नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘वोट चोरी’ के आरोपों से इनकार करने और बिहार में मतदाता सूची के चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के संबंध में ‘मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा करने’ को लेकर ‘कुछ राजनीतिक दलों’ की आलोचना करने के एक दिन बाद, सोमवार (18 अगस्त) को ‘इंडिया’ गठबंधन के विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एक संवैधानिक प्राधिकारी की जिम्मेदारी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता की तरह काम करने का आरोप लगाया.
विपक्षी सांसदों ने नई दिल्ली में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें नसीर हुसैन, गौरव गोगोई (कांग्रेस); राम गोपाल यादव (समाजवादी पार्टी), महुआ मोइत्रा (टीएमसी), तिरुचि शिवा (डीएमके), मनोज कुमार झा (राजद), संजय सिंह (आप), जॉन ब्रिटास (सीपीआईएम) और अरविंद सावंत (शिवसेना यूबीटी) शामिल हुए.
इन सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त बयान में कहा गया, ‘अब यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग का नेतृत्व ऐसे अधिकारी नहीं कर रहे हैं, जो समान अवसर सुनिश्चित कर सकें. इसके उलट चुनाव आयोग का नेतृत्व करने वाले लोग मतदाता धोखाधड़ी की सार्थक जांच के किसी भी प्रयास को भटकाने और विफल करने के साथ ही सत्तारूढ़ दल को चुनौती देने वालों को डराने-धमकाने का विकल्प चुन रहे हैं. यह एक गंभीर अभियोग है.’
इन सांसदों के अनुसार, रविवार को ज्ञानेश कुमार ने खुद को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नहीं, बल्कि भाजपा प्रवक्ता के रूप में पेश किया था.
इस संबंध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, ‘हम मुख्य चुनाव आयुक्त की तलाश में थे, लेकिन रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हमें भाजपा का एक और प्रवक्ता मिल गया.’
‘चुनाव आयोग संविधान का पर्याय नहीं है, बल्कि संविधान से ही जन्मा है’
मनोज झा ने कहा कि कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों द्वारा उठाए गए किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. इसके अलावा बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में 2024 के आम चुनावों में लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर विपक्षी दलों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया.
उन्होंने कहा, ‘हमारी चिंताएं, चाहे वे राहुल गांधी द्वारा उठाई गई हों या अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव द्वारा, या महाराष्ट्र, हरियाणा में संविधान से आती हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग से सवाल पूछना संविधान पर सवाल उठाना है. मैं मुख्य चुनाव आयुक्त को बताना चाहता हूं कि चुनाव आयोग संविधान का पर्याय नहीं है, बल्कि संविधान से ही जन्मा है. आप मोदी की तरह बोल रहे हैं, जैसे उनके बारे में कोई भी बात पूरे देश की बात है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘चाहे संसद हो, राजनीतिक दल हों या सांसद, हम संविधान से ही जन्मे हैं. इसकी आड़ में इसे तार-तार न करें. यह किताब एक सुरक्षा कवच है. यह संवैधानिक मर्यादा और नैतिकता के आपके उल्लंघन के लिए ढाल नहीं बन सकती.’
मालूम हो कि रविवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि या तो वह महादेवपुरा में ‘वोट चोरी’ के अपने आरोपों को हलफनामे में दर्ज कराएं या सात दिनों के भीतर देश से माफ़ी मांगें.
उल्लेखनीय है कि ज्ञानेश कुमार इस दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा रायबरेली, कन्नौज, वायनाड और डायमंड हार्बर में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों पर चुप रहे.
हलफनामे को लेकर समाजवादी पार्टी सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि चुनाव आयोग राहुल गांधी से हलफनामा मांग रहा था, लेकिन उसने 2022 में समाजवादी पार्टी द्वारा दिए गए हलफनामे पर कोई कार्रवाई नहीं की.
उन्होंने कहा, ‘2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था कि समाजवादी पार्टी के मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, चुनाव आयोग ने हलफनामा मांगा था. हमने 18,000 नामों के साथ हलफनामा दिया और हमें रसीदें भी दी गईं. अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.’
उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग जो रोज़ राहुल गांधी से हलफनामा मांग रहा है, हम उसे पहले ही 18,000 नामों के साथ हलफनामा दे चुके हैं, जिन्हें गलत तरीके से हटा दिया गया है.’
‘चुनाव आयोग का काम विपक्ष पर हमला करना नहीं है’
वहीं, तृणमूल कांंग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फरवरी में सबसे पहले डुप्लीकेट ईपीआईसी कार्ड का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद मार्च में टीएमसी ने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी.
उन्होंने कहा, ‘हमने पांच पत्र लिखे हैं, एक ज्ञापन सौंपा है.’
महुआ के अनुसार, डुप्लीकेट ईपीआईसी कार्ड के मुद्दे को हल करने की समय सीमा 7 जून थी, जो अब बीत चुकी है.
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने ‘कठपुतली होने का बेहद शर्मनाक प्रदर्शन’ किया है. चुनाव आयोग का काम विपक्ष पर हमला करना नहीं है.
महुआ ने आगे कहा, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त महोदय, मैं आपसे आग्रह करती हूं कि आप यह काम अपने राजनीतिक आकाओं पर छोड़ दें.’
मोइत्रा ने यह भी कहा कि चूंकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि बिहार में जिन 22 लाख मतदाताओं की मृत्यु हुई है, वे कई वर्षों में मृत हैं, इसलिए 2024 के लोकसभा चुनावों की वैधता पर सवाल उठता है.
इस संबंध में आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का नाम बदलकर ‘अज्ञानेश कुमार’ कर दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी अज्ञानता जताई थी.
सिंह ने कहा, ‘कल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बात सुनने के बाद उनका नाम ‘अज्ञानेश कुमार’ होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अज्ञानता में यह बात कही. या तो वह मूर्ख हैं, या जानबूझकर मूर्खों की तरह व्यवहार कर रहे हैं, या फिर हमें मूर्ख समझते हैं. वह ऐसे अतार्किक बयान दे रहे हैं कि हम हैरान हैं.’
उन्होंने कहा, ‘उन्होंने उनसे पूछे गए एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया. 25 जून से 25 जुलाई तक एसआईआर में 65 लाख वोट हटा दिए गए, लेकिन बिहार में एक भी वोट नहीं जोड़ा गया, और फिर भी आप कहते हैं कि आप एसआईआर कर रहे हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली चुनाव से पहले आप ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि केंद्रीय मंत्रियों के घरों में कई मतदाता रहते पाए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
‘चुनाव आयोग भाजपा की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रहा है’
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि चुनाव आयोग ‘पक्षपाती, चुनिंदा और अनुचित’ हो गया है, जो भाजपा की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रहा है और ऐसा लगता है कि उसने विपक्षी दलों के खिलाफ लड़ाई की घोषणा कर दी है.
उन्होंने कहा, ‘हम, विपक्षी दल, दृढ़ता से मानते हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने संवैधानिक पद पर सेवा करने के अपने अधिकार का हनन किया है. उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है. शुरू से ही, सरकार का चुनाव आयोग को अपनी बी-टीम बनाने का एक गुप्त उद्देश्य था. इसीलिए 2023 में, सरकार सुप्रीम कोर्ट की 5-सदस्यीय संवैधानिक पीठ के फैसले को दरकिनार करने के लिए एक कानून लेकर आई.’
मानसून सत्र के दौरान संसद में गतिरोध का ज़िक्र करते हुए द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के तिरुचि शिवा ने एसआईआर पर चर्चा की मांग को लेकर कहा कि संसद विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि सरकार की वजह से नहीं चल रही है जो चर्चा नहीं करा रही है.
मुख्य चुनाव आयोग द्वारा राहुल गांधी को अल्टीमेटम देने के संबंध में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि राजनीतिक दलों को डराया नहीं जा सकता.
उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा है. यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग कुछ ऐसे अधिकारियों के नियंत्रण में है, जो एक खास पार्टी का पक्ष लेते हैं.
चुनाव आयोग सोचता है कि बड़े-बड़े बयान देकर वह राजनीतिक दलों को डरा सकता है. हम उन्हें बस इतना बताना चाहते हैं कि अधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन सदन हमेशा उनके कामों का गवाह बना रहेगा.’
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