नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 अगस्त) को रिलायंस समूह के स्वामित्व वाले गुजरात के जामनगर में विवादास्पद ‘वन्यजीव रिजर्व’ वनतारा, जिसका उद्घाटन इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, के कामकाज की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है.
आधिकारिक तौर पर ‘ग्रीन्स ज़ू रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ के नाम से पहचाने जाने वाला यह केंद्र कई विवादों में रहा है. इस सेंटर को लेकर की गई ख़बरों में कई मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है, जिनमें यह आरोप भी शामिल है कि इस केंद्र द्वारा विदेशी वन्यजीवों की खरीद ने दुनिया भर में अवैध वन्यजीव व्यापार को बढ़ावा दिया हो सकता है.
हालांकि, वनतारा का कहना है कि यहां सभी जीवों का स्थानांतरण वैध है और उनके साथ वैध प्रमाणपत्र और कागजी कार्रवाई की गई थी.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को अदालत के सामने प्रस्तुत दो रिट याचिकाओं के जवाब में सोमवार को विशेष जांच दल का गठन किया, जिनमें से एक में आग्रह किया गया था कि 2020 से वनतारा के संचालन की जांच की जाए, जिसमें वन्य जीव और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) के तहत इसके परमिट का सत्यापन भी शामिल है, जिसके चलते कई महाद्वीपों से सैकड़ों विदेशी प्रजातियों के जीवों का आयात संभव हो सका.
‘व्यापक आरोप’
25 अगस्त को याचिकाओं पर सुनवाई की दूसरी तारीख़ तय की गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये याचिकाएं – ‘केवल अखबारों, सोशल मीडिया में छपी खबरों और रिपोर्ट्स तथा गैर-सरकारी संगठनों और वन्यजीव संगठनों की विभिन्न शिकायतों पर आधारित’ – ‘व्यापक आरोप’ लगाती हैं’
अदालत ने कहा कि इनमें भारत और विदेशों से जानवरों का अवैध अधिग्रहण, बंदी जानवरों के साथ दुर्व्यवहार, वित्तीय अनियमितताएं और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं.’
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि ये याचिकाएं केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस जैसे) वैधानिक प्राधिकरणों और न्यायालयों पर भी ‘आक्षेप’ लगाती हैं’
अदालत ने आगे ये भी कहा कि ये केवल ‘आरोप’ हैं और इसके साथ कोई ‘समर्थन सामग्री’ नहीं है.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिका में केवल आरोप लगाए गए हैं बिना किसी सहायक सामग्री के, और सामान्य रूप से ऐसी याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए.
हालांकि, कोर्ट ने जोड़ा, ‘फिर भी, यह आरोप कि वैधानिक प्राधिकरण या कोर्ट अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में अनिच्छुक या असमर्थ हैं, विशेष रूप से तथ्यात्मक स्थिति की सत्यता के सत्यापन के अभाव में हम न्याय के हित में एक स्वतंत्र तथ्यात्मक मूल्यांकन उचित मानते हैं, जो आरोपित उल्लंघनों को स्थापित कर सके, यदि कोई हों. इसके अनुसार हम एक एसआईटी के गठन का निर्देश देना उचित समझते हैं, जिसमें बेदाग सत्यनिष्ठा और उच्च प्रतिष्ठा वाले सम्मानित व्यक्ति हों, जिनका लंबा सार्वजनिक सेवा का रिकॉर्ड हो.’
अदालत ने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे ‘असत्यापित आरोपों’ पर विचार नहीं किया जाना चाहिए.’ लेकिन फिर भी, यह आरोप कि वैधानिक प्राधिकरण या कोर्ट अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में अनिच्छुक या असमर्थ हैं, विशेष रूप से तथ्यात्मक स्थिति की सत्यता के सत्यापन के अभाव में हम न्याय के हित में एक स्वतंत्र तथ्यात्मक मूल्यांकन उचित मानते हैं, जो आरोपित उल्लंघनों, यदि कुछ ऐसा हो तो, को स्थापित कर सके.’
विशेष जांच दल का गठन
इस ‘स्वतंत्र तथ्यात्मक मूल्यांकन’ के लिए न्यायालय ने एक एसआईटी का गठन किया है, जिसे 12 सितंबर को अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी है.
एसआईटी का नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जे. चेलमेश्वर करेंगे. इसके अन्य सदस्य उत्तराखंड और तेलंगाना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले (आईपीएस) और अनीश गुप्ता (आईआरएस) (अतिरिक्त आयुक्त, सीमा शुल्क) हैं.
जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है, एसआईटी रिपोर्ट को वनतारा से संबंधित निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करना होगा:
(क) भारत और विदेश से पशुओं, विशेषकर हाथियों का अधिग्रहण
(ख) वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और उसके अंतर्गत चिड़ियाघरों के लिए बनाए गए नियमों का अनुपालन
(ग) वनस्पतियों और जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (सीआईटीईएस) और जीवित पशुओं के आयात/निर्यात से संबंधित आयात/निर्यात कानूनों और अन्य वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन
(घ) पशुपालन, पशु चिकित्सा देखभाल, पशु कल्याण मानकों, मृत्यु दर और उसके कारणों का अनुपालन
(ङ) जलवायु परिस्थितियों से संबंधित शिकायतें और औद्योगिक क्षेत्र के निकट स्थान से संबंधित आरोप
(च) निजी संग्रह, प्रजनन, संरक्षण कार्यक्रमों और जैव विविधता संसाधनों के उपयोग से संबंधित शिकायतें
(छ) जल और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें
(ज) याचिकाओं में उल्लिखित लेख/खबरें/शिकायतों में उल्लिखित कानून के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन, पशुओं या पशु उत्पादों के व्यापार, वन्यजीव तस्करी आदि के आरोपों से संबंधित शिकायतें,
(झ) वित्तीय अनुपालन, मनी लॉन्ड्रिंग आदि के मुद्दों से संबंधित शिकायतें
(ञ) इन याचिकाओं में लगाए गए आरोपों से संबंधित किसी अन्य विषय से संबंधित शिकायतें
अदालत ने 25 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘उपरोक्त मामले में रिपोर्टिंग करते समय एसआईटी याचिकाकर्ताओं, अधिकारियों, नियामकों, हस्तक्षेपकर्ताओं या पत्रकारों सहित किसी भी अन्य व्यक्ति से जानकारी मांग सकती है और प्राप्त कर सकती है, जो अपने आरोपों की जांच करवाना चाहते हों.’
इस संबंध में अदालत ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, सीआईटीईएस प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और गुजरात के वन एवं पुलिस विभागों सहित कई केंद्र और राज्य सरकार के विभागों से एसआईटी की जांच में सहायता करने का आह्वान किया.
अदालत ने एसआईटी को वनतारा का ‘भौतिक सत्यापन और निरीक्षण’ करने का भी आदेश दिया, और गुजरात के वन विभाग के सचिव को इस निरीक्षण के लिए ‘एसआईटी को पूर्ण सहायता और सहयोग सुनिश्चित करने’ की जिम्मेदारी सौंपी.’
अदालत में दो याचिकाएं दाखिल
मालूम हो कि 14 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने वनतारा में बंद हाथियों और अन्य जानवरों से संबंधित दो याचिकाओं पर सुनवाई की थी और याचिकाकर्ताओं से कुछ बदलाव करने को कहा था – जिसमें वनतारा को प्रतिवादी के रूप में सूचीबद्ध करना भी शामिल था – और सुनवाई की अगली तारीख 25 अगस्त तय की थी.
इन दो याचिकाओं में से एक वनतारा के संचालन की जांच से संबंधित है, जिसे याचिकाकर्ता देव शर्मा द्वारा दाखिल किया गया है और इसमें वनतारा और उससे जुड़ी संस्था, राधा कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट द्वारा 2020 से किए गए सभी वन्यजीव आयातों और संरक्षण संबंधी कार्यों की जांच की मांग की है.
लाइव लॉ के अनुसार, इस याचिका में वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (सीआईटीईएस) के तहत परमिटों के सत्यापन, प्रजनकों की वैधता और स्रोत-देश की मंज़ूरी की जांच, जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अनुपालन की जांच, और सीआईटीईएस और जैविक विविधता पर कन्वेंशन के तहत भारत के दायित्वों की भी मांग की गई है.
वहीं, दूसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से एक निगरानी समिति गठित करने का आग्रह किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वनतारा में बंदी बनाए गए सभी हाथियों को उनके मालिकों को लौटा दिया जाए और वहां मौजूद अन्य सभी जानवरों और पक्षियों को वापस जंगल में छोड़ दिया जाए.
गौरतलब है कि वनतारा ने अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अत्यंत सम्मानपूर्वक स्वागत करते हैं. ‘वनतारा’ पारदर्शिता, करुणा और कानून के पूर्ण अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है. हमारा मिशन और ध्यान पशुओं के बचाव, पुनर्वास और देखभाल पर केंद्रित रहेगा.’
Statement by Vantara on the appointment of a SIT by the Supreme Court reads, “We acknowledge the order of the Hon’ble Supreme Court with utmost regard. Vantara remains committed to transparency, compassion and full compliance with the law. Our mission and focus continues to be… pic.twitter.com/IZCrcvRHcD
— Press Trust of India (@PTI_News) August 26, 2025
इसमें आगे कहा गया है, ‘हम विशेष जांच दल को जांच के दौरान पूरा सहयोग प्रदान करेंगे और अपने सभी प्रयासों के केंद्र में पशुओं के कल्याण को रखते हुए, ईमानदारी से अपना काम जारी रखेंगे. हम अनुरोध करते हैं कि इस प्रक्रिया को बिना किसी अटकलबाजी के और हमारे यहां के पशुओं के सर्वोत्तम हित में होने दिया जाए.’
