गाज़ा पर ट्रंप का शांति प्रस्ताव: क्या इससे शांति बहाल हो पाएगी?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा में शांति की नई योजना प्रस्तुत की है, जिसे इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत स्वीकार कर लिया. क्या हमास यह प्रस्ताव करेगा? क्या करीब दो साल से इज़रायल और हमास के बीच जारी युद्ध समाप्त हो पाएगा?

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार, 29 सितंबर, 2025 को वाशिंगटन में ह्वाइट हाउस के स्टेट डाइनिंग रूम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाथ मिलाते हुए. (फोटो: एपी/पीटीआई)

 नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (29 सितंबर) को ह्वाइट हाउस में गाज़ा में शांति की नई योजना प्रस्तुत की, जिसे इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत स्वीकार कर लिया. अब इस प्रस्ताव पर हमास के राजी होने का इंतज़ार है, जिसके बाद करीब दो साल से इज़रायल और हमास के बीच जारी युद्ध समाप्त हो सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ह्वाइट हाउस में इस योजना को ‘शांति के लिए एक ऐतिहासिक दिन‘ बताया. साथ ही चेतावनी दी की अगर हमास इस योजना को स्वीकार नहीं करता है तो अमेरिका नेतन्याहू के साथ खड़ा होगा.

नेतन्याहू ने कहा है कि अगर हमास इस योजना ठुकराता है या इसका पालन नहीं करता है तो ‘इज़रायल अंजाम को अंत तक लेकर जाएगा.’

वहीं,  हमास ने कहा कि वे इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं.

क्या है इस शांति योजना में? 

इज़रायल और हमास के बीच गाज़ा में युद्ध खत्म कराने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने 20 सूत्रीय शांति योजना तैयार की है. इस ताज़ा प्रस्ताव के मुताबिक़ गाज़ा में सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकनी होगी. प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि जब तक बंदी बनाए गए लोगों और मृतकों के शवों की वापसी की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं मौजूदा स्थिति बहाल रहेगी.

योजना के मुताबिक हमास अपने हथियार त्याग देगा, इसके साथ ही उसकी सुरंगें और हथियार बनाने के ठिकाने नष्ट कर दिए जाएंगे. गाज़ा के शासन में हमास की कोई भूमिका नहीं होगी. इसके तहत फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के लिए राह खुल जाएगी.

योजना में यह भी कहा गया है कि जैसे ही दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होंगे, ‘गाज़ा पट्टी में तुरंत पूरी सहायता भेजी जाएगी.’

इस प्रस्ताव में अमेरिका ने गाज़ा की भावी शासन व्यवस्था की रूपरेखा भी रखी है. इसमें कहा गया है कि एक गैर-राजनीतिक फ़िलिस्तीनी कमेटी गाज़ा पर अस्थायी रूप से शासन करेगी. इसकी देखरेख एक नई अंतरराष्ट्रीय ट्रांज़िशन बॉडी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगी और इसका नेतृत्व ट्रंप ख़ुद करेंगे. इसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर सहित अन्य राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होंगे.

यह बोर्ड गाज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण और उसके आर्थिक विकास की भी देखरेख करेगा.

इस योजना में स्पष्ट कहा गया है कि शासन में हमास की किसी भी रूप में कोई भूमिका नहीं होगी, ‘न सीधे, न अप्रत्यक्ष रूप से.’

इसमें यह भी कहा गया है कि ‘इज़रायल गाज़ा पर न तो कब्ज़ा करेगा और न ही उसे अपने देश में मिलाएगा’ और उसकी सेनाएं समय के साथ चरणबद्ध तरीके से पीछे हटेंगी.

इस योजना के तहत इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स ( International Stabilization Force) नामक एक नया सैन्य दल गाज़ा पट्टी में स्थापित और तैनात किया जाएगा. इसमें अरब और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी शामिल होंगे. इसके बाद ही इज़रायली सेना गाज़ा से पूरी तरह हट जाएगी.

इसमें नया क्या है?

इस योजना के कई अंश, जैसे इजरायली सेना की वापसी, फ़िलिस्तीनी कैदियों के बदले बंधकों की रिहाई और गाज़ा को व्यापक मानवीय सहायता प्रदान करना आदि पिछले समझौतों का भी हिस्सा रहे हैं, जिनमें वह आखिरी समझौता भी शामिल है जो मार्च 2025 में इज़रायल द्वारा अपनी शर्तों का उल्लंघन करने के बाद टूट गया था.

लेकिन ट्रंप के पहले के बयानों से हटकर, इसमें यह भी कहा गया है कि फ़िलिस्तीनी लोगों को गाज़ा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.

प्रस्ताव में ट्रंप ने कहा है, ‘लोगों को वहीं रहने और बेहतर गाज़ा बनाने का अवसर दिया जाएगा.’

इस योजना में फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की संभावना के लिए दरवाज़ा खुला छोड़ा गया है.

इसके अलावा इस प्रस्ताव में एक नए बोर्ड ऑफ पीस और इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स का गठन भी शामिल है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया समर्थन

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के गाज़ा संघर्ष को ख़त्म करने की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की योजना का स्वागत किया है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाज़ा संघर्ष को ख़त्म करने की व्यापक योजना की घोषणा का स्वागत करते हैं. यह योजना फ़िलिस्तीनी और इज़रायली लोगों के साथ-साथ पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र के लिए भी लंबे समय तक चलने वाली स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास का एक कारगर रास्ता प्रदान करती है.’

पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि सभी संबंधित पक्ष राष्ट्रपति ट्रंप की पहल के पीछे एकजुट होंगे और संघर्ष ख़त्म कर शांति सुनिश्चित करने के इस प्रयास का समर्थन करेंगे.’

