नई दिल्ली: राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की ओर से जारी ‘नारी 2025’ रिपोर्ट में देहरादून को महिलाओं के लिए देश के सबसे असुरक्षित शहरों में शामिल किए है. उत्तराखंड सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था. अब देहरादून पुलिस ने रिपोर्ट तैयार करने वाली प्राइवेट कंपनी पी-वैल्यू एनालिटिक्स को पूछताछ के लिए बुलाया है.
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने कहा कि कंपनी ने पहले पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं दिया. कंपनी के प्रबंध निदेशक और डेटा इकट्ठा करने तथा उसका विश्लेषण करने वाली टीमों को सभी दस्तावेज़ों के साथ एक हफ्ते के भीतर हाज़िर होने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने चेतावनी दी, ‘अगर कंपनी संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है या रिपोर्ट को आधारहीन साबित करने वाले सबूत सामने आते हैं, तो सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 28 अगस्त को जारी इस सालाना रिपोर्ट में देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित 10 शहरों में शामिल किया गया था. रिपोर्ट को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर ने सार्वजनिक किया था. लेकिन बीते हफ़्ते राज्य की भाजपा सरकार ने इसे ‘तथ्यों पर आधारित नहीं’ बताते हुए खारिज कर दिया. पुलिस के मुताबिक, शहर के व्यापारिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है.
सोमवार (8 सितंबर) को कंपनी के प्रतिनिधि मयंक धैया ने एसएसपी के सामने पेश होकर बताया कि सर्वे विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक शैक्षणिक शोध परियोजना के तौर पर कराया गया था. इसमें कंपनी की दो अलग-अलग टीमें शामिल थीं. एक ने सर्वे के ज़रिये डेटा इकट्ठा किया और दूसरी ने उसका विश्लेषण किया. हालांकि, पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट की बुनियाद और कार्यप्रणाली को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.
एनसीआरबी के आंकड़े और रिपोर्ट पर सवाल
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार देहरादून में बलात्कार-हत्या के मामले दर्ज नहीं हुए, लेकिन दहेज हत्या के 8 मामले, आत्महत्या के लिए उकसाने के 13 मामले और बलात्कार के 184 मामले दर्ज हुए. कुल मिलाकर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की संख्या 1,205 रही, जो पूरे राज्य से दर्ज मामलों का 27% है.
नारी रिपोर्ट ने 31 शहरों की 12,770 महिलाओं की राय के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार किया. इसमें भारत का राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 65% रखा गया और शहरों को इस आधार पर ‘बहुत ऊपर’, ‘ऊपर’, ‘नीचे’, और ‘बहुत नीचे’ जैसी श्रेणियों में रखा गया. कोहिमा, मुंबई और भुवनेश्वर को सुरक्षित शहरों में गिना गया, जबकि दिल्ली, पटना और जयपुर सबसे असुरक्षित में शामिल रहे.
राज्य सरकार का कहना है कि सर्वे न तो राष्ट्रीय महिला आयोग और न ही राज्य महिला आयोग द्वारा कराया गया था और इसका किसी सरकारी सर्वे संस्था से कोई संबंध नहीं है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार और पुलिस ने रिपोर्ट की कार्यप्रणाली और सैंपल साइज को कठघरे में खड़ा किया है. सरकार का दावा है कि सर्वे में देहरादून की लगभग 9 लाख महिला आबादी के बावजूद केवल 400 महिलाओं से ही फोन पर बातचीत कर निष्कर्ष निकाले गए.
रिपोर्ट जारी करते समय राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजय रहाटकर ने इसकी सराहना की थी. उन्होंने कहा था, ‘इस रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने वाले सभी पहलुओं को शामिल किया गया है. अगर इस रिपोर्ट को उन जगहों के स्थानीय अधिकारियों या निकायों तक पहुंचाया जाए, जहां सर्वे हुआ है, तो इसे लागू करना बहुत आसान होगा. राष्ट्रीय महिला आयोग भी इसमें मदद करेगा.’
उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट में केवल 4% महिलाओं के ऐप और तकनीकी सुविधाओं का उपयोग करने की बात कही गई है, जबकि उत्तराखंड पुलिस की गौरा शक्ति ऐप पर 1.25 लाख पंजीकरण हैं, जिसमे अकेले देहरादून से 16,649 हैं. पुलिस के बयान में कहा गया है, ‘यह साफ़ है कि रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है.’
सर्वे के लिए तैयार किए गए सवालों और सुरक्षा की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए बयान में कहा गया है, ‘हम सर्वे के नतीजों का सम्मान करते हैं लेकिन नीति निर्माण के लिए मज़बूत सर्वे कार्यप्रणाली ज़रूरी है.’
पी-वैल्यू एनालिटिक्स एक डेटा साइंस एजेंसी है जो कई बड़े संस्थानों के लिए मार्केट एनालिसिस करती है. उसके क्लाइंट में बीबीसी, एयर इंडिया, एयरटेल इत्यादि शामिल हैं.
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘अगर राजधानी देहरादून ही महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है, तो बाकी पहाड़ों और मैदानों में रहने वाली बेटियों का क्या होगा? भाजपा सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को सिर्फ़ चुनावी मुद्दा बना दिया है.’
