जनवरी से अब तक 2,417 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि जनवरी 2025 से अब तक 2,400 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अवैध प्रवास के ख़िलाफ़ है और वह लोगों की वैध आवाजाही के लिए रास्ते को बढ़ावा देना चाहता है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल 26 सितंबर, 2025 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए. (फोटो: पीटीआई वीडियो से)

नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार (26 सितंबर) को कहा कि जनवरी से अब तक 2,400 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अवैध प्रवास के खिलाफ है और वह लोगों की वैध आवाजाही के लिए रास्ते को बढ़ावा देना चाहता है.

उन्होंने कहा, ‘जनवरी से अब तक 2417 भारतीयों को अमेरिका से निर्वासित या प्रत्यावर्तित किया जा चुका है.’

मालूम हो कि अमेरिकी प्राधिकारों द्वारा पंजाब की 73 वर्षीय सिख महिला हरजीत कौर को स्वदेश वापस भेजे जाने के बाद निर्वासन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. कौर तीन दशक से अमेरिका में रह रही थीं.

इस संबंघ में रणधीर जायसवाल ने बताया कि 20 जनवरी 2025 के बाद से अमेरिकी प्रशासन ने हरदजीत कौर समेत 2,417 भारतीयों को वापस अपने देश भेजा है.

उन्होंने कहा, ‘हम प्रवास के लिए कानूनी रास्ते को बढ़ावा देना चाहते हैं. साथ ही, भारत अवैध प्रवास के विरुद्ध है.’

जायसवाल के अनुसार, जब किसी देश में कोई व्यक्ति कानूनी स्थिति के बिना पाया जाता है और उसकी भारतीय नागरिकता का दावा किया जाता है, तो भारत उसके दस्तावेजों की जांच कर राष्ट्रीयता की पुष्टि करने के बाद ही उसे वापस लेता है.

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अमेरिका से हुए निर्वासनों में लगातार जारी है.

उन्होंने यह भी कहा कि वीजा धोखाधड़ी और अन्य मामलों में भारत अवैध प्रवासन को रोकने के प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहा है. इसके तहत राज्य सरकारों के साथ मिलकर अवैध प्रवासन को बढ़ावा देने वालों पर कार्रवाई की जा रही है.

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में भारतीय नागरिकों को कानूनी प्रवासन के विकल्प अपनाने और दक्षिण पूर्व एशिया में मिलने वाले संदिग्ध रोजगार अवसरों से दूर रहने की चेतावनी भी दी.

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद अमेरिका में अवैध तरीके से रह रहे 104 निर्वासित लोगों को लेकर अमेरिका का पहला सैन्य विमान 5 फरवरी को अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा था.

तब विमान में सवार लोगों ने बताया था कि उन्हें अमेरिका से भारत लाने के क्रम में 40 घंटों तक हथकड़ी लगाकर रखा गया था. उनके पैर जंजीरों से बंधे थे. इन लोगों को सीट से एक इंच भी हिलने की इजाजत नहीं थी. बार-बार आग्रह करने के बाद उन्हें खुद को घसीटकर शौचालय तक जाने की अनुमति दी गई थी.

भारतीय निर्वासित लोगों के साथ अमेरिकी अधिकारियों के अमानवीय व्यवहार पर विपक्ष के हंगामे और सरकार की सफाई के बावजूद एक महीने के भीतर ही 15 फरवरी को निर्वासित लोगों की दूसरी खेप लाने वाले अमेरिकी सैन्य विमान में भी इन लोगों के साथ हुए दुर्व्यवहार की खबरें सामने आई थीं.

निर्वासित लोगों ने बताया था कि अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरने से मात्र 20 मिनट पहले ही उनकी हथकड़ी और जंजीरे खोली गई थीं.

मालूम हो कि दूसरी उड़ान में कुल 116 भारतीयों को निर्वासित किया गया, जिनमें से 67 पंजाब से थे. इसके अलावा हरियाणा से 33, गुजरात से आठ, उत्तर प्रदेश से तीन, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान से दो-दो और हिमाचल प्रदेश और कश्मीर से एक-एक शामिल थे.

इसी कड़ी में 16 फरवरी की रात करीब 10 बजे निर्वासित लोगों को लेकर तीसरा अमेरिकी सैन्य विमान भी भारत पहुंचा था. इसके घोषणा पत्र में कहा गया था  कि जहाज पर सवार 112 निर्वासितों में से 44 हरियाणा से, 33 गुजरात से, 31 पंजाब से, दो उत्तर प्रदेश से और एक-एक हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से थे.