जम्मू-श्रीनगर हाईवे की मरम्मत में एनएचएआई की ‘देरी’ के चलते सेब उत्पादकों को भारी नुक़सान

कश्मीर के सेब उद्योग को इस बार लगभग 1,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान होने की संभावना है. इसकी वजह हाल ही में हुई भारी बारिश है, जिसमें जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को पहुंचे नुकसान के चलते किसान और व्यापारी हज़ारों टन सेब और नाशपाती देश-विदेश के फल बाज़ारों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएच 44 के किनारे सड़े हुए सेब फेंके हुए नज़र आ रहे हैं. (सभी फोटो: उमर फारूक)

श्रीनगर: कश्मीर के सेब उद्योग को इस बार लगभग 1,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान होने की संभावना है. इसकी वजह हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश है, जिसमें जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को पहुंचे नुकसान के चलते किसान और व्यापारी हज़ारों टन ताज़ा सेब और नाशपाती देश-विदेश के फल बाज़ारों तक पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

कश्मीर में हज़ारों फलों से लदे भारी ट्रक, कुछ तो लगभग तीन हफ़्ते से रुके हुए हैं. जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में हुए भारी भूस्खलन के कारण घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच एकमात्र बारहमासी नेशनल हाईवे भारी वाहनों के लिए बंद हो गया है.

इस संबंध में यातायात पुलिस (कश्मीर) के उप महानिरीक्षक अजीत सिंह ने द वायर को बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा यातायात बहाली का काम पूरा होने के बाद बुधवार दोपहर 2 बजे तक लगभग 800 ट्रक कश्मीर के काजीगुंड को जम्मू के बनिहाल से जोड़ने वाली एक प्रमुख सुरंग से निकले हैं.

उन्होंने कहा, ‘दिन के अंत तक अंतिम आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है. कल जम्मू से कश्मीर की ओर यातायात जारी रहेगा.’

मालूम हो कि इस समय घाटी के दर्जनों किसान और व्यापारी अपनी फसलें हाइवे पर फेंकने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि धूप के बीच कई दिनों तक राजमार्ग पर ट्रकों के फंसे रहने से फल सड़ गए हैं. इससे पूरे कश्मीर में आक्रोश फैला हुआ है.

दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर सेब ले जा रहे ट्रक फंसे हुए हैं.

सात लाख परिवार अपनी जीविका के लिए बागवानी क्षेत्र पर निर्भर हैं

जम्मू-कश्मीर सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग सात लाख परिवार अपनी जीविका के लिए बागवानी क्षेत्र पर निर्भर हैं.

इससे पहले द वायर ने 3 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राजमार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है.

इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि 25 अगस्त को उधमपुर में हुए भीषण भूस्खलन के बाद एनएचएआई द्वारा भारी वाहनों के लिए राजमार्ग बहाल न किए जाने पर इस राजमार्ग को जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार को सौंप दिया जाए.

अब्दुल्ला के इस सख्त रवैये के एक दिन बाद केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को मरम्मत कार्यों की समीक्षा के लिए एक आपात बैठक बुलाई, जिसके बाद फलों से लदे कुछ भारी ट्रकों को देश के अन्य राज्यों, बांग्लादेश और नेपाल में उनके गंतव्यों तक जाने की अनुमति दी गई.

इस बारे में कश्मीर में सेब उत्पादकों और व्यापारियों के एक प्रमुख नेता बशीर अहमद बशीर ने बताया कि राजमार्ग बंद होने के कारण कश्मीर के बागों और बाज़ारों में सेब और नाशपाती से लदे लगभग 5,000 ट्रक जमा हो गए हैं.

इस समय कश्मीर के अधिकांश थोक बाज़ारों भी किसानों से कोई ताज़ा उपज स्वीकार नहीं कर रहे, क्योंकि वहां पहले से ही फलों की भरमार है.

