नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को कहा कि वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) पर रिपोर्टिंग करने से रोकने वाले एकपक्षीय आदेश का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं, जब तक कि न्यायाधीश द्वारा नए आदेश पारित नहीं किए जाते हैं.
इस आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए परंजॉय गुहा ठाकुरता ने कहा कि वह ‘बेहद खुश और अभिभूत’ हैं.
ठाकुरता ने गुरुवार (25 सितंबर) शाम अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट में लिखा, ‘मैं बेहद खुश और अभिभूत हूं. लेकिन मुझे यह भी पता है कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है.’
लाइव लॉ के अनुसार, इससे पहले गुरुवार को रोहिणी कोर्ट के जिला न्यायाधीश सुनील चौधरी ने कहा कि ठाकुरता अडानी समूह पर रिपोर्टिंग करने से रोकने वाले एकपक्षीय प्रतिबंध आदेश का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं, जब तक कि वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश द्वारा नए आदेश पारित नहीं किए जाते, जो शुक्रवार (26 सितंबर) को उनकी सुनवाई करेंगे.
जिला न्यायाधीश चौधरी ने कहा कि गुहा को निचली अदालत के वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई में शामिल होने के लिए भी कहा जा सकता है, जिन्हें अडानी एंटरप्राइजेज के मुकदमे में अन्य पत्रकारों की अपील पर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है.
अदालत ने कहा, ‘उत्तर-पश्चिम के वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत को निर्देश दिया जाता है कि वह अपीलकर्ता परंजॉय गुहा ठाकुरता और अन्य प्रतिवादियों की सुनवाई 26.09.2025 को दोपहर 2:00 बजे करे, जब उत्तर-पश्चिम के जिला न्यायाधीश-03 के आदेशानुसार मामले की सुनवाई की जानी है.’
न्यायाधीश ने कहा कि वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश, सीपीसी के आदेश 39 नियम 1 और 2 के तहत आवेदन पर नए आदेश पारित करते समय अंतरिम निषेधाज्ञा प्रदान करने के संबंध में स्थापित कानून के सिद्धांतों पर विचार करेंगे.
अदालत ने कहा, ‘तदनुसार अपील का निपटारा किया जाता है और अपीलकर्ता 06.09.2025 के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगें, जब तक कि वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश की अदालत द्वारा उसकी सुनवाई के बाद नए आदेश पारित नहीं किए जाते.’
ज्ञात हो कि इससे पहले रोहिणी अदालत ने 6 सितंबर को एक एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित किया था, जिसमें कई पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को एईएल को कथित रूप से बदनाम करने वाले लेख और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और अगली सुनवाई तक फर्म के खिलाफ ऐसी सामग्री प्रकाशित न करने का निर्देश दिया गया था.
पत्रकार संगठनों ने एकपक्षीय आदेश के साथ-साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के उस नोटिस पर चिंता और निराशा व्यक्त की थी, जिसमें मीडिया घरानों और कई यूट्यूब चैनलों से अडानी समूह का उल्लेख करने वाली सामग्री हटाने को कहा गया था.
