वायुसेना प्रमुख का पाकिस्तान के नुकसान पर बयान: ज़मीन और हवा में नष्ट हुए विमानों में एफ-16, जेएफ-17 शामिल

भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी नुकसान का ब्यौरा देते हुए पहली सार्वजनिक टिप्पणी में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के अंदर तीन अलग-अलग स्थानों पर भारतीय हमलों के परिणामस्वरूप एक सी-130 विमान, एक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्लू एंड सी) एयरक्राप्ट और हैंगर में खड़े 'चार से पांच लड़ाकू विमान, संभवतः एफ-16' क्षतिग्रस्त हो गए.

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी नुकसान का ब्यौरा दिया. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी नुकसान का ब्यौरा देते हुए पहली सार्वजनिक टिप्पणी में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को कहा कि पाकिस्तान के अंदर तीन अलग-अलग स्थानों पर भारतीय हमलों के परिणामस्वरूप एक सी-130 विमान, एक एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्लू एंड सी) एयरक्राप्ट और हैंगर में खड़े ‘चार से पांच लड़ाकू विमान, संभवतः एफ-16’ क्षतिग्रस्त हो गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि इस नुकसान के अलावा भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए लंबी दूरी के हमलों में एक एईडब्लूएंडसी विमान या सिग्नल्स इंटेलिजेंस (एसआईजीआईएनटी) विमान, साथ ही एफ-16 और जेएफ-17 श्रेणी के पांच उन्नत लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए गए.

उल्लेखनीय है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के ख़ास मॉडल का सैन्य कार्रवाई में नष्ट होने का दावा किया गया. इससे पहले, 9 अगस्त को बेंगलुरु में 16वें एयर चीफ़ मार्शल एल एम कात्रे मेमोरियल लेक्चर में अपने भाषण के दौरान एयर चीफ़ मार्शल ने कहा था कि पाकिस्तान के कम से कम पांच लड़ाकू विमान और एक बड़ा विमान नष्ट हुआ, लेकिन उनका मॉडल नहीं बताया था.

8 अक्टूबर को 93वें वायुसेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के अंदर बड़ी संख्या में हवाई अड्डों और प्रतिष्ठानों पर हमला किया गया.

पाकिस्तान के रडार, कमांड, कंट्रोल सेंटर और रनवे क्षतिग्रस्त हुए

उन्होंने कहा, ‘इन हमलों के कारण कम से कम चार जगहों पर रडार, दो जगहों पर कमांड और कंट्रोल सेंटर और दो जगहों पर रनवे क्षतिग्रस्त हो गए. इसके अलावा तीन अलग-अलग स्टेशनों पर उनके तीन हैंगर क्षतिग्रस्त हो गए.’

उन्होंने बताया कि उन हैंगरों और टरमैक पर इस बात के संकेत मिले हैं कि एक सी-130 विमान, एक AEW&C विमान और कम से कम चार से पांच लड़ाकू विमान, संभवतः एफ-16, और एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम को नुक़सान पहुंचाया गया. ये ज़मीन पर ही नष्ट हो गए.

एयर चीफ मार्शल के अनुसार, सैन्य कार्रवाई के दौरान लंबी दूरी के भारतीय हमलों के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं, जिनमें से एक 300 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूरी का था, जिसमें एक रडार सिस्टम (AEW&C) या एक सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) विमान, साथ ही एफ-16 और JF-17 श्रेणी के पांच लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया.

हालांकि, उन्होंने भारतीय पक्ष के किसी नुकसान का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने पहले भी माना है कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने अनिर्दिष्ट संख्या में विमान खो दिए. सरकार ने इन रिपोर्टों की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है.

भारतीय नुकसान पर पाकिस्तान के दावे

भारतीय नुकसान के बारे में पाकिस्तान के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘उनका (पाकिस्तानी) बयान ‘मनोहर कहानियां’ है. उन्हें खुश रहने दीजिए, आख़िरकार उन्हें भी अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए अपने दर्शकों को कुछ दिखाना है. मुझे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.’

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने मेरे 15 जेट मार गिराए हैं, तो उन्हें सोचने दीजिए… मुझे उम्मीद है कि उन्हें इस बात का यकीन हो गया होगा कि जब वे दोबारा लड़ने आएंगे तो मेरे बेड़े में 15 कम विमान होंगे?’