पीएम मोदी के अलावा कई अन्य राष्ट्र प्रमुखों ने भी इस योजना का समर्थन किया है.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने भी इस योजना का स्वागत किया और कहा, ‘हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे अमेरिका प्रशासन के साथ मिलकर इस समझौते को अंतिम रूप दें और लागू करें.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमास को अब हथियार डालकर और सभी बंधकों को छोड़कर इस दर्दनाक कहानी को खत्म कर देना चाहिए.’

इस संबंध में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू की सकारात्मक प्रतिक्रिया से वो खुश हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘सभी पक्षों को इस मौक़े का फायदा उठाना चाहिए ताकि शांति को हक़ीकत में बदला जा सके.’

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस योजना की तारीफ़ की और कहा, ‘फ़्रांस युद्ध समाप्त करने और बंधकों की रिहाई के प्रयासों में भूमिका निभाने को तैयार है.’

मैक्रों ने कहा कि इन्हें स्थायी शांति बनाने के लिए सभी साझेदारों के साथ गहन चर्चा का मार्ग खोलना करना चाहिए, जो दो-राष्ट्र समाधान पर आधारित हो.

इस शांति प्रस्ताव का क़तर, जॉर्डन, यूएई, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने स्वागत किया है.

एक साझा बयान में मंत्रियों ने ट्रंप की शांति स्थापित करने की क्षमता पर भरोसा जताया और कहा कि क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका के साथ साझेदारी बेहद अहम है.

इसी संदर्भ में मंत्रियों ने ट्रंप के उस ऐलान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने युद्ध ख़त्म करने, गाज़ा का पुनर्निर्माण करने, फ़िलिस्तीनी लोगों के विस्थापन को रोकने और व्यापक शांति को आगे बढ़ाने की योजना पेश की.

मंत्रियों ने कहा कि वे इस समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने के लिए अमेरिका और अन्य पक्षों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक रूप से जुड़ने को तैयार हैं, ताकि क्षेत्र के लोगों के लिए शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सके.

गौरतलब है कि करीब दो साल पहले इज़रायली सेना ने गाज़ा में यह अभियान हमास के उस हमले के जवाब में शुरू किया था, जो 7 अक्तूबर 2023 को दक्षिण इसरायल में हुआ था.

इस हमले में क़रीब 1,200 लोग मारे गए और 251 को बंधक बना लिया गया था.

वहीं गाज़ा में हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, तब से इज़रायली हमलों में अब तक कम से कम 66,055 लोग मारे जा चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक संस्था ने हाल ही में पुष्टि की कि गाज़ा सिटी में अकाल की स्थिति है.

संयुक्त राष्ट्र और सहायता एजेंसियों के एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) पैनल द्वारा आधिकारिक मान्यता के माध्यम से गाज़ा में मानवीय क्षति की भयावहता को रेखांकित किया गया.

एक कड़ी चेतावनी मेंआईपीसी ने घोषणा की थी कि ‘गाज़ा पट्टी में वर्तमान में अकाल की सबसे बदतर स्थिति उत्पन्न हो रही है’ और आगे ‘मानवीय पीड़ा’ को रोकने के लिए युद्धविराम का आह्वान किया था.

इस योजना के लागू होने की कितनी संभावनाएं हैं?

इस योजना में मुख्य तौर पर दो बाधाएं हैं.

इज़रायल में नेतन्याहू को अपनी सरकार के धुर-दक्षिणपंथी सदस्यों की सहमति प्राप्त करनी होगी, जिन्होंने युद्ध जारी रखने और इज़रायल द्वारा गाज़ा पट्टी पर अंतिम कब्ज़ा करने के अलावा किसी भी अन्य प्रस्ताव का विरोध किया है. नेतन्याहू जानते हैं कि उनका राजनीतिक भविष्य उनके गठबंधन के इन सदस्यों को साथ रखने पर निर्भर है. इसने युद्ध की समाप्ति के पिछले प्रयासों को विफल कर दिया है.

वहीं, अगर हमास यह समझौता स्वीकारता है, तो इसका मतलब होगा गाज़ा पट्टी में उसकी सैन्य और राजनीतिक उपस्थिति का अंत. ऐसे में जून 2007 से इस क्षेत्र पर शासन कर रहे राजनीतिक और उग्रवादी संगठन को इन शर्तों को स्वीकार करने में हताशा महसूस हो सकती है.

इस तरह नेतन्याहू ट्रंप की योजना का समर्थन कर रहे हैं, यह जानते हुए भी कि इसके साकार होने की संभावना बहुत कम है. पिछले दो वर्षों में नेतन्याहू ने यह प्रदर्शित किया है कि वह मुख्यतः अपने राजनीतिक अस्तित्व को लेकर सजग हैं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे यह खतरे में पड़ जाए.

इस योजना को स्वीकार करके उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया है. इससे नेतन्याहू को इज़रायल में राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है कि वह युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हैं, हालांकि वे यह भी उम्मीद करते हैं कि हमास इसे अस्वीकार कर देगा.

इस तथ्य को देखते हुए कि इस योजना की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है, खासकर इज़रायल की चरणबद्ध वापसी के संबंध में, यह उन्हें बहुमूल्य राजनीतिक समय भी प्रदान करता है. यह नेतन्याहू को अक्टूबर 2026 में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों के लिये खुद को बेहतर स्थिति में लाने में मदद कर सकता है.

अगर नेतन्याहू को लगता है कि जनमत उनके पक्ष में बदल रहा है, तो वे इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, जैसा कि उन्होंने अतीत में अक्सर किया है, समय से पहले चुनाव भी करा सकते हैं.