पूर्व रॉ अधिकारी विकास यादव के ख़िलाफ़ जारी ग़ैर-ज़मानती वॉरंट अदालत ने रद्द किया

दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व रॉ अधिकारी विकास यादव के ख़िलाफ़ जारी ग़ैर-ज़मानती वारंट रद्द कर दिया है. यादव पर अपहरण और फिरौती का मामला दर्ज है. अदालत ने उन्हें 17 अक्टूबर को पेश होने का आदेश दिया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (27 अगस्त) को पूर्व रॉ अधिकारी विकास यादव के खिलाफ जारी गैर-जमानती वॉरंट रद्द कर दिया. यह वॉरंट दो दिन पहले ही जारी किया गया था.

कथित अपहरण और फिरौती से जुड़े एक मामले में विकास यादव सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश नहीं हुए थे. इसके बाद उनके ख़िलाफ़ जज ने गैर-जमानती वॉरंट जारी कर दिया था.



25 अगस्त को दिए गए आदेश के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर ने नोट किया कि यादव ‘सुबह से कई बार पुकारे जाने के बावजूद अनुपस्थित रहे.’ अदालत ने निर्देश दिया, ‘आरोपी विकास यादव के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी किया जाए और उनकी ज़मानत देने वाले को धारा 491, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत 17 अक्टूबर के लिए नोटिस भेजा जाए.’

दो दिन बाद, उनके वकीलों ने यादव की अनुपस्थिति की वजह बताते हुए एक अर्जी दायर की. उन्होंने तर्क दिया कि वॉरंट उस समय जारी किया गया जब वकीलों की हड़ताल चल रही थी, इसी कारण वह सोमवार की सुनवाई में शामिल नहीं हो पाए.

इसके बाद अदालत ने वॉरंट रद्द कर दिया और यादव को अगली तारीख, यानी 17 अक्टूबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया.

यादव ने पहले भी अदालत में पेश होने से छूट की अर्जी दी थी, यह कहते हुए कि उनकी जान को खतरा है. अदालत ने उन अर्ज़ियों को मंज़ूर भी किया था, लेकिन सोमवार की सुनवाई से पहले यादव ने कोई नई अर्जी दाखिल नहीं की थी. इसी वजह से वॉरंट जारी किया गया.

यह मामला कथित अपहरण और फिरौती से जुड़ा है, जो उस समय दर्ज किया गया था जब अमेरिका ने उन्हें हत्या की साज़िश में नामित किया था और उन्हें उस समय CC-1 के रूप में पहचाना था.

नवंबर 2023 में, अमेरिकी अभियोजकों ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि गुप्ता यह सब एक भारतीय सरकारी अधिकारी के निर्देश पर कर रहे थे, जिसे उस समय केवल ‘CC-1’ के रूप में पहचाना गया था.

तीन हफ्ते बाद, 18 दिसंबर 2023 को, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यादव को अपहरण और फिरौती के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया. यह गिरफ्तारी रोहिणी निवासी की शिकायत के आधार पर हुई थी. तिहाड़ जेल में चार महीने बिताने के बाद अप्रैल 2024 में उन्हें जमानत मिल गई. उनकी रिहाई के बाद से उनका ठिकाना अज्ञात है.

अक्टूबर 2024 में, अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरा आरोपपत्र सार्वजनिक किया, जिसमें ‘CC-1’ को विकास यादव बताया गया. इसमें उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत कैबिनेट सचिवालय का एक अधिकारी बताया गया. बाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह अब भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं.

इस साल डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के शपथग्रहण से पांच दिन पहले, गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया कि एक उच्चस्तरीय सरकारी समिति ने ‘एक व्यक्ति’ के खिलाफ ‘कानूनी कार्रवाई’ की सिफारिश की है. मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि प्रक्रियाओं में कुछ खामियां थीं, जिन्हें सुधारने की ज़रूरत है. इससे यह संकेत मिला कि यादव ने स्वतंत्र रूप से काम किया था.

11 अगस्त को इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी कि जांचकर्ता विकास यादव के दुबई में महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी नेटवर्क के एक संदिग्ध सदस्य से संभावित संबंधों की भी जांच कर रहे हैं.