धमतरी/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में केरल की दो ननों की गिरफ्तारी का मामला राज्य में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचार का इकलौता मामला नहीं है. कुछ दिन पहले बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अन्य हिंदुत्व संगठन के सदस्यों ने धमतरी के एक ईसाई अस्पताल में तोड़फोड़ की, उसके फर्श को गोबर से लीपा. 115 साल पुराना बठेना क्रिश्चियन हॉस्पिटल कम पैसों में इलाज करने के लिए मशहूर रहा है.
लेकिन उपद्रव मचाने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई करने के बजाय राज्य प्रशासन ने उलटे हॉस्पिटल पर इलाज में लापरवाही को लेकर जांच बैठा दी है.
धमतरी के क्रिश्चियन हॉस्पिटल पर स्थानीय लोगों और विहिप ने मरीजों के इलाज में लापरवाही, धोखाधड़ी और कथित धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से शिकायत की, जिसके बाद जिला प्रशासन ने हॉस्पिटल के खिलाफ जांच के निर्देश दे दिए.
धमतरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तम कौशिक ने द वायर हिंदी को बताया कि ‘विहिप, बजरंग दल तथा अन्य की शिकायतों के आधार पर अस्पताल के ऊपर जांच बैठाई गई है.’
उन्होंने बताया कि इलाज में लापरवाही के अलावा धर्मांतरण की भी शिकायत की गई है, इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस जांच टीम में शामिल हैं.
हिंदुत्व संगठनों द्वारा अस्पताल परिसर में तोड़फोड़
पिछले कुछ महीनों से अस्पताल परिसर में हंगामा और तोड़ फोड़ की कई खबरें आ चुकी है. 27 जुलाई को हिंदू संगठनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अस्पताल के परिसर में तोड़फोड़ की, उपकरणों को क्षतिग्रस्त किया और डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार किया.

एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेअर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (एएचपीआई) के छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने धमतरी क्रिश्चियन अस्पताल में तोड़फोड़ की घटना की कड़ी निंदा की है.
अस्पताल के अंदर हुए इस उपद्रव को आपत्तिजनक बताते हुए डॉक्टर राकेश गुप्ता ने कहा है कि ‘देश की आजादी से पूर्व पहुंचविहीन आदिवासी इलाकों के चिकित्सा सुविधा रहित क्षेत्रों में सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बने रहे 115 साल पुराने इस अस्पताल को निशाने पर लेकर उसे धार्मिक रंग देना चिकित्सा व्यवसाय को हतोत्साहित करने वाली घटना है.’
वह आगे कहते हैं, ‘इलाज करने में यदि कोई कमी महसूस होती है तो उसके समाधान के लिए सरकार ने मंच बनाए हैं. इस संबंध में मरीज अपनी शिकायतें प्रशासन को कर सकते हैं लेकिन कानून हाथ में लेकर परिसर में आक्रमण और हुड़दंग करना गलत परिपाटी को जन्म दे रहा है. इस प्रकार की घटनाएं पूरे चिकित्सा समुदाय के लिए चिंता का विषय है.’
एएचपीआई छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल परिसर और वहां कार्यरत नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वहां पहुंच रहे जरूरतमंद मरीज भय मुक्त वातावरण में इलाज करा सकें. साथ ही जिला प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि जिन लोगों ने तोड़फोड़ की है उनके खिलाफ चिकित्सा परिसर हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए.
यह पहली मर्तबा नहीं है जब अस्पताल परिसर में हंगामा हुआ है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 28 जून को अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और छात्रों को ईसाई धर्म की ओर प्रेरित करने के आरोपों के बाद विहिप के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में करीब तीन घंटे तक हंगामा किया था. प्रदर्शनकारी अस्पताल में जबरन घुस गए और परिसर में झंडे लगाए, गोबर से जमीन लीपी और व्हीलचेयर और सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया.

अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने जबरन अस्पताल में प्रवेश किया, कई उपकरणों को नुकसान पहुंचाया और मरीजों के इलाज में बाधा पैदा की.
हालांकि संगठन ने इन आरोपों से इनकार किया है. देवांगन कहते हैं कि वह वहां धरना प्रदर्शन करने गए थे, अस्पताल के उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया.
विहिप कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन न केवल इलाज में गंभीर लापरवाही बरत रहा है, बल्कि अस्पताल परिसर से संचालित नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का दबाव भी डाला जा रहा है. संगठन का आरोप है कि विद्यार्थियों को बाइबिल पढ़ने और ईसाई प्रार्थनाएं करने के लिए बाध्य किया जा रहा है.
धर्मांतरण का आरोप
विहिप के रामचंद्र देवांगन ने अस्पताल पर धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए द वायर हिंदी को कहा, ‘इसी अस्पताल का एक नर्सिंग कॉलेज चलता है, जहां धर्मांतरण कराया जाता है. छात्रों पर दबाव बना कर चर्च में प्रार्थना करने ले जाया जाता है..’
हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक संदीप कुमार पटोंदा ने धर्मांतरण के आरोपों से इनकार करते हुए इसे बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि यह अस्पताल सौ साल से अधिक समय से चल रहा है, और यह बिना किसी भेदभाव के इलाज करता है, इसका मुख्य उद्देश्य सेवा करना है.
‘हमारे नर्सिंग कॉलेज में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि या धर्मांतरण नहीं होता है,’ वह कहते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि उनके अस्पताल के ख़िलाफ़ जांच बैठाई गई है इसके बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई है.

अस्पताल पर लगे लापरवाही के आरोप
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट और विहिप के अनुसार, अस्पताल ने कई मामलों में लापरवाही बरती है. मसलन, जून के महीने में प्रसव के लिए पहुंची महिला को उचित सलाह नहीं दी गई. या फिर, जब एक एक्सीडेंट में घायल मरीज लहूलुहान हालत में आया, हॉस्पिटल ने उन्हें दूसरे हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया, जहां उनकी मौत हो गई.
संदीप पटोंदा ने द वायर हिंदी से बातचीत के दौरान इन सभी आरोपों से इनकार किया है.
उन्होंने कहा कि कभी कोई मरीज या उसके परिजन अपनी शिकायत ले कर नहीं आए हैं. वह कहते हैं, ‘हमारे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है. इलाज में लापरवाही और अन्य बातों की जानकारी उन्हें मीडिया से या अन्य किसी संगठन से पता लगता है.’
डिलीवरी के दौरान लापरवाही वाले मामले पर उन्होंने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर इलाज कर रहे थे, लेकिन मरीज के परिजन अपनी मर्जी से उसे दूसरे अस्पताल ले गए जहां उसकी डिलीवरी हुई, अगर वह हमारे अस्पताल में भी रहतीं तब उनकी सकुशल डिलीवरी होती.
वह कहते हैं, ‘इस मामले में परिजन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी धमतरी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में उन्होंने शिकायत वापस ले ली. परिजनों ने ख़ुद हमसे कहा कि उन्होंने शिकायत वापस ले ली है.’
विहिप ने स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रशासन के समक्ष ये आठ मांगें रखी हैं, जिनमें ‘दोषी डॉक्टरों’ पर हत्या और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करना, उनके मेडिकल लाइसेंस रद्द करना, पीड़ितों को मुआवजा देने, हॉस्पिटल को सील करने, नर्सिंग कॉलेज में ‘धार्मिक स्वतंत्रता’ सुनिश्चित किए जाने, ‘जबरन’ धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने, लापरवाही से मौत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने इत्यादि शामिल है.
लेकिन क्या छत्तीसगढ़ में सिर्फ़ क्रिश्चियन हॉस्पिटल एकमात्र ऐसा हॉस्पिटल है जहां इलाज के दौरान अनचाहा परिणाम सामने आता है?
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था की त्रासद स्थिति किसी से छुपी नहीं है, ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित एक अस्पताल को निशाने पर लेना प्रशासन की मंशा को दर्शाता है.
