लद्दाख में हुई हिंसा में चार की मौत, कर्फ्यू लागू; केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया

बुधवार को लेह में राज्य के दर्जे को लेकर हुए प्रदर्शनों में हिंसा भड़कने के बाद लद्दाख प्रशासन ने करगिल ज़िले में सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है. 24 सितंबर को हुई हिंसा में चार मौतों के साथ दर्जनों नागरिक और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा है.

बुधवार को लेह, लद्दाख में राज्य के दर्जे और अन्य मांगों को लेकर भड़की हिंसा के एक दिन बाद, गुरुवार को कर्फ्यू लगाया गया है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक ने बुधवार (24 सितंबर) को लद्दाख के लेह शहर में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम चार प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद अपना अनशन वापस ले लिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस झड़प में कई अन्य लोगों के घायल होने की खबर है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है.

द वायर को प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतकों की पहचान लेह के स्कुर बुचन निवासी 46 वर्षीय थारचिन, लेह के खरनालिंग निवासी 25 वर्षीय जिग्मेट दोरजय, लेह के इगू निवासी 23 वर्षीय स्टैनज़िन नामग्याल और लेह की आर्यन घाटी के हनु गांव निवासी 20 वर्षीय दादुल के रूप में हुई है.

सूत्रों ने बताया कि ये सभी आम नागरिक थे और बुधवार को लेह शहर में हज़ारों प्रदर्शनकारियों के हिंसक हो जाने पर सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में मारे गए.

उल्लेखनीय है कि करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए), जो लद्दाख पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) का हिस्सा है, द्वारा गुरुवार को क्षेत्र में बंद का आह्वान किया गया.

शहर में कर्फ्यू

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (25 सितंबर) को लेह और करगिल जिलों में पूरी तरह से बंद रहा. सभी कार्यालय, बाज़ार, शैक्षणिक संस्थान, बैंक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि चीन की सीमा से लगे इस क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक परिवहन दोनों ही सड़कों से नदारद रहे.

सूत्रों ने बताया कि अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शनों के बाद किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए दोनों जिलों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. इन प्रदर्शनों ने लद्दाख में नागरिक और सुरक्षा प्रशासन दोनों को आश्चर्य में डाल दिया है.

मालूम हो कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर सोनम वांगचुक और अन्य बीते 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे.

सरकार ने सोनम वांगचुक को जिम्मेदार बताया

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को भड़की हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एक अनियंत्रित भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट कर दिया और पुलिस पर हमला किया, जिसमें लगभग 30 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें ‘दुर्भाग्य से कुछ लोगों के हताहत होने की सूचना’ है.

गृह मंत्रालय ने बताया कि हिंसा सुबह 11.30 बजे शुरू हुई और शाम 4 बजे तक स्थिति पर काबू पा लिया गया.

इसके अलावा देर रात जारी एक बयान में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस हिंसा के लिए सोनम वांगचुक को ज़िम्मेदार ठहराया है.

केंद्र सरकार ने बयान में कहा गया है कि कुछ लोग पूर्ण राज्य और छठी अनुसूची के विस्तार पर लद्दाख के लोगों से हो रही बातचीत में प्रगति से खुश नहीं हैं और इसमें बाधा डाल रहे हैं.

सरकार ने अपने बयान में कहा है कि इन विषयों पर हाई पावर कमिटी की 6 अक्तूबर को होने वाली बैठक को अब 25-26 सितंबर को करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि आंदोलनकारी संगठनों के साथ संवाद हो सके.

मंत्रालय के अनुसार, ‘जिन मांगों को लेकर श्री वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वे एचपीसी में चर्चा का अभिन्न अंग हैं. कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करने के बावजूद, उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी और अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में ज़ेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया.’

सरकार का कहना है कि  24 सितंबर को लगभग 11.30 बजे उनके भड़काऊ भाषणों से उकसाई गई भीड़ भूख हड़ताल स्थल से निकली और एक राजनीतिक दल के कार्यालय के साथ-साथ लेह के सीईसी के सरकारी कार्यालय पर हमला किया. उन्होंने इन कार्यालयों में आग लगा दी, सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया और पुलिस वाहन को आग लगा दी.

