नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार (24 सितंबर) को पैगंबर मुहम्मद के प्रति प्रेम व्यक्त करने के अधिकार का पुरजोर बचाव किया. उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साधारण शब्द– ‘आई लव मुहम्मद’ – कैसे गैरकानूनी माने जा सकते हैं और अदालतों से इस पर तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद 9 सितंबर को शुरू हुआ, जब कानपुर पुलिस ने 4 सितंबर को बारावफात (ईद मिलाद-उन-नबी) के जुलूस के दौरान सड़क पर कथित तौर पर ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे बोर्ड लगाने के आरोप में नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.
कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘नया चलन’ बताया था और दावा किया कि यह जानबूझकर भड़काने वाला कदम है.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए इस पोस्ट के बाद कि ‘आई लव मुहम्मद’ कहना कोई अपराध नहीं है, इस मुद्दे ने सबका ध्यान खींचा.
अब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इन तीन शब्दों पर मामला दर्ज करने का मतलब है कि कोई व्यक्ति वास्तव में मानसिक रूप से अस्वस्थ है.
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अदालतें इसे जल्द से जल्द ठीक करें और पूछा कि ‘आई लव मुहम्मद’ लिखना कैसे गैरकानूनी हो सकता है.
उमर ने संवाददाताओं से कहा, ‘किसी को इसे लिखने पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? इन तीन शब्दों से किसे आपत्ति हो सकती है? मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इन तीन शब्दों को लिखने पर गिरफ्तारी कैसे हो सकती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति वास्तव में मानसिक रूप से अस्वस्थ है जो इन तीन शब्दों पर मुकदमा दायर कर सकता है. मैं चाहता हूं कि अदालतें इसे जल्द से जल्द ठीक करें. ‘आई लव मुहम्मद’ लिखना कैसे गैरकानूनी है?’
अब्दुल्ला ने कहा कि भले ही यह किसी विशेष धर्म से जुड़ा हो, ‘आई लव मुहम्मद’ लिखना कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए, क्योंकि अन्य धर्मों के लोग भी अपने गुरुओं या देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं.
उमर ने पूछा, ‘अगर आप इसे किसी धर्म से भी जोड़ते हैं, तो इसमें ग़लत क्या है? क्या दूसरे धर्मों के अनुयायी अपने देवी-देवताओं के बारे में नहीं लिखते? क्या हमारे सिख भाई-बहन अपने गुरुओं के बारे में नहीं लिखते? क्या हमारे हिंदू भाई-बहन अपने अलग-अलग देवी-देवताओं के बारे में नहीं लिखते? वे लिखते हैं. जम्मू-कश्मीर के बाहर कहीं भी चले जाइए, आपको शायद ही कोई ऐसा वाहन मिलेगा जिस पर किसी देवी-देवता की तस्वीर न लगी हो. अगर वह ग़ैरक़ानूनी नहीं है, तो यह कैसे है?’
