नेपाल: हिंसा के बाद सेना ने राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की, प्रदर्शकारियों को दी चेतावनी

नेपाल में दो दिनों तक चले युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाली सेना बुधवार (10 सितंबर) को देशव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की है.

नेपाल के काठमांडू में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सड़क पर कई इमारतों में लगी आग के बाद उठता धुआं. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नेपाल में दो दिनों तक चले युवाओं के नेतृत्व वाले हिंसक विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता के बीच नेपाली सेना बुधवार (10 सितंबर) को  निषेधाज्ञा और देशव्यापी कर्फ्यू की घोषणा की है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस विरोध प्रदर्शन में 19 लोगों की मौत हो गई है और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा है.

ताज़ा घटनाक्रम में बुधवार को नेपाली सेना ने बताया कि देश में निषेधाज्ञा शाम 5 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद गुरुवार सुबह 6 बजे तक देशव्यापी कर्फ्यू लागू किया जाएगा. ये प्रतिबंध अगली सूचना तक जारी रहेंगे, जो स्थिति पर निर्भर करेगा.

सेना ने उन प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है, जिन्होंने अशांति के दौरान हथियार, गोला-बारूद या अन्य उपकरण लूटे हों या अपने कब्ज़े में लिए हों, कि वे उन्हें तुरंत नज़दीकी सुरक्षा एजेंसी को सौंप दें. नागरिकों से बिना अनुमति के सुरक्षा बलों की वर्दी न पहनने का भी आग्रह किया गया है.

सेना ने प्रदर्शनों के दौरान हुई जान-माल की हानि पर दुख व्यक्त किया, साथ ही चेतावनी दी कि ‘अराजक तत्व’ प्रदर्शनों में घुसपैठ कर चुके हैं और आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़, हिंसक हमले और यौन हिंसा के प्रयास कर रहे हैं.

सेना ने कहा, ‘विरोध प्रदर्शन के नाम पर किए गए ऐसे किसी भी आपराधिक कृत्य को दंडनीय अपराध माना जाएगा और सुरक्षा बलों द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’

बयान के अनुसार, कर्फ्यू के दौरान आवश्यक सेवाओं को संचालन की अनुमति होगी, जिनमें एम्बुलेंस, शव वाहन, दमकल गाड़ियां और स्वास्थ्यकर्मियों तथा सुरक्षा बलों को ले जा रहे वाहन शामिल हैं. तत्काल सहायता की आवश्यकता वाले नागरिकों से कहा गया है कि वे आसपास के सुरक्षा अधिकारियों से संपर्क करें.

सेना ने जनता से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा

सेना ने जनता से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने और गलत सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील की है, साथ ही ‘राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, सुरक्षा और मानवीय मूल्यों’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया है.

रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार को नेपाल की संसद की सुरक्षा में सैनिक तैनात थे, जहां मंगलवार की अशांति के दौरान मुख्य हॉल में आग लगा दी गई थी और वह पूरी तरह जलकर खाक हो गया.

मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट, मंत्रियों के आवास और ओली के निजी आवास सहित कई अन्य सरकारी इमारतों को भी आग के हवाले कर दिया गया. राजधानी में जले हुए वाहन के ढेर बिखरे पड़े थे, जबकि सेना के अग्निशमन कर्मी आग पर काबू पाने में जुटे रहे.

हिंसक प्रदर्शनों के चलते काठमांडू हवाई अड्डे को शाम तक बंद रखने के कारण उड़ानें बाधित रहीं.

एक अलग एडवाइजरी में सेना ने नेपाल में रह रहे विदेशी नागरिकों से अनुरोध किया कि यदि उन्हें निकासी या अन्य सुविधाओं को लेकर तत्काल सहायता की आवश्यकता हो, तो वे निकटतम सुरक्षा कार्यालय या तैनात कर्मियों से संपर्क करें.

इसके अलावा सेना ने होटलों, पर्यटन संचालकों और विदेशी नागरिकों से जुड़े अन्य संस्थानों से भी अनुरोध किया कि वे आवश्यकतानुसार सहायता में समन्वय करें.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संकट को कम करने के लिए अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की तैयारी चल रही है, हालांकि विवरण स्पष्ट नहीं हैं.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बलराम केसी. ने प्रदर्शनकारियों से एक वार्ता दल बनाने का आग्रह किया है और संसद को भंग कर नए चुनाव कराने की मांग की है.

भारत की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने नेपाल मुद्दे पर बैठक की

मालूम हो कि नेपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर भारत की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने भी मंगलवार देर रात अपने पड़ोसी देश में जारी उथल-पुथल पर चर्चा की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संबंध में एक एक्स पोस्ट में जानकारी साझा करते हुए कहा, ‘नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि अत्यंत महत्वपूर्ण है. मैं नेपाल में अपने सभी भाइयों और बहनों से विनम्रतापूर्वक शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील करता हूं.’

मालूम हो कि यह नेपाल की ये अशांति फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार द्वारा लगाए गए रोक के विरोध में शुरू हुई थी, जो जल्द ही पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खात्मे की व्यापक मांगों में बदल गई. मुख्य तौर पर जेन-ज़ी के कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित इस आंदोलन में युवा नेपाली शामिल थे.

तेज़ और हिंसक होते प्रदर्शनों के मद्देनज़र प्रधानमंत्री ओली ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि वह एक संवैधानिक राजनीतिक समाधान के लिए पद छोड़ रहे हैं. हालांकि, वह कार्यवाहक के रूप में अभी पद पर बने हुए हैं.

प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े के बावजूद नेपाल में हिंसा शांत नहीं हुई. प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों में आग लगा दी, जिनमें सिंह दरबार, प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति आवास के कुछ हिस्से, साथ ही राजनीतिक नेताओं के घर भी शामिल थे.

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी प्रसारित हुए, जिनमें प्रदर्शनकारियों को नेपाली कांग्रेस के नेता और चार बार प्रधानमंत्री रहे शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी, विदेश मंत्री आरज़ू राणा देउबा से मारपीट करते हुए देखा गया.

इसके परिणामस्वरूप नेपाली सेना ने मंगलवार शाम को घोषणा की थी कि वह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्मियों को तैनात करेगी.