भारत ने बांग्लादेश के पहाड़ी ज़िलों में हिंसा में संलिप्तता के आरोपों को ख़ारिज किया

बांग्लादेश सरकार के सलाहकार ने चटगांव पहाड़ी इलाकों में हाल में हुई हिंसा में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था. अब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि बांग्लादेश में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ अंतरिम सरकार अक्सर दोष किसी और पर मढ़ने की कोशिश करती रही है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल 3 अक्टूबर, 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए. (फोटो: X/@MEAIndia via PTI)

नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को बांग्लादेशी सरकार के एक सलाहकार के उन आरोपों का कड़ा खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि चटगांव पहाड़ी इलाकों में हालिया अशांति भारत के समर्थन से भड़काई गई हो सकती है.

साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम इन झूठे और निराधार आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि ‘बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ अंतरिम सरकार अक्सर दोष किसी और पर मढ़ने की कोशिश करती रही है.’

जायसवाल ने तर्क दिया कि ढाका को अपने भीतर झांकना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘चटगांव पहाड़ी इलाकों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा, आगजनी और ज़मीन हड़पने वाले स्थानीय चरमपंथियों की कार्रवाई का आत्मनिरीक्षण और गंभीर जांच करना बेहतर होगा.’

उनकी यह टिप्पणी बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में ढाका में पत्रकारों से की गई बातचीत के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि खगराछारी में अस्थिरता को ‘कुछ खास तबकों’ द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा है, जिन्हें कथित तौर पर भारत या ‘फासीवादी समूहों’ का समर्थन प्राप्त है.

उन्होंने यह टिप्पणी सोमवार को राजधानी में एक पुलिस कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान की थी.

चौधरी ने कहा था कि एक निहित स्वार्थी समूह पहाड़ी क्षेत्र में दुर्गा पूजा समारोहों को बाधित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ उपद्रवी पहाड़ियों की चोटी से गोलीबारी कर रहे थे और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हथियार अक्सर देश के बाहर से आते हैं. सलाहकार की इस टिप्पणी से पहले खगराछारी जिले में कई दिनों तक हिंसा हो चुकी थी.

बताया गया है कि खगराछारी में अशांति 24 सितंबर को एक किशोरी के साथ कथित बलात्कार के बाद शुरू हुई. इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और 27 सितंबर से जुम्मा छात्र जनता के बैनर तले तीन पहाड़ी जिलों में अनिश्चितकालीन नाकेबंदी कर दी गई, जिसमें संदिग्धों की गिरफ्तारी और मुकदमा चलाने सहित आठ मांगें शामिल थीं.

28 सितंबर को गुइमारा में हिंसा बढ़ गई, जहां झड़पों में तीन लोगों की मौत हो गई और 20 से ज़्यादा लोग घायल हो गए, जिनमें सेना और पुलिस के जवान भी शामिल थे. दर्जनों घरों और दुकानों में आग लगा दी गई.

इसके बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी. 1 अक्टूबर की रात को गुइमारा पुलिस स्टेशन में दो मामले और खगराछारी पुलिस स्टेशन में एक और मामला दर्ज किया गया, जिसकी पुष्टि अधिकारियों ने अगली सुबह की।

इन मामलों में कुल मिलाकर 1,100 से ज़्यादा अज्ञात लोगों पर हत्या, आगजनी और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे अपराधों का आरोप लगाया गया है.

पहाड़ी ज़िलों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और निषेधाज्ञा अभी भी लागू है.