नई दिल्ली: बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होंगे. यह जानकारी देश की अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने मंगलवार (5 अगस्त) को दी.
प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में यह पहला चुनाव होगा. पिछले साल एक बड़े जनविरोध के बाद हसीना ने अगस्त 2024 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और विरोध प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के बाद भारत भाग गई थीं.
ये प्रदर्शन शुरुआत में सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे एक बड़े सरकार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गए थे.
यूनुस ने हसीना की सत्ता से बेदखली की पहली वर्षगांठ पर देश को संबोधित करते हुए कहा, ‘कार्यवाहक सरकार की ओर से मैं मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखूंगा और अनुरोध करूंगा कि चुनाव फरवरी 2026 में रमज़ान से पहले कराए जाएं.’
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव के बाद वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे. यूनुस ने कहा, ‘इस संबोधन के बाद हम अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करेंगे, और वो है- एक निर्वाचित सरकार को सत्ता का हस्तांतरण.’
उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि अंतरिम सरकार चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
जनआंदोलन की वर्षगांठ पर हज़ारों लोग ढाका में जुटे
चुनाव की घोषणा से पहले राजधानी ढाका में हज़ारों की संख्या में लोग पिछले साल हुए जनआंदोलन की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए जुटे. रैलियों, संगीत कार्यक्रमों और प्रार्थना सभाओं के ज़रिए लोगों ने इस दिन को मनाया. आंदोलन के समर्थकों ने इस दिन को ‘दूसरा स्वतंत्रता दिवस’ करार दिया.
इस दौरान यूनुस ने ‘जुलाई घोषणा पत्र’ पढ़ा, जिसका उद्देश्य 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन को संवैधानिक मान्यता देना है.
यूनुस ने कहा, ‘बांग्लादेश की जनता यह अपेक्षा करती है कि 2024 का छात्र-जनता आंदोलन उचित संवैधानिक और सरकारी मान्यता पाए.’
यूनुस ने कहा कि जुलाई घोषणा पत्र को आगामी चुनाव के बाद बनने वाली सरकार द्वारा तैयार किए गए नए संविधान में शामिल किया जाएगा.
इस मौके पर कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.
‘हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई भी सरकार तानाशाह न बन सके. राज्य की संरचना इस तरह से होनी चाहिए कि यदि कहीं भी तानाशाही के संकेत दिखें, तो उन्हें तुरंत समाप्त किया जा सके,’ उन्होंने जोड़ा.
बांग्लादेश में क्या हुआ था?
शेख हसीना बांग्लादेश की सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाली प्रधानमंत्री थीं. उन्होंने लगातार 15 साल तक देश का नेतृत्व किया था. उनके कार्यकाल में भले ही देश की अर्थव्यवस्था ने तेज़ी से प्रगति की, लेकिन उनके शासन में विपक्षियों को लगातार दबाया गया. सरकार ने बार-बार आंदोलनों पर हिंसक दमन किया और कई विरोधी नेताओं को जेल में डाला गया.
जुलाई 2024 में युवाओं ने सड़कों पर उतर कर सरकारी नौकरियों में उस कोटा प्रणाली का विरोध किया था जिसमें 1971 के स्वतंत्रता सेनानियों और उनके वंशजों के लिए 30% पद आरक्षित किए गए थे.
चूंकि शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी, इस कोटा व्यवस्था से उसे सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकता था.
प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक झड़पों में बदल गया और पुलिस के साथ संघर्ष में 300 से ज़्यादा लोग मारे गए. कर्फ्यू और सेना के दबाव के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने हसीना के सरकारी आवास पर धावा बोल दिया, जिसके बाद उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा.