मंत्रालय ने आगे कहा है कि ‘कुछ लोगों की स्वार्थ की राजनीति और सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की वजह से लद्दाख और उसके युवा भारी कीमत चुका रहे हैं.’

इस संबंध में लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने एक बयान में मौतों की पुष्टि की, लेकिन संख्या नहीं बताई. उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर कर्फ्यू लगा दिया गया है.

ज्ञात हो कि लद्दाख स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में बुधवार को तोड़फोड़ की गई. हज़ारों लोग लेह में सड़कों पर उतर आए और 2019 में केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर पुलिस से भिड़ गए.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लेह में लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) सचिवालय के बाहर छिटपुट प्रदर्शन के बेकाबू हो जाने के बाद बुज़ुर्गों और बच्चों समेत हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए.

अधिकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ‘हालात संभालने के लिए पूरे शहर में बड़ी संख्या में तैनात पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने आंसू गैस के गोले दागे.’

उपराज्यपाल ने साज़िश बताया

उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इन घटनाओं को ‘दिल दहला देने वाला करार दिया और कहा कि आज जो हुआ वह स्वतःस्फूर्त नहीं बल्कि एक साज़िश का नतीजा था.’

उन्होंने कहा, ‘हम यहां माहौल ख़राब करने वालों को नहीं छोड़ेंगे.’ उन्होंने याद दिलाया कि लद्दाख में इससे पहले 27 अगस्त 1989 को बड़ी हिंसा हुई थी, जब केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मांगने वाले आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में तीन लोगों की मौत हो गई थी.

करगिल के उपायुक्त राकेश कुमार ने 24 सितंबर की शाम को जारी एक आदेश में कहा कि जिले में ‘सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए’ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधात्मक प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं.

ज्ञात हो कि बीएनएसएस की धारा 163, जो औपनिवेशिक काल की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का नया रूप है, मजिस्ट्रेट को उन मामलों में लिखित आदेश जारी करने का अधिकार देती है जहां मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को नुकसान, खतरे या सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो.

कुमार द्वारा जारी इस एक तरफा (ex parte) आदेश में कहा गया है कि बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी जुलूस, रैली, सार्वजनिक मार्च या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी. साथ ही लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों और वाहनों पर लगे सार्वजनिक संबोधन प्रणालियों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

आदेश में कहा गया है कि ऐसे सार्वजनिक बयानों, भाषणों या इलेक्ट्रॉनिक संदेशों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जिनसे “शांति भंग होने या दुश्मनी भड़कने की संभावना हो’, जबकि करगिल जिले में ‘शांति और सौहार्द को नुकसान पहुंचाने वाले उद्देश्यों’ के लिए पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि लद्दाख एपेक्स बॉडी की युवा शाखा ने 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे 15 लोगों में से दो की हालत मंगलवार शाम बिगड़ने के बाद बंद की अपील की थी.

एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा था कि ‘त्सेरिंग आंगचुक (72 साल) और ताशी डोल्मा (60 साल) की स्थिति बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा.’

हिंसा के बाद कांग्रेस नेता और पार्षद फुंतसोग स्तानज़िन त्सेपग के ख़िलाफ़ भूख हड़ताल वाली जगह पर उत्तेजक भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.

भाजपा का कांग्रेस पर आरोप

भाजपा ने आरोप लगाया कि ये हिंसा कांग्रेस की ‘एक नापाक साज़िश का हिस्सा है, जिसके ज़रिए वह देश में बांग्लादेश, नेपाल और फ़िलीपींस जैसी स्थिति पैदा करना चाहती है.’

वहीं, सोनम वांगचुक ने इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक समर्थन के दावों को खारिज करते हुए कहा, ‘युवा स्कूली और कॉलेज की लड़कियां, यहां तक कि भिक्षु भी बाहर आ गए और पुलिस से भिड़ गए. कुछ लोग कहते हैं कि किसी पार्टी ने ऐसा किया, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि लद्दाख में कोई भी पार्टी इतनी शक्तिशाली नहीं है कि वह उस पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर सके जैसा हमने आज लेह में देखा.’

वांगचुक ने कहा, ‘यह टूटे वादों और लोकतंत्र के हनन का नतीजा है.’