नई दिल्ली: इज़रायली बलों ने ग्लोबल सुमुद फ़्लोटिला पर सवार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हैं.
यह फ़्लोटिला गाज़ा पट्टी की ओर बढ़ रहा है, जहां इज़रायल द्वारा लोगों को आवश्यक सहायता देने से इनकार किया जा रहा है, क्योंकि वह पिछले दो वर्षों से इस क्षेत्र में ज़मीनी और हवाई हमलों से नरसंहार कर रहा है.
कुछ खबरों में कहा गया है कि इज़रायल ने 13 नावों को रोका है, जबकि सहायता ले जा रहे लगभग दो दर्जन कार्यकर्ता जहाज अभी भी घेरे हुए गाज़ा की ओर बढ़ रहे हैं.
एक्स अकाउंट कुद्स न्यूज नेटवर्क ने पोस्ट किया है कि एक जहाज, माइकेनो, ऐतिहासिक घटनाक्रम में पहली बार इज़रायली नाकाबंदी को सफलतापूर्वक तोड़कर फिलिस्तीनी जलक्षेत्र में पहुंच गया है.
Israeli forces have detained 223 international activists aboard the Global Sumud Flotilla, a Gaza-bound aid convoy. Despite more than 40 reported interceptions, one vessel, Mikeno, successfully broke through and reached Palestinian waters for the first time in a historic… pic.twitter.com/yAm4nL32Tt
— Quds News Network (@QudsNen) October 2, 2025
इज़रायल के विदेश मंत्रालय ने दो घंटे पहले अपने एक्स अकाउंट के माध्यम से बताया, ‘हमास-सुमुद के यात्री अपनी नौकाओं पर सुरक्षित और शांतिपूर्वक इज़रायल पहुंच रहे हैं, जहां से उन्हें यूरोप भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी. यात्री सुरक्षित और स्वस्थ हैं.’
ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, ब्राज़ील और पाकिस्तान उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने इज़रायल के इस ताजा कदम की कड़ी आलोचना की है. स्पेन ने मैड्रिड में इज़रायल के शीर्ष प्रतिनिधि को तलब किया है.
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक कार्यालय ने इज़रायली नौसैनिक कमांडो द्वारा गाजा सहायता बेड़े में सवार तुर्की नागरिकों को गिरफ्तार करने के बाद जांच शुरू कर दी है.
फिलिस्तीन सरकार ने भी ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला पर इजरायल के हमले की निंदा की और कहा कि यह ‘समुद्र के कानून पर कन्वेंशन, अन्य मानवीय सिद्धांतों और जहाज पर सवार लोगों के मानवाधिकारों सहित अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का उल्लंघन है.
मंत्रालय ने कहा, ‘फिलिस्तीन ध्यान दिलाता है कि ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला एक शांतिपूर्ण और नागरिक नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य गाजा पट्टी पर इज़राइल की अमानवीय और अवैध नाकाबंदी को तोड़ना और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार इज़रायल की भुखमरी नीति और नरसंहार को समाप्त करना है.’
