एजेंसियां मुवक्किलों को क़ानूनी सलाह देने के लिए वकीलों को समन नहीं भेज सकतीं: सुप्रीम कोर्ट

ईडी द्वारा दो वरिष्ठ वकीलों को क़ानूनी सेवा देने के लिए समन जारी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच एजेंसियां किसी वकील को केवल अपने मुवक्किल, जो जांच के घेरे में है, को क़ानूनी सलाह देने के लिए समन नहीं भेज सकतीं.

सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जांच एजेंसियां किसी वकील को केवल अपने मुवक्किल को कानूनी सलाह देने के लिए समन नहीं भेज सकतीं, जो जांच के घेरे में है.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दो वरिष्ठ वकीलों को कानूनी देने के लिए समन जारी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था.

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की पुनः शुरू हुई सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से मौखिक टिप्पणी की कि यदि कोई वकील ‘अपराध में मुवक्किल की सहायता’ कर रहा है, तो उसे पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने सुझाव दिया कि केंद्रीय एजेंसियों को वकीलों को समन जारी करने के लिए पुलिस अधीक्षक से अनुमति लेनी चाहिए.

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे प्रस्ताव दिया कि किसी वकील को समन तभी भेजा जाना चाहिए जब संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट इसकी अनुमति दे दें.

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ‘एक घटना के कारण ‘अनियंत्रित’ दिशानिर्देश नहीं बनने दिए जाने चाहिए’ और दोहराया कि वकीलों को अपने मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने के लिए तलब नहीं किया जा सकता.

22 जुलाई को मामले को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि वह ईडी द्वारा वरिष्ठ वकीलों को उनके मुवक्किलों को कानूनी सलाह देने के लिए समन जारी किए जाने के बारे में जानकर हैरान है. मुख्य न्यायाधीश ने तब कहा था कि इस संबंध में दिशानिर्देश बनाए जाने की आवश्यकता है.

जस्टिस गवई ने पूछा था, ‘भले ही यह गलत हो, यह (वकील और मुवक्किल के बीच) एक विशेषाधिकार प्राप्त संचार है. ईडी वकीलों को कैसे तलब कर सकता है?’

उन्होंने कहा था, ‘ईडी अधिकारी सारी हदें पार कर रहे हैं. उन्हें पता होना चाहिए कि कानून के तहत एक वकील और उसके मुवक्किल के बीच संचार एक विशेषाधिकार प्राप्त संचार है.’

ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह, एससी एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड अध्यक्ष विपिन नायर, वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और विजय हंसारिया द्वारा मामले पर कार्रवाई करने और केंद्रीय एजेंसियों के लिए नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक संयुक्त याचिका भी प्रस्तुत की गई.

यह मामला ईडी द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन जारी करने के कुछ समय बाद आया है, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था. ईडी के समन की काफी आलोचना हुई थी.

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने वरिष्ठ वकील अरविंद दातार को कानूनी सलाह के संबंध में समन जारी करने के लिए ईडी की निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश से मामले का स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया था. साथ ही इसे एक ‘परेशान करने वाली प्रवृत्ति’ करार देते हुए कानूनी पेशे की नींव पर प्रहार बताया था.

एससीएओआरए ने कहा था कि ईडी द्वारा की गई कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि जांच में अतिशयोक्ति की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति को दर्शाती है जो कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को खतरे में डालती है और कानून के शासन की नींव को कमजोर करती है.