ब्रिक्स सम्मेलन: ब्राज़ील और चीन ने टैरिफ में बढ़ोतरी की निंदा की, भारत ने वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया

ब्रिक्स वर्चुअल शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के व्यापार घाटे, वैश्विक असुरक्षाओं और कूटनीति की ज़रूरत पर जोर दिया. ब्राज़ील व चीन ने अमेरिकी टैरिफ की आलोचना की. जयशंकर के कहा कि कूटनीति के जरिए ही 'शत्रुता का अंत' हो सकता है, यही एकमात्र स्थायी रास्ता है.

ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) नेताओं की वर्चुअल बैठक. (फोटो: पीटीआई via X/@DrSJaishankar)

नई दिल्ली: सोमवार (8 सितंबर) को ब्रिक्स वर्चुअल शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ‘शॉर्ट सप्लाई चेन्स’ का आह्वान करते हुए सदस्य देशों के साथ भारत के ‘व्यापार घाटे’ (ट्रेड डेफिसिट्स) पर प्रकाश डाला. उन्होंने टकराव की जगह कूटनीति की अपील की.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस सम्मेलन में ब्राज़ील ने ‘टैरिफ के जरिए ब्लैकमेल’, तो वहीं चीन ने ‘टैरिफ वॉर’ की निंदा की.

मालूम हो कि ब्राज़ील द्वारा आयोजित इस सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, जो शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन के साथ उनकी जीवंत बातचीत की तस्वीरें सामने आने के बमुश्किल एक हफ़्ते बाद हुआ.

उल्लेखनीय है कि केवल भारत और इथियोपिया ही ऐसे दो देश थे, जिनके विदेश मंत्रियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित अन्य नेता प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए.

जहां अन्य सदस्य देशों ने इस मंच का इस्तेमाल बिना अमेरिका का नाम लिए उसके द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ़ की तीखी आलोचना करने के लिए किया. वहीं, जयशंकर ने भारत की स्थिति को व्यापक वैश्विक चुनौतियों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया.

उन्होंने कहा कि महामारी के संचयी प्रभाव, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में युद्ध, वित्तीय अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन और संयुक्त राष्ट्र के विकास एजेंडे में मंदी ने बहुपक्षीय प्रणाली की विफलताओं को उजागर किया है.

उन्होंने कहा, ‘व्यापार पैटर्न और बाज़ार पहुंच आज वैश्विक आर्थिक विमर्श में प्रमुख मुद्दे हैं.’

जयशंकर ने चेतावनी दी कि बाधाएं बढ़ाने और लेन-देन को मुश्किल बनाने से कुछ हासिल नहीं होगा. न ही व्यापार उपायों को गैर-व्यापारिक मामलों से जोड़ने से कोई फ़ायदा होने वाला है.

बता दें कि जयशंकर के संबोधन का यह एकमात्र ऐसा अंश था, जिसे वाशिंगटन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50% टैरिफ़ की परोक्ष आलोचना के रूप में देखा जा सकता है.

हालांकि, इसके तुरंंत बाद जयशंकर ने ध्यान वापस ब्रिक्स देशों की ओर मोड़ दिया.

उन्होंने कहा, ‘हमारे कुछ सबसे बड़े घाटे ब्रिक्स भागीदारों के साथ हैं और हम इसका शीघ्र समाधान चाहते हैं.’

उन्होंने चेतावनी दी कि टकराव की स्थिति से ग्लोबल साउथ में खाद्य, ऊर्जा और उर्वरक की असुरक्षा और भी बदतर हो रही है. जबकि नौवहन पर हमले आजीविका के साथ-साथ वाणिज्य को भी ख़तरे में डाल रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘चुनिंदा संरक्षण वैश्विक समाधान नहीं हो सकता.’

जयशंकर के अनुसार, कूटनीति के जरिए ही इस ‘शत्रुता का शीघ्र अंत’ हो सकता है, जो एकमात्र स्थायी रास्ता है.

ब्रिक्स देशों को सामूहिक रूप से ‘बहुप्रतीक्षित बदलाव की एक मज़बूत आवाज़’ बनना चाहिए: विदेश मंत्री

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में गतिरोधों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इन गतिरोधों से प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति की स्थिति कमज़ोर हुई है.

उन्होंने कहा, ‘इन अनुभवों ने सामान्य रूप से और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में सुधारित बहुपक्षवाद की आवश्यकता को और भी ज़रूरी बना दिया है.’

मालूम हो कि भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र में अपनी भूमिका बढ़ाने पर ज़ोर देता रहा है, और जयशंकर ने ब्रिक्स के साझेदारों से कहा कि इस समूह को सामूहिक रूप से ‘बहुप्रतीक्षित बदलाव की एक मज़बूत आवाज़’ बनना चाहिए.

वहीं, शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने अपने बयान में बढ़ते टैरिफ को लेकर तीखी आलोचना की.

उन्होंने कहा, ‘हमारे देश अनुचित और अवैध व्यापार प्रथाओं के शिकार हो रहे हैं.’

उनके अनुसार, ‘टैरिफ ब्लैकमेल को बाज़ारों पर कब्ज़ा करने और घरेलू मुद्दों में दखलंदाज़ी करने के एक हथियार के रूप में सामान्य माना जा रहा है. सीमा-पार उपायों को लागू करने से हमारी संस्थाओं को ख़तरा है. ये प्रतिबंध मित्र देशों के साथ व्यापार को मज़बूत करने की हमारी आज़ादी को सीमित करते हैं. जीतने के लिए फूट डालना एकतरफ़ावाद की रणनीति है.’

भारत की तरह ब्राज़ील भी 50% टैरिफ की मार झेल रहा है. अपने टैरिफ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस तथाकथित ‘विचहंट’ से जोड़ा है, जो उनके सहयोगी और ब्राज़ील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो के ख़िलाफ़ चल रहा है. बोलसोनारो इस समय तख़्ता पलट की साज़िश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

लूला ने ब्रिक्स से कहा कि यह साबित करना ब्रिक्स पर निर्भर करता है कि ‘सहयोग किसी भी प्रकार की प्रतिद्वंद्विता पर विजय प्राप्त करता है.’

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अपने संबोधन में स्पष्ट तौर पर टैरिफ वॉर की आलोचना की.

उन्होंने कहा, ‘कुछ देशों द्वारा छेड़े गए व्यापार युद्ध और टैरिफ वॉर विश्व अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को कमज़ोर करते हैं.’

उनके अनुसार, ‘देश खुले सहयोग के अंतरराष्ट्रीय वातावरण के बिना फल-फूल नहीं सकते, और कोई भी देश आत्म-निर्भर अलगाव की ओर पीछे हटने का जोखिम नहीं उठा सकता.’

दक्षिण अफ्रीका के सिरिल रामफोसा ने भी चेतावनी दी कि यह ‘एकतरफ़ा टैरिफ कार्रवाई’ ‘ग्लोबल साउथ देशों के लिए ख़तरा’ है.

उन्होंने कहा, ‘नई व्यापार व्यवस्था की अनिश्चितता ने मेरे अपने देश दक्षिण अफ्रीका में रोज़गार के स्तर को पहले ही नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है और यह हमारी आर्थिक वृद्धि में बाधा है.’

उन्होंने उभरते देशों के समूह से ‘संकट प्रबंधन से रणनीतिक कार्रवाई की ओर बढ़ने’ और यह प्रदर्शित करने का आग्रह किया कि ‘आम सहमति बातचीत से बनती है, दबाव से नहीं.’