नई दिल्ली: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गिरफ्तारी जारी है. सोमवार (8 सितंबर) 1971 के मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले दिग्गज और पूर्व नौकरशाह अबु आलम मोहम्मद शाहिद खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.
खान, मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के प्रमुख आलोचक माने जाते हैं.
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद असहमति जताने वाली आवाज़ों पर लगातार कार्रवाई हो रही है. खान की गिरफ़्तार को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है.
पीटीआई के मुताबिक़, पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘उन्हें (खान को) ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने शाहबाग थाने में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया है.’
लेकिन बचाव पक्ष के वकील ओबायदुल इस्लाम के अनुसार, जासूसों (डिटेक्टिव्स) ने 8 सितंबर के तड़के एस्काटन इलाके से जब खान को गिरफ्तार किया, तब उनका नाम एफआईआर में शामिल नहीं था.
बांग्लादेश के अंग्रेजी अख़बार डेली स्टार के मुताबिक, खान की गिरफ्तारी के बाद उन्हें ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद सैफुज्ज़मान के सामने पेश किया गया. मजिस्ट्रेट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया. पुलिस ने खान पर आतंकवाद भड़काने का आरोप लगाया है.
हाल में महीनों में खान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की आलोचना कर रहे थे. खान 1996 से 2001 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के डिप्टी प्रेस सचिव रह चुके हैं.
आतंकवाद भड़काने का आरोप क्यों लगा?
बांग्लादेश स्टैंडर्ड के मुताबिक, 5 अगस्त को ‘मंचो 71’ नाम का एक मंच शुरू किया गया था. इसका घोषित उद्देश्य मुक्ति संग्राम के इतिहास को मिटाने या तोड़-मरोड़कर पेश करने की किसी भी साजिश का विरोध करना है. अपनी गतिविधियों के हिस्से के रूप में, इस समूह ने 28 अगस्त को सिगुनबागीचा स्थित ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी (डीआरयू) में एक गोलमेज चर्चा का आयोजन किया.
इस कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी, वकील, लेखक, पत्रकार, शिक्षक और पूर्व नौकरशाह शामिल हुए.
कार्यक्रम के दौरान अचानक एक भीड़ ने हॉल पर धावा बोल दिया, वक्ताओं को घेर लिया और कार्यक्रम को अचानक रोकना पड़ा. टेलीविज़न फुटेज में दिखा कि पूर्व मंत्री लतीफ़ सिद्दीकी शांतिपूर्वक कुर्सी पर बैठे थे जबकि गुस्साए लोग उन्हें घेरकर नारे लगा रहे थे.
हिंसक हुजूम ने प्रतिभागियों को ‘हसीना की फासीवादी सरकार के साथी’ करार दिया, साथ ही उन पर छात्र-नेतृत्व वाले ‘जुलाई विद्रोह’ के खिलाफ साज़िश रचने का आरोप लगाया, वही विद्रोह जिसने पिछले साल अवामी लीग सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था.
कई मेहमानों को कार्यक्रम स्थल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, जबकि पूर्व मंत्री अब्दुल लतीफ़ सिद्दीकी और प्रोफेसर शेख हाफ़िज़ुर रहमान को तब तक अंदर ही रोके रखा गया जब तक पुलिस पहुंची और 16 लोगों को हिरासत में नहीं ले लिया.
बाद में सब-इंस्पेक्टर अमीरुल इस्लाम ने 29 अगस्त को शाहबाग थाने में आतंकवाद-रोधी क़ानून के तहत एक मुकदमा दर्ज किया. खान के अलावा कार्यक्रम में शामिल ढाका यूनिवर्सिटी के लॉ प्रोफेसर हाफ़िज़ुर रहमान क़ुरज़ोन, पूर्व मंत्री लतीफ़ सिद्दीकी, पत्रकार मंज़ुरुल आलम पन्ना और मुक्ति संग्राम के कई दिग्गजों को देश के सख़्त आतंकवाद-रोधी क़ानून के तहत हिरासत में ले लिया गया है.
पुलिस का कहना है कि इन सभी ने मंचो 71 नामक एक मंच के बैनर तले दिए गए भाषण के ज़रिए आतंकवाद को भड़काने की कोशिश की.
इससे पहले 7 अगस्त को, यूनुस के आलोचक और रंगपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नज़मुल अहसन कलिमुल्लाह को हिरासत में लिया गया था.
