नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी नवीनतम वार्षिक समीक्षा में कहा है कि भारत ने मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपी अधिकारियों को सज़ा देने के लिए ‘न्यूनतम विश्वसनीय कदम’ उठाए हैं.
इस समीक्षा में अमेरिका और कनाडा की सरकारों के उन आरोपों का भी ज़िक्र है, जिनमें कहा गया है कि भारत सरकार के अधिकारी खालिस्तानी अलगाववादियों को निशाना बनाने में शामिल थे.
मालूम हो कि अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा मंगलवार (12 अगस्त) को जारी ‘2024 कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेस’ में भारत का अध्याय पिछले साल की तुलना में काफ़ी छोटा है और इसमें लिंग आधारित हिंसा, जातिगत भेदभाव, गैर-सरकारी संगठनों के उत्पीड़न और एलजीबीटीक्यूआई अधिकारों पर विस्तृत खंड हटा दिए गए हैं. वहीं जनसंख्या नियंत्रण उपायों से जुड़े नसबंदी के मामलों का उल्लेख किया गया है – जो ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की वैचारिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है.
इस रिपोर्ट के सारांश की शुरुआत मणिपुर हिंसा से हुई है और इसमें आगे चलकर मानवाधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण चिंताओं को रेखांकित किया गया है, जिनमें मनमानी हत्याएं, अंतरराष्ट्रीय दमन, जबरन गायब कर दिया जाना, पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और सेंसरशिप शामिल हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सरकार ने मानवाधिकारों का हनन करने वाले अधिकारियों की पहचान करने और उन्हें दंडित करने के लिए बहुत कम विश्वसनीय कदम उठाए या कार्रवाई की,’ जो पिछले साल की रिपोर्ट में कही गई बातों से मेल खाती है.
उल्लेखनीय है कि साल 2023 और 2024 की दोनों रिपोर्ट्स में ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ पर सेक्शन शामिल हैं, जिसमें ‘सरकारों, प्रवासी समुदायों और मानवाधिकार समूहों’ के आरोपों का उल्लेख किया गया है कि भारत सरकार ने ‘प्रतिशोध के लिए अन्य देशों के व्यक्तियों के खिलाफ हत्या की, या हिंसा या हिंसा की धमकियों का इस्तेमाल किया’.
2023 की रिपोर्ट में केवल एक सिख कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का ज़िक्र था
2023 की रिपोर्ट, जो बाइडेन प्रशासन की आखिरी रिपोर्ट थी, के इस खंड में केवल एक सिख कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का ज़िक्र था, जिनकी हत्या के बाद भारत-कनाडा संबंधों में तब तनाव आ गया था जब कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि इसमें भारतीय सरकारी एजेंट शामिल थे.
2024 की रिपोर्ट में इस खंड का विस्तार करते हुए निज्जर की हत्या के सिलसिले में कनाडाई अधिकारियों द्वारा तीन भारतीयों की गिरफ़्तारी को भी शामिल किया गया है. इसमें यह भी दर्ज है कि अक्टूबर 2024 में ट्रूडो ने कहा था कि ‘स्पष्ट और ठोस सबूत हैं कि भारत सरकार के एजेंट ऐसी गतिविधियों में शामिल थे और अब भी शामिल हैं जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख़तरा हैं.’
पहली बार 2024 की रिपोर्ट में अमेरिकी सरकार के उन आरोपों का भी ज़िक्र है, जिसमें न्याय विभाग द्वारा अक्टूबर 2024 में दायर दूसरे अभियोग का उल्लेख किया गया है. इसमें ‘भारतीय सरकारी कर्मचारी विकास यादव पर न्यूयॉर्क शहर में एक अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश रचने में उसकी भूमिका के सिलसिले में भाड़े पर हत्या और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं.’
ज्ञात हो कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पहले से ही हिरासत में हैं और इस साल के अंत में इस मामले में उनके खिलाफ मुक़दमा चलाया जाएगा.
