नई दिल्ली: दिल्ली की रोहिणी अदालत के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने मंगलवार (23 सितंबर) को अडानी समूह के खिलाफ़ रिपोर्टिंग पर रोक लगाने वाले एकपक्षीय गैग ऑर्डर के खिलाफ़ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता और न्यूज़लॉन्ड्री की अपीलों को उस जज के पास भेजने से इनकार कर दिया जिन्होंने चार अन्य पत्रकारों के मामले में उस आदेश को रद्द कर दिया था.
इससे पहले सोमवार (22 सितंबर) को जिला न्यायाधीश सुनील चौधरी ने अपीलों को न्यायाधीश आशीष अग्रवाल के पास भेज दिया था.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर पाल सिंह ने मंगलवार को कहा कि चूंकि परंजॉय की अपील पर जिला न्यायाधीश चौधरी के समक्ष दलीलें पेश की जा चुकी हैं, इसलिए मामला उनके समक्ष रखा जाना चाहिए.
हालांकि शुरुआत में प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि ‘औचित्य (propriety) की मांग है कि आदेश समान न्यायाधीश द्वारा पारित किया जाए.’ बाद में उन्होंने गुहा ठाकुरता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील अपार गुप्ता से पूछा कि क्या उन्हें जिला न्यायाधीश चौधरी द्वारा अपील की सुनवाई में कोई परेशानी है.
जवाब में गुप्ता ने कहा कि यदि न्यायाधीश चौधरी और न्यायाधीश अग्रवाल द्वारा पारित आदेशों में विसंगतियां होंगी तो यह कठिनाई उत्पन्न हो सकती है.
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘आप दूसरी अदालत का आदेश दिखाइए. एक तो पहले ही तय हो चुका है. अपीलीय अदालत (जज चौधरी) को दूसरी अदालत का फ़ायदा मिलेगा. वह ज़्यादा समझदार हो जाएगी.’
न्यूज़लॉन्ड्री की अपील पर भी ऐसा ही आदेश पारित किया गया है. अब दोनों अपीलों पर बुधवार (24 सितंबर) को सुनवाई होनी है.
ज्ञात हो कि 18 सितंबर को न्यायाधीश अग्रवाल ने पत्रकार रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, आयुषकांत दास और आयुष जोशी को अडानी एंटरप्राइज लिमिटेड (एईएल) को ‘बदनाम’ करने वाली खबरें प्रकाशित करने से रोकने वाले एकपक्षीय आदेश पर रोक लगा दी थी.
उसी दिन न्यायाधीश चौधरी ने एकपक्षीय गैग आदेश के खिलाफ गुहा ठाकुरता की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. हालांकि, न्यायाधीश अग्रवाल ने एक अलग मामले में चार अन्य पत्रकारों के मामले में उसी आदेश को रद्द कर दिया.
इसके बाद न्यायाधीश चौधरी ने मामले को स्थानांतरित कर दिया.
रोहिणी अदालत ने 6 सितंबर को एक एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित किया था जिसमें कई पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को एईएल को कथित रूप से बदनाम करने वाले लेख और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और अगली सुनवाई तक फर्म के खिलाफ ऐसी सामग्री प्रकाशित न करने का निर्देश दिया गया था.
पत्रकार संगठनों ने एकपक्षीय आदेश के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उस नोटिस पर चिंता और निराशा व्यक्त की थी जिसमें मीडिया घरानों और कई यूट्यूब चैनलों से अडानी समूह का उल्लेख करने वाली सामग्री हटाने को कहा गया था.
ज्ञात हो कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को दो मीडिया संस्थानों और कई यूट्यूब चैनलों को नोटिस भेजकर अडानी समूह का उल्लेख करने वाले कुल 138 वीडियो और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने का आदेश दिया था. यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर मानहानि के एक मामले में 6 सितंबर को उत्तर पश्चिम दिल्ली जिला न्यायालय द्वारा जारी एकपक्षीय (Ex Parte) आदेश पर आधारित थी.
