सरकार ने सिख जत्थों को पाकिस्तान जाने की अनुमति दी, गृह मंत्रालय देगा आवेदनों को अंतिम मंज़ूरी

केंद्र सरकार ने चुनिंदा सिख जत्थों को गुरुनानक देव के आगामी प्रकाश पर्व में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी है. हालांकि, नए निर्देशों के अनुसार आवेदनों को अंतिम मंज़ूरी गृह मंत्रालय द्वारा विदेश मंत्रालय के परामर्श से दी जाएगी.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार (2 अक्टूबर) को चुनिंदा सिख जत्थों को गुरुनानक देव के आगामी प्रकाश पर्व में भाग लेने के लिए पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी.

हालांकि, नए निर्देशों के अनुसार आवेदनों को अंतिम मंज़ूरी गृह मंत्रालय द्वारा विदेश मंत्रालय के परामर्श से दी जाएगी.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने यह मंज़ूरी 12 सितंबर के अपने उस निर्देश की आलोचना के बाद दी है जिसमें सुरक्षा कारणों से सिख तीर्थयात्रियों की पाकिस्तान यात्रा पर रोक लगा दी गई थी.

इस कदम का सिख धार्मिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने विरोध किया था, जिन्होंने कहा था कि सीमा पार अन्य गतिविधियां जारी रहने के दौरान तीर्थयात्रा को अलग नहीं रखा जाना चाहिए.

नए फैसले में कहा गया है कि राज्य सरकारों द्वारा विशेष रूप से अनुशंसित और सुरक्षा जांच के बाद केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा स्वीकृत जत्थों को ही अनुमति दी जाएगी.

आवेदनों की पहले राज्य अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी और फिर इसे आगे बढ़ाया जाएगा. इस संबंध में अंतिम मंज़ूरी विदेश मंत्रालय के परामर्श से गृह मंत्रालय द्वारा दी जाएगी.

अधिकारियों के अनुसार, वैध पाकिस्तानी वीज़ा वाले यात्रियों को भी स्वतंत्र यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी और इसके लिए अनुमति आधिकारिक जत्थे के माध्यम से ही लेनी होगी.

इसके बाद अधिकृत प्रतिनिधिमंडल अटारी-वाघा बॉर्डर से होते हुए पाकिस्तान के गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे, जिनमें गुरुनानक देव की जन्मस्थली गुरुद्वारा ननकाना साहिब भी शामिल है.

ट्रिब्यून ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह प्रक्रिया धार्मिक स्थलों की यात्रा के संबंध में 1974 के भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल का पालन करेगी, जिसके तहत पहले तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद सीमित सीमा पार तीर्थयात्राएं होती थीं.

गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले और मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से वीज़ा-मुक्त मार्ग, जो पहले भारतीय तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारा दरबार साहिब, करतारपुर तक सीधी पहुंच प्रदान करता था, भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निलंबित है.