नई दिल्ली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने ओडिशा की इंजीनियर्स ऑफ इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसीज (आईटीडीए) के कामकाज में बड़ी अनियमितताओं की ओर इशारा किया है, जो अनुसूचित जनजातियों के लिए सेवाएं और सार्वजनिक वस्तुएं प्रदान करती हैं.
यह रिपोर्ट बुधवार को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कैग ने 2018-19 से 2022-23 की अवधि को कवर करते हुए इनमें से 11 एजेंसियों का ऑडिट किया.
इसमें कहा गया है कि आईटीडीए के इंजीनियरों ने पांच साल की अवधि में राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित 148.75 करोड़ रुपये का बीमा प्रीमियम से लेकर मोबाइल फोन रिचार्ज तक निजी लेनदेन में किए. कनिष्ठ और सहायक इंजीनियरों ने सभी नियमों की धज्जियां उड़ा दीं.
रिपोर्ट के अनुसार, नमूना जांच अवधि के दौरान राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं हेतु आईटीडीए को 1,709.47 करोड़ रुपये जारी किए, जिनमें से वे 1,190.44 करोड़ रुपये (70 प्रतिशत) खर्च कर सके.
ऑडिट में खराब व्यय दक्षता और कुप्रबंधन सामने आए हैं. विभागीय कार्यों के व्यय में अनियमितताएं पाई गईं, जो सरकारी मानदंडों का उल्लंघन करके किए गए थे.
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा लोक निर्माण विभाग (ओपीडब्ल्यूडी) संहिता के अनुसार, व्यय आईटीडीए के व्यक्तिगत बहीखाते से किया जाना चाहिए, न कि जूनियर इंजीनियरों (जेई) और सहायक इंजीनियरों (एई) के नाम से खोले गए अलग-अलग खातों के माध्यम से.
हालांकि, इन 11 आईटीडीए के मामले में विभागीय रूप से निष्पादित कार्यों के सभी भुगतान जेई और एई के बैंक खातों में भेज दिए गए, जो आंतरिक नियंत्रण की एक बड़ी विफलता थी. कैग ने पाया कि इंजीनियरों को कार्यान्वयन लागत के लिए उनके द्वारा लागत अनुमान के अनुसार तैयार किए गए चालू खाता बिलों के आधार पर भुगतान किया गया, भले ही वास्तविक खर्च कुछ भी हो. यह राशि उनके नाम पर खोले गए बैंक खातों में जमा कर दी गई.
इन बैंक खातों से जेई और एई ने एटीएम निकासी, यूपीआई लेनदेन, चेक और पीओएस के माध्यम से भुगतान के जरिए 148.75 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत लेनदेन किया.
बीमा प्रीमियम और मोबाइल फोन रिचार्ज के भुगतान भी इन्हीं खातों से किए गए. कैग की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ये संबंधित जेई/एई द्वारा सार्वजनिक धन के संदिग्ध दुरुपयोग के संकेत हैं.’
रिपोर्ट में दस्तावेज़ीकरण में अनियमितताओं की भी ओर इशारा किया गया है. आईटीडीए द्वारा कार्यान्वित कई कार्यों के बिल उपलब्ध नहीं थे और जो बिल उपलब्ध थे, उनमें कई अनियमितताएं थीं जैसे गलत तारीख, संख्याएं, जीएसटी पंजीकरण का अभाव आदि.
इसमें कहा गया है कि नौ सैंपल आईटीडीए में 20.71 करोड़ रुपये के कथित व्यय के विरुद्ध 17.33 करोड़ रुपये के वाउचर उपलब्ध थे, जबकि सैंपल जांच किए गए 325 कार्यों में 3.23 करोड़ रुपये के भुगतान के साथ बिल गायब थे. 544 कार्यों के लिए 2,476 बिल, गायब तारीख, गायब चालान संख्याएं, डुप्लिकेट, अपंजीकृत संस्थाएं और बेमेल जीएसटी विवरण शामिल थे.
कार्यों के लिए इनपुट सामग्री की खरीद में भी अनियमितताएं पाई गईं. सहकारिता विभाग ने इस वर्ष जून में सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और मितव्ययिता की आवश्यकता के कारण ओडिशा उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड और क्षेत्रीय सहकारी विपणन समिति जैसी सहकारी समितियों को सरकारी कार्यालयों को वस्तुओं की आपूर्ति करने का विशेषाधिकार वापस ले लिया था.
इसमें निर्देश दिया गया था कि इन समितियों को निविदा प्रक्रियाओं में अन्य आपूर्तिकर्ताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी. इसके बावजूद नमूना आईटीडीए में से 10 ने बिना निविदा के सहकारी समितियों से 54.25 करोड़ रुपये मूल्य की इनपुट सामग्री खरीदी.
इसमें कहा गया है कि आईटीडीए परलाखेमुंडी में पीए ने अनुमोदन सीमा पार कर ली, स्वीकृत 73.60 लाख रुपये के मुकाबले 3.74 करोड़ रुपये के उपकरण और पोशाकें खरीदीं, जिसमें नए टेंडर के बिना, रिपीट ऑर्डर के माध्यम से 2.09 करोड़ रुपये शामिल थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि आईटीडीए ओडिशा सरकार के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति विभाग के अधीन हैं, इसलिए कैग ने विभाग को सभी आईटीडीए में विभागीय कार्यों के लिए जेई और एई द्वारा किए गए सभी बैंक लेनदेन की समीक्षा करने और सरकारी धन के ‘संदिग्ध दुरुपयोग’ में लिप्त अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय करने को कहा है.
कैग ने ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति विभाग से आईटीडीए को निर्देश जारी करने को कहा कि वे इंजीनियरों द्वारा बैंक खातों के संचालन की अनियमित प्रथा को रोकें तथा उचित प्रक्रियाओं का पालन करें.
ज्ञात हो कि भारत में अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाली जनजातीय आबादी के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-1979) के दौरान आईटीडीए की स्थापना की गई थी. 22 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी वाले ओडिशा में 22 आईटीडीए हैं जिनकी स्थापना 1979-80 से 2022-23 की अवधि के दौरान की गई थी.
