गलवान संघर्ष पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सोशल मीडिया पोस्ट पर फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने गलवान घाटी में 2020 में भारत-चीन के बीच हुए संघर्ष पर की गई टिप्पणी को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में अंतरिम रोक लगा दी है. हालांकि, अदालत ने भारतीय भूमि को चीन को सौंपे जाने से संबंधित उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर नाराज़गी भी ज़ाहिर की है.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अगस्त) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ 2020 के भारत चीन के बीच गलवान घाटी में हुए संघर्ष पर की गई टिप्पणी को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में अंतरिम रोक लगा दी है.

हालांकि कोर्ट ने भारतीय भूमि को चीन को सौंपे जाने से संबंधित उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर नाराज़गी भी जताई.

राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें लखनऊ की एक अदालत में उनके खिलाफ चल रहे मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था.

यह शिकायत बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के पूर्व निदेशक उदय शंकर श्रीवास्तव ने की थी. उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने 16 दिसंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जो बयान दिए थे, वे अपमानजनक थे.

श्रीवास्तव का कहना है कि राहुल गांधी ने कहा था कि ‘चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई कर रही है’ और भारतीय मीडिया ‘इस पर कोई सवाल नहीं पूछ रही.’ 

15 जून 2020 को लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय और कम से कम चार चीनी सैनिकों की जान गई थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था, ‘न तो कोई हमारी सीमा में घुसा है, न कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी के कब्जे में है.’ 

बाद में इस बयान का एक हिस्सा सरकारी प्रेस विज्ञप्ति से हटा दिया गया था. विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा था कि यह झड़प तब हुई जब ‘चीनी पक्ष ने हमारी तरफ की एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर एक ढांचा खड़ा करने की कोशिश की.’

हालांकि दोनों देशों ने अपने सैनिकों को पीछे हटाया है, लेकिन अब भी अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में चीनी घुसपैठ की सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

‘संसद में बोलिए, सोशल मीडिया पर क्यों?’

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राहुल गांधी से कहा, ‘जो कहना है वह संसद में कहिए. सोशल मीडिया पोस्ट्स में कहने की क्या जरूरत है?’

राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि अगर राहुल गांधी प्रेस में प्रकाशित बातों को भी नहीं कह सकते, तो वे विपक्ष के नेता कैसे रह सकते हैं?

इस पर जस्टिस दत्ता ने तीखा सवाल किया, ‘बताइए डॉ. सिंघवी, आपको कैसे पता चला कि 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर चीन ने कब्जा कर लिया है? क्या आप वहां थे? आपके पास कोई विश्वसनीय प्रमाण है? ऐसे बयान क्यों देते हैं? अगर आप सच्चे भारतीय होते, तब ऐसा नहीं कहते.’ 

इसके जवाब में सिंघवी ने कहा कि एक सच्चा भारतीय यह भी कह सकता है कि ‘हमारे 20 जवान मारे गए, और यह चिंता की बात है.’ 

इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, ‘जब सीमा पर संघर्ष होता है, तो क्या दोनों पक्षों को नुकसान होना असामान्य है?’

जस्टिस दत्ता ने यह भी कहा कि ऐसे सवाल उठाने का सही मंच सोशल मीडिया नहीं बल्कि संसद है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंघवी ने स्वीकार किया कि राहुल गांधी के बयान की भाषा और बेहतर हो सकती थी, लेकिन मानहानि की शिकायत महज़ उन्हें प्रताड़ित करने का एक तरीका है क्योंकि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सवाल उठाए थे.