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म निर्माताओं में से एक सत्यजीत रे ने दो साल की उम्र में अपने पिता की मृत्यु के बाद कोलकाता में अपने दादा के घर में बचपन बिताया था.

मायमेनसिंह स्थित लगभग सौ साल पुरानी यह संपत्ति विभाजन के बाद बांग्लादेश सरकार के नियंत्रण में आ गई थी और 1989 में इसे मायमेनसिंह शिशु अकादमी में बदल दिया गया था. हालांकि, पिछले एक दशक से यह भवन उपयोग में नहीं है. 

डेली स्टार की रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि संरचना के जर्जर हालत में हो जाने के कारण भवन को गिराने की आधिकारिक मंजूरी मिली थी. अब यहां एक अर्ध-पक्का नया भवन बनाया जा रहा है, जिसमें शिशु अकादमी की गतिविधियां संचालित की जाएंगी. 

इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा, ‘यह खबर अत्यंत पीड़ादायक है. रे परिवार बंगाली संस्कृति के प्रमुख संवाहकों में से एक है. उपेन्द्रकिशोर बंगाल के पुनर्जागरण के स्तंभ हैं. इसलिए, यह घर बंगाल के सांस्कृतिक इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है.’ 

बनर्जी ने बांग्लादेश सरकार से इस घर को संरक्षित करने की अपील की और भारत सरकार से इस मामले पर संज्ञान लेने को कहा. 

मंगलवार देर रात भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भवन के तोड़े जाने पर गहरा खेद व्यक्त किया और कहा कि यह इमारत फिलहाल जर्जर अवस्था में है. 

बयान में कहा गया, ‘इस भवन को बंगाली सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. ऐसे में बेहतर होगा कि इस ‘विध्वंस’ पर पुनर्विचार किया जाए और इसे एक साहित्यिक संग्रहालय और भारत-बांग्लादेश की साझा संस्कृति के प्रतीक के रूप में पुनर्निर्माण का विकल्प तलाशा जाए.’ 

भारत ने यह भी कहा कि वह इस उद्देश्य के लिए ‘सहयोग देने को इच्छुक है.’ 

टैगोर के पैतृक घर में भी हुई थी तोड़फोड़

गौरतलब है कि इससे पहले भारत ने 12 जून को बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पुश्तैनी घर में हुई तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की थी. 

10 जून को ‘प्रोथोम आलो’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून को एक पर्यटक मोहम्मद शहनवाज़ को संग्रहालय के रूप में परिवर्तित इस स्थल पर कर्मचारियों द्वारा पीटे जाने का वीडियो वायरल हो गया.

यह विवाद बढ़ता चला गया और कर्मचारियों ने कथित रूप से उसे कार्यालय के भीतर खींचकर डंडों से पीटा. उसके बाद 10 जून को इस घटना के खिलाफ एक विरोध मार्च निकाला गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने परिसर के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की.

भारत ने इस घटना को कट्टरपंथियों द्वारा दोनों देश की मिलीजुली सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की ‘व्यवस्थित’ कोशिशों का हिस्सा बताया था.