नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दावा किया है कि इस सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के पांच लड़ाकू विमानों और एक बड़े विमान यानी एयरक्राफ्ट को मार गिराया था.
हालांंकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारतीय वायुसेना प्रमुख के इस बयान को खारिज कर दिया है और कहा है कि हालिया संघर्ष के दौरान भारतीय सशस्त्र बल उनकी फौज के किसी भी विमान को न तो निशाना बना पाए और न ही नष्ट कर पाए.
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार (9 अगस्त) को बेंगलुरू में एक लेक्चर के दौरान पहलगाम हमले के बाद इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, ‘भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कम से कम पांच लड़ाकू विमानों और एक एयरक्राफ्ट को नष्ट किया था.’
उन्होंने आगे कहा कि यह एयरक्राफ्ट ईएलआईएनटी या एईडब्ल्यूएंडसी हो सकता है. इसे ‘ज़मीन से हवा में 300 किलोमीटर की दूरी पर निशाना बनाया गया था’ और ‘एक तरीक़े से यह अब तक का सबसे बड़ा ज़मीन से हवा में मार करने का रिकॉर्ड है.’
बालाकोट का साया
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि बालाकोट हवाई हमले से हुए नुकसान की तस्वीरें उपलब्ध न होना उस समय एक ‘बड़ा मुद्दा’ बन गया था और लोग इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हो पा रहे थे कि क्या हासिल हुआ, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ‘बालाकोट के उस भूत’ का ख्याल रखा गया.
उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, हम अपने लोगों को यह नहीं बता सके कि हमने क्या हासिल किया है. हमारे पास खुफिया जानकारी थी कि भारी क्षति हुई है; बहुत सारे आतंकवादी मारे गए, लेकिन हम अपने लोगों को आश्वस्त नहीं कर सके. लेकिन (इस बार) हम भाग्यशाली रहे और ये वीडियो सार्वजनिक कर पाए.’
उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि भारत बालाकोट का वह प्रश्न इस बार नहीं उमड़ा.
मालूम हो कि साल 2019 में 14 फ़रवरी को कश्मीर के पुलवामा ज़िले में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में 40 जवानों के मारे जाने के बाद भारत ने 26 फ़रवरी को पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के ठिकानों को निशाने पर लिया था. भारत ने यह कार्रवाई पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तुनख़्वा प्रांत के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर की थी.
भारत-पाकिस्तान के बीच ‘हाईटेक वॉर’
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में एयर चीफ मार्शल ने बताया कि ये भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ ‘हाईटेक वॉर’ था.
उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि यह हाईटेक वॉर से ज़्यादा था जो हमने लड़ा. ये तक़रीबन 80-90 घंटे तक चला युद्ध था. इसमें हमने बड़े पैमाने पर उनके एयर डिफ़ेंस सिस्टम का नुक़सान किया. इस नुक़सान को देखते हुए उनको साफ़ हो गया था कि अगर ये जारी रहता है तो उन्हें और नुक़सान उठाना पड़ेगा. इस वजह से वह आगे आए उन्होंने हमारी डीजीएमओ को दोबारा संदेश भेजा कि हम बात करना चाहते हैं. उच्च स्तर पर इसको स्वीकार किया गया.’
इस दौरान एयर चीफ मार्शल ने रूस से खरीदे गए एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 को ‘गेम चेंजर’ बताते हुए कहा, ‘हमारी वायु रक्षा प्रणाली ने शानदार काम किया है. हाल ही में खरीदी गई एस-400 प्रणाली एक गेम-चेंजर साबित हुई है. इस प्रणाली की मारक क्षमता ने उनके विमानों को उनके हथियारों, जैसे लंबी दूरी के ग्लाइड बम से दूर रखा है. वे इनमें से एक भी इस्तेमाल नहीं कर पाए क्योंकि वे इस प्रणाली को भेद नहीं सके.’
हम पर किसी तरह की पाबंदी नहीं थी: वायुसेना प्रमुख
वायुसेना प्रमुख ने हाल ही में संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों द्वारा केंद्र सरकार पर ‘सेना को खुली छूट न देने’ के आरोपों को लेकर भी जवाब दिया.
उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का एक प्रमुख कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना था. हमें बहुत स्पष्ट निर्देश दिए गए थे. हम पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई गई थी. अगर कोई बाधा थी तो वह हमारी खुद की बनाई हुई थी. हमने तय किया कि स्थिति को कितना बढ़ाना है. हमें योजना बनाने और उसे लागू करने की पूरी स्वतंत्रता थी.’