कश्मीर घाटी फल उत्पादक सह विक्रेता संघ (KVFGDU) के अध्यक्ष बशीर ने कहा, ‘कुछ ट्रक कल रात सड़े हुए फलों के साथ दिल्ली की आज़ादपुर मंडी पहुंचे, क्योंकि वे 15 दिनों से ज़्यादा समय से राजमार्ग पर फंसे हुए थे. हमें 1,000 करोड़ रुपये से 1,200 करोड़ रुपये के बीच के नुकसान की आशंका है.’

राजमार्ग के रखरखाव के लिए एनएचएआई ज़िम्मेदार 

उल्लेखनीय है कि राजमार्ग के रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार एनएचएआई उधमपुर में थराद और बल्ली नाला के बीच 300 मीटर लंबे हिस्से की बहाली में कथित तौर पर देरी के लिए कड़े सवालों का सामना कर रहा है.

कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इसे कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था पर ‘जानबूझकर किया गया हमला’ करार दिया है.

इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में लगभग 2,000 फलों से लदे ट्रकों को संकरी मुगल रोड से होकर अपने गंतव्यों तक जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन चार-एक्सल और पांच-एक्सल वाले ट्रकों, जिन्हें केवल श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर चलने की अनुमति है, पर प्रतिबंध के कारण सैकड़ों ट्रक घाटी में फंस गए हैं.

कश्मीर के पुलवामा में एक व्यक्ति अस्थायी सेब पैकिंग स्टोर के अंदर जाते हुए, जहां सड़े हुए सेब जमीन पर पड़े हैं.

सेब की कटाई के मौसम के चरम पर उद्योग के अनुमान के अनुसार, कश्मीर से जम्मू संभाग तक पीर पंजाल पर्वतमाला में स्थित काजीगुंड सुरंग से प्रतिदिन 1,200-1,500 फलों से लदे ट्रक गुजरते हैं.

बशीर ने कहा, ‘ज़्यादातर भारी ट्रक दिल्ली से आगे नेपाल और बांग्लादेश के बाज़ारों में जाते हैं और वे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. इस व्यापार से अपने 40 से ज़्यादा वर्षों के जुड़ाव में मैंने अपने फल उद्योग को कभी इतने संकट में नहीं देखा.’

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला, जो कथित तौर पर तीन हफ़्तों से ज़्यादा समय तक इस मामले पर ‘सोते’ रहने के लिए विपक्षी दलों, व्यापारियों और किसानों की आलोचना झेल रहे हैं, ने सार्वजनिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के प्रति नाराज़गी जताई है, जो एनएचएआई को नियंत्रित करती है.

सरकार के एक सूत्र ने कहा, ‘सच तो यह है कि यह एक राष्ट्रीय राजमार्ग है और हमारे सीधे नियंत्रण से बाहर है. हम न तो काम का आदेश दे सकते हैं और न ही अपने लोगों को वहां तैनात कर सकते हैं. इस परिस्थिति के कारण हम इस हिस्से पर उनके काम करने के तरीके को स्वीकार करने के लिए विवश हैं.’

उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री ने भूस्खलन के 48 घंटों के भीतर उधमपुर में सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाके का दौरा किया और सड़क बहाली की प्रगति के बारे में नियमित अपडेट भी मांगे.

69 वर्षीय सेब उत्पादक अब्दुल अहद सोफी, कश्मीर के पुलवामा में एक बाग में फसल के मौसम के दौरान सेबों की छंटाई करते हुए.

सेब किसानों और व्यापारियों का आरोप- निर्वाचित सरकार लगातार बारिश के बीच बेपरवाह

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि लगातार बारिश के कारण राजमार्ग पर कई जगहों पर एनएचएआई द्वारा किए जा रहे बहाली कार्य पर नकारात्मक असर पड़ा है, जबकि भारी वाहनों की आवाजाही के कारण उधमपुर में प्रभावित सड़क का हिस्सा और भी धंस गया, जिसके कारण उसे बंद कर दिया गया.

