नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (1 अगस्त) को कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों ने अतीत में कई बदलावों और चुनौतियों का सामना किया है और भारत को विश्वास है कि ये रिश्ते आगे बढ़ते रहेंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर अधिक टैरिफ लगाने और रूस के साथ सहयोग पर की गई आलोचना के संबंध में सतर्क प्रतिक्रिया के रूप में कही हैं.
विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ भारत के संबंधों को एक ‘स्थिर और समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला’ बताया. साथ ही कहा कि इसे ‘किसी तीसरे देश के चश्मे से’ नहीं देखा जाना चाहिए.
इसके अलावा रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति को दोहराते हुए मंत्रालय ने कहा कि उसकी ऊर्जा खरीद बाजार में उपलब्ध चीजों से निर्देशित होती है.
मालूम हो कि इससे पहले ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई) को घोषणा की थी कि अमेरिका रूस से ऊर्जा और सैन्य उपकरण खरीदने पर अभी तक घोषित ‘जुर्माने’ के अलावा भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाएगा.
यह टैरिफ शुक्रवार से लागू होना था, लेकिन ट्रंप द्वारा गुरुवार को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश – जिसमें दर्जनों अन्य अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर नए टैरिफ भी शामिल हैं – के लागू होने की तारीख 7 अगस्त तय की गई है.
भारत पर टैरिफ की घोषणा के साथ ही ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका का ‘दोस्त’ है, लेकिन इसके टैरिफ ‘बहुत अधिक’ हैं, इसकी गैर-मौद्रिक व्यापार बाधाएं ‘किसी भी देश की तुलना में सबसे अधिक कठोर और अप्रिय हैं.’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को रूस की तरह ही ‘मृत’ बताया.
‘भारत और अमेरिकी संबंधों ने कई बदलावों और चुनौतियों का सामना किया है’
ट्रंप की इस टिप्पणी को लेकर सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ‘हमने प्रतिबंधों पर ध्यान दिया है और इस पर विचार कर रहे हैं.’
जायसवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका ‘साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मज़बूत जन-जन संबंधों पर आधारित एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ साझा करते हैं, जिसने ‘कई बदलावों और चुनौतियों का सामना किया है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हम दोनों देशों द्वारा प्रतिबद्ध ठोस एजेंडे पर केंद्रित हैं और हमें विश्वास है कि रिश्ते आगे बढ़ते रहेंगे.’
उल्लेखनीय है कि मंत्रालय का ये जवाब बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों और दूसरी बार पदभार ग्रहण करने के समय की उनकी घोषणाओं को लेकर संसद के अंदर और बाहर सरकार के सतर्क रुख को दर्शाता है.
शुक्रवार को साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान जायसवाल से यह भी पूछा गया कि क्या नई दिल्ली ने मई में भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में मध्यस्थता करने के ट्रंप के बार-बार के दावों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर अपना विरोध दर्ज कराया है, जिसका नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार खंडन करती रही है.
इसके जवाब में जयसवाल ने कहा, ‘संघर्षविराम को लेकर इस मंच से हमने साफ कहा है कि ऐसे कई मौके आए हैं, जब भारत सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है… मैं यही कह रहा हूं, हमने इस विशेष मुद्दे पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर दी है.’
द्विपक्षीय संबंधों में भारत का ‘विश्वास’
यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप के इस हमले से क्वाड देशों के समूह के भीतर समन्वय प्रभावित होगा या इस साल के अंत में शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति की भारत की प्रत्याशित यात्रा पर प्रश्नचिह्न लगेगा. इसके जवाब में जायसवाल ने द्विपक्षीय संबंधों में भारत के ‘विश्वास’ पर अपने बयान को दोहराया.
भारत और रूस के संबंधों के सवाल पर भी विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि विभिन्न देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध अपनी शर्तों पर आधारित हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.’
भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद रोक दिए जाने की खबरों के बीच जायसवाल ने मोदी सरकार के रुख को दोहराया.
उन्होंने कहा, ‘आप हमारे व्यापक दृष्टिकोण से अवगत हैं कि हम बाज़ार में क्या उपलब्ध है, क्या पेशकश की जा रही है और साथ ही मौजूदा वैश्विक स्थिति या हालात पर भी नज़र रखते हैं. आपके द्वारा बताए गए विशेष सवाल की जानकारी मुझे नहीं है.’
प्रेस वार्ता में पाकिस्तान से जुड़े मामलों पर मंत्रालय की सामान्य दृढ़ता के उलट जयसवाल ने ट्रंप के इस सुझाव पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के तेल उद्योग को विकसित करने के बाद भारत एक दिन इस्लामाबाद से तेल खरीद सकता है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से जब अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 लड़ाकू विमान देने के प्रस्ताव को भारत द्वारा अस्वीकार करने के संबंध में सवाल पूछा गया तो जवाब में जायसवाल ने फरवरी में हुई पीएम मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान शुरू हुई साझेदारी का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंध ‘पिछले कई वर्षों और दशकों में मजबूत हुए हैं’ और ’21वीं सदी के भारत-अमेरिका समझौते के तहत और भी मजबूत होने की संभावना है.’
भारत-रूस संबंध से अमेरिका नाराज़
उन्होंने एफ-35 से जुड़े सवाल पर रिपोर्टर को ‘संबंधित मंत्रालय’ से सवाल करने को कहा, लेकिन बाद में एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि ‘हमारी रक्षा आवश्यकताओं की आपूर्ति पूरी तरह से हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं और रणनीतिक आकलन द्वारा निर्धारित होती है’.
मालूम हो कि भारत के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे और भारत के उच्च टैरिफ का हवाला देते हुए ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में भारत पर 26% ‘पारस्परिक’ टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने तक इसे टाल दिया था.
उस समझौते के तहत बातचीत जारी है, लेकिन अमेरिका के लिए अपने डेयरी और कृषि क्षेत्र को खोलने में भारत का विरोध अमेरिका के लिए एक अड़चन है.
इस बीच 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से भारत मास्को के कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार बनकर उभरा है – जिस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने भारी प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे ट्रंप को निराशा हुई है.
भारतीय अधिकारी अक्सर तर्क देते हैं कि नई दिल्ली द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद से वैश्विक कीमतों को स्थिर करने में मदद मिली है. वे यह भी बताते हैं कि यूरोप रूस से ऊर्जा आयात करना जारी रखे हुए है.