हालांकि, हत्या की साजिश मामले में पहला अभियोग नवंबर 2023 में दायर किया गया था, लेकिन इसे पिछले साल विदेश विभाग की मानवाधिकार समीक्षा में शामिल नहीं किया गया था.
2023 संस्करण, जिसमें यौन हिंसा, तस्करी और दहेज-संबंधी हत्याओं से लेकर रोज़गार में भेदभाव तक, महिला अधिकारों के व्यापक मुद्दों पर व्यापक उपखंड थे, के उलट 2024 की रिपोर्ट लैंगिक मुद्दों पर केवल संक्षिप्त रूप से चर्चा करती है और इसके बजाय ‘जनसंख्या नियंत्रण में ज़बरदस्ती’ पर केंद्रित है.
इसमें कहा गया है कि ‘सरकारी अधिकारियों द्वारा जबरन गर्भपात या अनैच्छिक नसबंदी की रिपोर्ट्स’ थीं, और यह भी बताया गया है कि कुछ महिलाओं, विशेष रूप से गरीब या निचली जाति की पृष्ठभूमि की महिलाओं पर उनके पतियों, परिवारों या स्थानीय अधिकारियों द्वारा ट्यूबल लिगेशन या हिस्टेरेक्टोमी जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए दबाव डाला गया था.
इसमें आगे कहा गया है कि कई राज्यों ने नसबंदी कोटा और आर्थिक प्रोत्साहन बनाए रखा है. इसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा नसबंदी को बढ़ावा दिए जाने के परिणामस्वरूप कई महिलाओं को ‘जोखिम भरी, खराब प्रक्रियाओं और अस्थायी तरीकों तक सीमित पहुंच’ का सामना करना पड़ा.
मार्च 2025 में की गई न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र के गन्ना कटाई क्षेत्र में महिलाओं को गर्भाशय निकालने (हिस्टेरेक्टोमी) के लिए भारी आर्थिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा. एक सरकारी जांच में पाया गया कि बीड ज़िले में, 82,000 महिला गन्ना मज़दूरों में से लगभग 20% ने गर्भाशय निकलवाने का ऑपरेशन करवाया था.
एलजीबीटीक्यूआई व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव का कवरेज पूरी तरह से गायब
इस साल की रिपोर्ट में एलजीबीटीक्यूआई व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव का कवरेज पूरी तरह से गायब है. इसी तरह, जाति-आधारित हत्याओं और दलितों पर अत्याचारों का ज़िक्र भी हटा दिया गया है.
धार्मिक स्वतंत्रता, जिसका 2023 में सांप्रदायिक हिंसा और धर्मांतरण विरोधी कानूनों के उदाहरणों वाला एक अलग उपखंड था, को नवीनतम रिपोर्ट में एक पंक्ति में सीमित कर दिया गया है, जिससे पाठकों को विभाग के अलग वार्षिक धार्मिक स्वतंत्रता मूल्यांकन की ओर निर्देशित किया जा सके.
साल 2024 में अनुपस्थित अन्य खंडों में राजनीतिक भागीदारी, सरकारी भ्रष्टाचार और घरेलू मानवाधिकार संगठनों के प्रति आधिकारिक रवैये से संबंधित खंड शामिल हैं.
साल 2023 में, विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम के तहत गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर लगने वाले प्रतिबंधों का विस्तृत विवरण दिया गया था, लेकिन इस बार इसका एक भी ज़िक्र नहीं है.
गौरतलब है कि विदेश विभाग ने प्रेस की स्वतंत्रता और सभा करने के अधिकारों पर भी अपनी कवरेज को छोटा कर दिया है. हालांकि, दोनों रिपोर्ट्स में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और कानूनी कार्रवाई का ज़िक्र है, लेकिन 2024 के संस्करण में घरेलू केस स्टडीज़ कम और वैश्विक रैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय एनजीओ रिपोर्ट्स का ज़्यादा ज़िक्र है.
