भारत ने गाज़ा में पत्रकारों की हत्या को ‘चौंकाने वाला’ कहा, पर इज़रायली जांच पर भरोसा जताया

गाज़ा के नासिर अस्पताल पर इज़रायली हमले में पांच पत्रकारों की हत्या के बाद भारत ने कहा कि पत्रकारों की हत्या 'चौंकाने वाली और अत्यंत खेदजनक' है, लेकिन इज़रायल द्वारा जांच पर भरोसा जताया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने हमेशा संघर्ष में नागरिकों की जान जाने की निंदा की है.

परिजन स्वतंत्र पत्रकार मरियम दग्गा (33) के अंतिम संस्कार के दौरान प्रार्थना कर रहे हैं. वह दक्षिणी गाज़ा के खान यूनिस में नासेर अस्पताल पर इजरायली हमले में मारी गई थीं. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: दक्षिणी गाज़ा के नासिर अस्पताल पर इज़रायली हमले में पांच पत्रकारों की हत्या के दो दिन बाद भारत ने बुधवार को कहा कि पत्रकारों की हत्या ‘चौंकाने वाली और अत्यंत खेदजनक’ है, लेकिन उसने इज़रायल द्वारा जांच पर भरोसा जताया, वही सरकार जिसके संरक्षण में ये हत्याएं हुई थीं.

ये पांच पत्रकार उन कम से कम 20 लोगों में शामिल थे जो 25 अगस्त को हुए हमले में मारे गए थे. द वायर ने हत्याओं पर अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था, गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय ने अल जजीरा को बताया कि हमले के समय पत्रकार अस्पताल में ड्यूटी पर थे.

पत्रकारों में रॉयटर्स के कैमरामैन हुसाम अल-मसरी, स्वतंत्र पत्रकार मोआज अबू ताहा, अल जजीरा के फोटो पत्रकार मोहम्मद सलामा, स्वतंत्र पत्रकार मरियम अबू दग्गा और रिपोर्टर अहमद अबू अजीज शामिल थे.

नासिर अस्पताल को दक्षिणी गाजा का आखिरी कार्यरत सरकारी अस्पताल बताया गया है.

अगस्त की शुरुआत में गाजा में ही सात मीडियाकर्मी, जिनमें से कुछ अल जज़ीरा के लिए काम करते थे, इज़रायल द्वारा निशाना बनाकर किए हमले में मारे गए थे. बताया गया था कि मृतकों में शामिल अनस अल-शरीफ, मोहम्मद क़रीक़ेह, इब्राहिम ज़हीर, मोहम्मद नौफ़ल और मोअमेन अलीवा को महीनों से धमकियां मिल रही थीं.

खान यूनिस – जहां नासिर अस्पताल स्थित था – में पत्रकारों की जान जाने के बारे में मीडिया के सवालों के जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘पत्रकारों की हत्या चौंकाने वाली और बेहद खेदजनक है. भारत ने हमेशा संघर्ष में नागरिकों की जान जाने की निंदा की है.’

इसके बाद जायसवाल ने कहा, ‘हमें पता चला है कि इज़रायली अधिकारियों ने पहले ही जांच शुरू कर दी है.’

रॉयटर्स ने 26 अगस्त को इज़रायली सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी के हवाले से कहा था कि पत्रकार निशाने पर नहीं थे, बल्कि एक ‘हमास कैमरा’ निशाना था. इस प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया कि इज़रायली सेना प्रमुख ने इस बात की आगे जांच के आदेश दिए हैं कि अस्पताल पर हमला करने का निर्णय कैसे लिया गया.

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जून में जब संयुक्त राष्ट्र के तीन-चौथाई से अधिक सदस्य देशों ने गाजा में तत्काल युद्ध विराम, हमास द्वारा बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और निर्बाध मानवीय पहुंच के लिए एक प्रस्ताव का समर्थन किया था, तब भारत ने यह तर्क देते हुए इसमें भाग नहीं लिया था कि स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से ही स्थापित हो सकती है.