नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार की गईं केरल की दो ननों के खिलाफ गंभीर आरोपों पर विवाद के बीच, जिन तीन महिलाओं को ‘पीड़िता’ बताया गया है, उनमें से एक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि उसे धमकियां दे कर जबरन बयान दिलवाया गया है.
नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के साथ एक अन्य व्यक्ति सुखमन मंडावी को पिछले शुक्रवार दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था. इन पर छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई स्थानीय बजरंग दल कार्यकर्ता की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इन लोगों ने नारायणपुर की तीन महिलाओं का जबरन धर्मांतरण कराया और उन्हें तस्करी के इरादे से ले जा रहे थे.
हालांकि, उन्हीं तीन महिलाओं में से एक ने अख़बार को बताया कि एक हिंदुत्व संगठन से जुड़ी ज्योति शर्मा नाम की महिला ने उसे धमकाया और पीटा, और पुलिस ने बजरंग दल के कहे अनुसार एफ़आईआर दर्ज की.
छत्तीसगढ़ से बजरंग दल के समन्वयक ऋषि मिश्रा ने अख़बार को बताया कि बजरंग दल से जुड़े एक कार्यकर्ता ने उन्हें महिलाओं की तस्करी की जानकारी दी, इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और जीआरपी से शिकायत की. उन्होंने यह भी बताया कि ज्योति शर्मा दुर्गा वाहिनी मातृशक्ति से जुड़ी हैं.
इस बीच, छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण कुमार गौतम ने महिला के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है.
नारायणपुर जिले की 21 वर्षीय आदिवासी महिला बुधवार (30 जुलाई) को दुर्ग के शेल्टर होम में पांच दिन बिताने के बाद अपने घर लौटी. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर बात करते हुए कहा, ‘कृपया तीनों (गिरफ्तार लोगों) को छोड़ दीजिए, वे निर्दोष हैं.’
उसने बताया कि वह ननों के साथ अपनी इच्छा और माता-पिता की सहमति से दुर्ग रेलवे स्टेशन गई थी. महिला का आरोप है कि ज्योति शर्मा ने उसे मारा और दुर्ग की रेलवे पुलिस ने उसका बयान तक दर्ज नहीं किया.
महिला ने बताया कि वह अपने माता-पिता और चार बहनों के साथ रहती हैं, और रोज़ 250 रुपये की दिहाड़ी पर काम करती हैं. उन्होंने कहा कि सुखमन मंडावी ने उन्हें नौकरी के बारे में बताया था.
उसने कहा, ‘मंडावी ने मुझे बताया कि आगरा के एक अस्पताल में ननों के लिए खाना बनाने और मरीजों की देखभाल करने की नौकरी है. खाना, कपड़े और रहने की सुविधा के अलावा 10,000 रुपये की तनख्वाह थी.’
गिरफ्तारी वाले दिन महिला ने बताया कि वह और नारायणपुर के ओरछा की दो अन्य महिलाएं सुबह 6 बजे मंडावी के साथ दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंची, लगभग 9 बजे दो नन वहां पहुंचीं, जिनसे वह पहली बार मिली थीं, तभी एक बजरंग दल कार्यकर्ता और जीआरपी मौके पर पहुंचे और पूछताछ शुरू कर दी.
महिला ने कहा, ‘हमें रेलवे पुलिस स्टेशन ले जाया गया. वहां हमें खूब डांटा गया, और ज्योति शर्मा ने मुझे दो बार थप्पड़ मारा. उन्होंने कहा कि अगर हमने उनकी बात नहीं मानी, तो मेरे भाई-बहनों को जेल में डालकर पीटेंगे. वे चाहते थे कि हम कहें कि हमें जबरन लाया गया है. मैंने पुलिसवालों के सामने कहा कि मैं अपनी मर्जी और माता-पिता की इजाज़त से आई हूं.’
ज्योति शर्मा ने इन आरोपों से इनकार करते हुए अख़बार से कहा, ‘मैंने किसी को हाथ तक नहीं लगाया. जब मैं पहुंची, वे पहले से ही पुलिस स्टेशन में थे. पुलिस मुझे कैसे मारने देगी? मैं यह आरोप पहली बार सुन रही हूं.’
नारायणपुर की महिला ने बताया, ‘मैंने ननों को पहली बार देखा था. जब हमें पीटा जा रहा था, तो एक नन ने कहा, ‘डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं.’ उन्होंने पिटाई कर रही महिला से कहा, ‘हमें मारो, लेकिन इन्हें मत मारो.’