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, ‘हमारे हमले सोच-समझ कर किए गए थे, हम हमलों में मैच्योर रहना चाहते थे. तीनों सेनाओं के बीच तालमेल था. सीडीएस की मौजूदगी से वाक़ई फ़र्क पड़ा. वह हमें एकजुट करने के लिए मौजूद थे. एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) ने भी सभी एजेंसियों में तालमेल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई.’
भारत द्वारा सैन्य कार्रवाई नहीं रोकने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि हमारा मकसद किसी एक एयरफ़ील्ड को निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट करना नहीं था. हमारा उद्देश्य पाकिस्तान के अंदर तक हमले का था, उन्हें यह एहसास या संकेत देना था कि हम भीतर तक और अपनी मर्ज़ी से, जहां चाहें हमला कर सकते हैं.
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया, तो हमें संघर्ष रोकने के सभी अवसरों को तलाशना चाहिए था. मेरे बहुत नज़दीकी लोगों ने कहा, ‘और मारना था’. लेकिन क्या हम लगातार युद्ध में रह सकते हैं? देश ने अच्छा फै़सला लिया.’
ज्ञात हो कि भारतीय सेनाओं को पूरी छूट दिए जाने को लेकर बहस इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास में तैनात नौसेना के अफ़सर कैप्टन शिव कुमार के बयान से शुरू हुई थी. बीते जून में जकार्ता में एक सेमिनार में उन्होंने कथित तौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरुआती चरण के दौरान ‘भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान खोने और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से कुछ बाधाएं खड़ी करने का’ ज़िक्र किया था.
इसे लेकर संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर ‘सेना को खुली छूट न देने’ के आरोप लगाए थे.
पाकिस्तान का नुकसान
एयर चीफ मार्शल ने पाकिस्तान के नुकसान को लेकर कहा, ‘भोलारी में एक एईडब्ल्यू एंड सी हैंगर पर हमला किया गया. हमारे पास बहुत स्पष्ट संकेत हैं कि इस हमले के समय वहां एक विमान मौजूद था.’
उन्होंने आगे कहा कि सिंदूर ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के ‘बहुत से एयर डिफ़ेंस सिस्टम को नुक़सान पहुंचा और उनको साफ़ हो गया था कि मौजूदा स्थिति जारी रही तो उन्हें और भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.’
वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, ‘सरगोधा के एयरफ़ील्ड से एफ-16 जेट, श्रीनगर और आदमपुर पर हमला करने के लिए उड़ान भरते थे. हमने उस एयरफ़ील्ड को निशाना बनाया. हमने वहां अन्य उपकरणों को निशाना नहीं बनाया क्योंकि हमने आकलन किया था कि उससे हालात ग़ैरज़रूरी रूप से खराब होते.’
इसके अलावा उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के एक प्रमुख एयरफ़ील्ड में से एक ‘जकोबाबाद को भी निशाना बनाया गया. यहां एफ़-16 का हैंगर था.’
पाकिस्तान का इनकार
उधर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया कि भारत एक भी पाकिस्तानी विमान को न तो निशाना बना पाया और न ही नष्ट कर पाया.
उन्होंने कहा, ‘तीन महीने तक ऐसा कोई दावा नहीं किया गया – जबकि पाकिस्तान ने तत्काल बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया को विस्तृत तकनीकी जानकारी दी…’.
आसिफ ने बताया कि कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तानी विमानों को नष्ट करने के बारे में भारतीय वायुसेना प्रमुख द्वारा देर से दिए गए बयान ‘उतने ही अविश्वसनीय हैं, जितने गलत समय पर ये दिए गए हैं.’
आसिफ ने दावा किया कि नियंत्रण रेखा पर भारतीय सशस्त्र बलों को भी भारी नुकसान हुआ. उन्होंने कहा, ‘अगर सच्चाई संदिग्ध है, तो दोनों पक्षों को अपने विमानों के भंडार को स्वतंत्र सत्यापन के लिए खोल देना चाहिए. हालांकि हमें संदेह है कि इससे वह सच्चाई उजागर हो जाएगी जिसे भारत छिपाना चाहता है.’
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के हर उल्लंघन का एक निश्चित और संतुलित जवाब दिया जाएगा.
