नई दिल्ली: भारत और कनाडा ने दोनों देशों में अपने उच्चायुक्तों को निष्कासित करने के दस महीने बाद गुरुवार (28 अगस्त) को सामान्य राजनयिक संबंधों की ओर वापसी करते हुए ओटावा और नई दिल्ली में अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति की घोषणा की.
रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वरिष्ठ राजनयिक दिनेश के. पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है, जबकि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने घोषणा की कि क्रिस्टोफर कूटर भारत में देश के नए उच्चायुक्त होंगे.
हालांकि, भारत की घोषणा अपनी चिरपरिचित शैली में की गई, जबकि अनीता आनंद ने कनाडा के इस कदम को ‘भारत के साथ कूटनीतिक जुड़ाव को धीरे-धीरे गहरा करने और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण’ का हिस्सा बताया.
उन्होंने कहा, ‘यह नियुक्ति कनाडावासियों के लिए सेवाएं बहाल करने और कनाडा की अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.’
मालूम हो कि 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी पटनायक वर्तमान में स्पेन में राजदूत के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले जिनेवा, ढाका, बीजिंग और वियना में तैनात रह चुके हैं.
वहीं, कूटर 35 वर्षों के अनुभव वाले एक पेशेवर राजनयिक हैं, जिन्होंने हाल ही में इज़राइल में कनाडा के प्रभारी राजदूत के रूप में कार्य किया है और इससे पहले कई अफ्रीकी देशों में उच्चायुक्त के पद पर कार्य किया है. इसके अलावा वे 1990 के दशक के अंत में वे नई दिल्ली में भी तैनात रह चुके हैं.
उल्लेखनीय है कि भारत और कनाडा द्वारा एक साथ की गई घोषणाओं ने जून में इटली में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात के बाद शुरू हुई प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाया है.
उस बैठक में दोनों नेताओं ने उच्चायुक्तों को बहाल करने और व्यापार वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी, जो उनके राजनयिक गतिरोध के दौरान रुकी हुई थी.
नई दिल्ली और ओटावा के बीच संबंधों में तनाव
ज्ञात हो कि नई दिल्ली और ओटावा के बीच संबंध सितंबर 2023 में खटास आ गई थी, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगाया था.
भारत ने इस आरोप को ‘बेतुका’ और ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए खारिज कर दिया था.
इसके तुरंत बाद दोनों देशों ने एक-एक राजनयिक को निष्कासित कर दिया था. इसके अलावा नई दिल्ली द्वारा राजनयिक प्रतिनिधित्व में ‘समानता’ की मांग के बाद कनाडा ने 41 राजनयिकों को वापस बुला लिया था.
मालूम हो कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने दावा था किया कि उसने कनाडा में ‘व्यापक हिंसा’ से भारतीय सरकारी एजेंटों के जुड़े होने के सबूत इकट्ठा किए हैं. इस आरोप के बाद दोनों सरकारों ने अक्टूबर 2024 में एक-दूसरे के उच्चायुक्त को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया था, जिससे ये शीर्ष पद खाली हो गए थे.
इस संबंध में कनाडा के उप विदेश मंत्री डेविड मॉरिसन ने भी एक संसदीय सुनवाई में बताया था कि उन्होंने एक अमेरिकी अखबार को पुष्टि की है कि भारतीय गृह मंत्री अमित शाह कनाडाई नागरिकों की हत्या की साज़िश में ‘शामिल’ थे. नई दिल्ली ने उनकी टिप्पणी को ‘बेतुका’ और ‘निराधार’ बताते हुए खारिज कर दिया था.
इस पूरे विवाद के दौरान भारत ने कनाडा में खालिस्तानी समूहों को दी जा रही राजनीतिक जगह को लेकर अपनी चिंता जताते हुए अक्सर ट्रूडो सरकार की आलोचना की थी.
इसके जवाब में ओटावा ने ज़ोर देकर कहा था कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक संरक्षण से बंधा है, बशर्ते कि अभिव्यक्ति हिंसा भड़काने का रूप न ले ले.
कार्नी के सत्ता में आते ही दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बातचीत की
मालूम हो कि इस साल जनवरी में ट्रूडो ने अपनी पार्टी के भीतर विद्रोह के बाद पद छोड़ दिया, जिससे मार्च में कार्नी के लिबरल पार्टी का नेतृत्व संभालने का रास्ता साफ़ हो गया.
कार्नी ने जल्द ही अचानक चुनाव कराने की घोषणा की, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से प्रेरित कनाडाई राष्ट्रवाद के उभार के बीच जीत हासिल की.
मोदी ने कार्नी को उनकी जीत पर बधाई दी और इसके तुरंत बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बातचीत की, जिससे संबंधों में आई नरमी के संकेत मिले थे.
जून में जी-7 शिखर सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले कार्नी ने मोदी को इसके आउटरीच सत्र में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया था. शिखर सम्मेलन से इतर उनकी मुलाकात ने उच्चतम स्तर पर गतिरोध को समाप्त कर राजनयिकों की बहाली की घोषणाओं के लिए मंच तैयार किया.
अब इन नियुक्तियों के साथ कनाडा द्वारा भारत में अपनी राजनयिक उपस्थिति को धीरे-धीरे फिर से स्थापित करने की उम्मीद है, जिसे वीज़ा आवेदनों की संख्या और दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा निर्धारित व्यापक द्विपक्षीय एजेंडे को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक कदम माना जा रहा है.
इस महीने की शुरुआत में ही कनाडा ने अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाए जाने के बाद भारत में अपनी पहली राजनयिक तैनाती की. इसके लिए उसने मुंबई स्थित अपने वाणिज्य दूतावास के प्रमुख की नियुक्ति की. इस तरह दिसंबर 2023 से ये रिक्त पद भरा गया.
इन कदमों के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी उभर सकता है. अल्बर्टा के कनानास्किस में मोदी-कार्नी की बैठक के दौरान संसद में पेश की गई कनाडा की जासूसी एजेंसी की वार्षिक रिपोर्ट ओटावा में सार्वजनिक रूप से जारी की गई.
भारतीय अधिकारियों ने हिंसक उग्रवाद वाले खंड में ‘कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों’ को शामिल करने पर ज़ोर दिया था, जबकि 2023 की रिपोर्ट में इसका ज़िक्र नहीं था.
इस रिपोर्ट ने भारत पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए आरोप लगाया कि नई दिल्ली विदेशी हस्तक्षेप के तहत ‘गुप्त, भ्रामक या धमकी भरे’ हथकंडे अपना रहा है. कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा के अनुसार इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य कनाडा की नीतियों को भारत के हितों, खासकर खालिस्तान से संबंधित वकालत के अनुरूप ढालना है.
गौरतलब है कि अभी यह भी देखना बाकी है कि निज्जर को गोली मारने के आरोपी चार भारतीय नागरिकों के मुकदमे में भारतीय सरकारी अधिकारियों की कथित भूमिका से जुड़ा कोई भी विवरण कब सामने आता है. क्योंकि ये, एक ऐसा मुद्दा है, जो एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है.