उन्होंने कहा, ‘आज भी, मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा कि क्या हुआ, कितना नुकसान हुआ, कैसे हुआ, क्योंकि उन्हें पता करने दीजिए… क्या आपने एक भी तस्वीर देखी है जहां हमारे किसी एयरबेस पर कुछ गिरा हो, हमें कोई टक्कर लगी हो, कोई हैंगर नष्ट हुआ हो, या ऐसा कुछ? हमने उन्हें उनकी जगहों की बहुत सारी तस्वीरें दिखाईं.’

पाकिस्तान के साथ तनाव के दौरान रूस से सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल प्रणालियों के प्रदर्शन को देखते हुए और अधिक एस-400 मिसाइल प्रणालियों की खरीद की योजना के बारे में पूछे जाने पर, एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि इसने अच्छा प्रदर्शन किया है और ‘ऐसी और अधिक हथियार प्रणालियों की आवश्यकता है.’

उन्होंने कहा, ‘…आप कितनी खरीद सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है. मैं फिर से योजना के बारे में कुछ नहीं कह रहा हूं… यह एक अच्छी हथियार प्रणाली साबित हुई है. हमारी अपनी प्रणाली भी विकसित हो रही है, इसलिए हम इस पर निर्णय लेंगे.’

एयर चीफ मार्शल के मुताबिक, ‘हमारी लंबी दूरी की एसएएम मिसाइलों, जिन्हें हमने हाल ही में खरीदा गया था और जिनका संचालन शुरू किया था, की वजह से हम उनके इलाके में गहराई तक देख सकते थे.’

उन्होंने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित कर पाए कि वे एक निश्चित दूरी तक अपने इलाके में भी काम न कर पाएं. यह इतिहास में सबसे लंबी मारक क्षमता के रूप में दर्ज होगा… 300 किलोमीटर से भी ज़्यादा…. और इसने उनकी गतिविधियों पर गंभीर रूप से अंकुश लगाया.’

यह पूछे जाने पर कि क्या भारतीय वायुसेना रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को खरीदने पर विचार कर रही है, उन्होंने कहा कि सभी विकल्पों पर विचार करना होगा.

किसी भी हथियार प्रणाली को शामिल करने की एक निश्चित प्रक्रिया

उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना में किसी भी हथियार प्रणाली को शामिल करने की एक निश्चित प्रक्रिया है और उसी का पालन किया जाएगा. इसलिए, जो भी आएगा वह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सी प्रणाली ज़रूरतों को पूरा करती है और हमारे लिए सबसे उपयुक्त है.’

भारतीय वायुसेना के घटते लड़ाकू विमानों को देखते हुए आपातकालीन आवश्यकता के तौर पर 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, ‘यह उपलब्ध विकल्पों में से एक है… हमने पहले के एमएमआरसीए अनुबंध के संदर्भ में पहले ही अपना काम कर लिया था. उसमें, सभी संभावित विकल्पों में से, हमने राफेल को अपने लिए सबसे उपयुक्त विमान पाया है.’

उन्होंने आगे बताया, ‘उस श्रेणी का कोई भी विमान तत्काल आवश्यक है. अब, चाहे वह राफेल हो या कोई और, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हां, राफेल को अपनाना आसान है. इसलिए जो भी डिज़ाइन हाउस ‘मेक इन इंडिया’ का प्रस्ताव लेकर आने को तैयार हो, हमें तकनीक देने के लिए, हमें और आज़ादी देने के लिए, मुझे लगता है कि उसी डिज़ाइन हाउस को चुना जाना चाहिए.’

थिएटर कमांड के निर्माण पर भारतीय वायुसेना के रुख और दोनों सेनाओं के अलग-अलग विचारों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि संयुक्त संरचनाएं (joint structures) ज़रूरी हैं, लेकिन किस संरचना की ज़रूरत है, इस पर अभी चर्चा चल रही है.

उन्होंने कहा, ‘चर्चाएं चल रही हैं. बेशक, अगर आपकी राय अलग-अलग नहीं होगी, तो हम कभी भी सर्वश्रेष्ठ तक नहीं पहुंच पाएंगे. अगर हम हर बात पर सिर्फ़ हां, हां, हां कहते रहेंगे, तो हम सर्वश्रेष्ठ तक नहीं पहुंच पाएंगे. हमें सर्वोत्तम संभव ढांचा हासिल करना होगा, जिसके लिए चर्चाएं अनिवार्य हैं.’

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भारत को अनुभवों के आधार पर अपनी संयुक्त संरचनाएं तैयार करने की ज़रूरत है और अंतिम रूप से तय की जाने वाली संरचना ऐसी होनी चाहिए जो आज की मौजूदा संरचनाओं से बेहतर संयुक्त योजना और संयुक्त कार्रवाई करने में सक्षम हो.