हालांकि, कश्मीर के कुछ सेब किसानों और व्यापारियों ने आरोप लगाया कि निर्वाचित सरकार लगातार बारिश के बीच बेपरवाह हो गई, जिससे केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बाढ़ आ गई.

इस आरोप का सरकार द्वारा खंडन किया गया है.

किसानों और व्यापारियों की इन समस्याओं को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने 1 सितंबर को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपील की थी कि वे सेब और नाशपाती के परिवहन के लिए विशेष रूप से श्रीनगर और दिल्ली के बीच मालगाड़ियों की व्यवस्था करें, क्योंकि फलों के सड़ने से बाज़ार प्रभावित होने लगे थे और जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर ट्रक फंस गए थे.

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले के एक सेब किसान गुलाम मोहिउद्दीन ने बताया कि अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में हुई लगातार बारिश के कारण उनके सेब के बाग में बाढ़ आ गई, जिससे आधी से ज़्यादा फ़सल बर्बाद हो गई.

पुलवामा कश्मीर में सेब उत्पादक फल पैक करते हुए.

उन्होंने द वायर को बताया, ‘जो कुछ भी हम बचा पाए, वह हाईवे पर ट्रकों में सड़ गया.’

मोहिउद्दीन, जिनके पुलवामा के रत्नीपोरा गांव में स्थित बाग में 700-800 पेटी सेब पैदा होते हैं, जिनसे उनके परिवार का साल भर गुज़ारा चलता है, का कहना है कि मालगाड़ियों में सेब पहुंचाने की सरकारी व्यवस्था न होने से संकट और बढ़ गया.

उन्होंने कहा, ‘अगर बागवानी विभाग ने किसानों को ट्रेनें बुक करने की सुविधा दी होती, तो शायद हमारा नुकसान कम हो सकता था.’

कश्मीर के पुलवामा में बाढ़ का पानी कम होने के बाद एक किसान बगीचे में कीचड़ से सने सेबों को छांटते हुए.

दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल का जश्न मनाने का क्या फ़ायदा?

पुलवामा ज़िले के एक अन्य सेब किसान अमीर राशिद ने कहा, ‘दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल (रियासी ज़िले में चिनाब नदी पर बने) का जश्न मनाने का क्या फ़ायदा, अगर यह ज़रूरत के समय परेशान किसानों की मदद नहीं कर सकता?’

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कश्मीर के फलों को दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों के बाज़ारों तक पहुंचाने के लिए मालगाड़ियों की व्यवस्था करने के लिए बागवानी विभाग द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया.

बशीर ने कहा कि जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर अनिश्चित स्थिति के कारण कश्मीर में ट्रकों की भारी कमी हो गई है, जिससे परिवहन शुल्क दोगुना हो गया है.

उन्होंने कहा, ‘पिछले साल सेब के प्रत्येक डिब्बे के लिए आज़ादपुर मंडी (दिल्ली) तक परिवहन की लागत 100 रुपये से भी कम थी, जो अब बढ़कर 220-230 रुपये हो गई है.’

उन्होंने आगे कहा कि इससे किसानों की कमाई में भारी कमी आएगी.

कश्मीर के पुलवामा में एक बगीचे में बाढ़ का पानी कम होने के बाद एक पेड़ पर कीचड़ से सना हुआ सेब.

हर गुजरते दिन और राष्ट्रीय राजमार्ग की खस्ता हालत को देखते हुए कश्मीरी किसानों और व्यापारियों को डर है कि अगर राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही जल्द ही सुचारू नहीं की गई, तो फंसे हुए ट्रकों का बैकलॉग और बढ़ सकता है.

बशीर ने कहा, ‘बैकलॉग को साफ़ करने में कम से कम एक हफ़्ते का अच्छा मौसम लगेगा. अगर मौसम खराब रहा, तो नुकसान और बढ़ेगा.’

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