एयर इंडिया हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने पायलेट की ‘चूक’ बताने वाली रिपोर्ट को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बताया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जून में हुए एयर इंडिया हादसे पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट में पायलटों की चूक का संकेत देना 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना' था. अदालत ने मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और त्वरित जांच की याचिका पर केंद्र व डीजीसीए को नोटिस दिया है.

अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त एयर इंडिया विमान का मलबा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 सितंबर) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस साल 12 जून को हुए एयर इंडिया हादसे पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की शुरुआती रिपोर्ट के कुछ पहलू, जो पायलटों की ओर से चूक का संकेत देते हैं, ‘गैर-जिम्मेदाराना’ थे.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और नागरिक उड्डयन महानिदेशक को नोटिस जारी किया.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 12 जुलाई को एएआईबी द्वारा जारी इस हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट के कुछ पहलुओं पर ध्यान दिया.

मालूम हो कि एनजीओ ‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद गठित जांच पैनल में तीन सदस्य विमानन नियामक से थे और इसमें हितों के टकराव का मुद्दा शामिल हो सकता है.

उड़ान डेटा रिकॉर्डर से जानकारी जारी करने की मांग

उन्होंने विमान के उड़ान डेटा रिकॉर्डर से जानकारी जारी करने की मांग की, जिससे दुर्घटना के कारणों का पता चल सके.

दुर्घटना पर अंतिम रिपोर्ट की वकालत करने वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में गोपनीयता और निजता व गरिमा के पहलुओं का मुद्दा शामिल है.

इस बात के प्रति आगाह करते हुए कि विशेष प्रकार की सूचना जारी करने का प्रतिद्वंद्वी एयरलाइनों की ओर से फायदा उठाया जा सकता है, पीठ ने कहा कि वह केवल दुर्घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष, स्वतंत्र और शीघ्र जांच के सीमित पहलू पर ही नोटिस जारी कर रही है.

उल्लेखनीय है कि कैप्टन अमित सिंह (FRAeS) के नेतृत्व वाले एक विमानन सुरक्षा एनजीओ ने यह याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक जांच नागरिकों के जीवन, समानता और सच्ची जानकारी तक पहुंच के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है.

एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट

याचिका में कहा गया है कि एएआईबी ने 12 जुलाई को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें दुर्घटना का कारण ‘ईंधन कटऑफ स्विच’ को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ में ट्रांसफर करना बताया गया, जिससे पायलट की गलती का संकेत मिलता है.

रिपोर्ट में एक अहम तकनीकी जानकारी यह दी गई थी कि विमान के दोनों इंजन के ‘फ्यूल कट-ऑफ स्विच’ (ईंधन बंद करने वाले स्विच) एक के बाद एक, एक सेकंड से भी कम अंतर में ‘रन’ से ‘कटऑफ’ मोड में चले गए. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग के अनुसार, उस वक्त एक पायलट दूसरे से पूछता है, ‘तुमने फ्यूल क्यों काटा?’, जिस पर दूसरा जवाब देता है, ‘मैंने नहीं किया.’

हालांकि, इन पंक्तियों के पहले और बाद की बातचीत का विवरण रिपोर्ट में नहीं दिया गया था.

इसमें आरोप लगाया गया है कि रिपोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया गया है, जिसमें पूर्ण डिजिटल फ़्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) आउटपुट, टाइम स्टैम्प के साथ संपूर्ण कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) ट्रांसक्रिप्ट और इलेक्ट्रॉनिक एयरक्राफ्ट फ़ॉल्ट रिकॉर्डिंग (ईएएफआर) डेटा शामिल हैं.

याचिका के अनुसार, इस हादसे की पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ समझ के लिए ये जानकारी आवश्यक हैं.

याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए प्रशांत भूषण ने कहा, ‘एअर इंडिया के विमान बोइंग ड्रीमलाइनर 171 की कमान अनुभवी पायलट्स के हाथ में थी. इस हादसे को 100 दिन पूरे हो चुके हैं. अभी तक सिर्फ प्राथमिक रिपोर्ट ही रिलीज की गई है. इस रिपोर्ट में भी विमान हादसे की वजह साफ नहीं है. इससे साफ है कि बोइंग में सफर करने वाले सभी यात्रियों की जान खतरे में है.’

इस पर जस्टिस सिंह ने कहा कि वर्तमान मामला ‘केवल एक अकेली दुर्घटना की जांच’ से संबंधित नहीं है, बल्कि ‘भारत में नागरिक उड्डयन की सुरक्षा में जनता के विश्वास की रक्षा’ से संबंधित है.

याचिका में आगे कहा गया है, ‘जब नागरिक अपनी जान हवाई यात्रा के लिए सौंपते हैं, तो वे इस विश्वास के साथ ऐसा करते हैं कि राज्य दुर्घटनाओं की जांच में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा. एक चुनिंदा या समझौतापूर्ण जांच न केवल पीड़ितों को न्याय से वंचित करती है, बल्कि भविष्य के यात्रियों को भी उन्हीं प्रणालीगत जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है.’

गौरतलब है कि  12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी. विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के ऊपर गिरा था, जिसके कारण वहां और आस पास के 19 और लोगों के जान जाने की रिपोर्ट आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज है.

241 मृतकों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली नागरिक, एक कनाडाई और 12 चालक दल के सदस्य शामिल थे.

इस दुर्घटना में जीवित बचे एकमात्र व्यक्ति ब्रिटिश नागरिक विश्वाशकुमार रमेश थे.