बिहार एसआईआर: 22.7 लाख महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए, गोपालगंज में सर्वाधिक

बिहार में 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं और इनमें से 22.7 लाख मतदाताओं के नाम एसआईआर की फाइनल सूची से हटा दिए गए. इसका असर इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर पड़ने की उम्मीद है.

बिहार के गया में एक पोलिंग बूथ पर इंतज़ार करते मतदाता. (फाइल फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: बिहार में हुए विशेष मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) की फाइनल सूची बताती है कि राज्य की 22.7 लाख महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इस घटना का असर इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर पड़ने की उम्मीद है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं और इनमें से 22.7 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. 3.92 करोड़ पुरुष मतदाताओं में से 15.5 लाख नाम हटा दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप लिंग के आधार पर अंतर पैदा हो गया. पुरुष मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बावजूद इस जनसांख्यिकी में महिला मतदाताओं की तुलना में कम नाम हटाए गए.

महिला मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू गठबंधन ने महिलाओं के कल्याण को अपने एजेंडा में शामिल कर इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 25 लाख महिला लाभार्थियों में से प्रत्येक को 10,000 रुपये ट्रांसफर किए. 29 अगस्त को घोषित और 26 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना की वर्तमान में एक करोड़ महिला लाभार्थी हैं.

गोपालगंज वह ज़िला है जहां महिला मतदाताओं की संख्या में सबसे ज़्यादा कमी दर्ज की गई है, जहां 15.1% की गिरावट (कुल 3.5 करोड़ महिला मतदाताओं में से 1.5 लाख महिला मतदाता) दर्ज की गई है, इसके बाद मधुबनी (1.3 लाख महिला मतदाताओं के नाम हटाए गए) और पूर्वी चंपारण (1.1 लाख, 6.7 प्रतिशत) का स्थान है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, दो अन्य ज़िलों, सारण और भागलपुर में भी लगभग एक लाख महिला मतदाताओं के नाम काटे गए.

जिन छह ज़िलों – गोपालगंज, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, सारण, भागलपुर और पटना – में सबसे ज़्यादा मतदाता हटाए गए हैं, उनमें कुल मिलाकर 59 विधानसभा सीटें हैं.

2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में विपक्षी महागठबंधन ने इनमें से 25 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए ने 34 सीटें जीती थीं.

बता दें कि बिहार में तीन महीने तक चले एसआईआर प्रक्रिया के बाद 30 सितंबर को जारी अंतिम मतदाता सूची में 7.42 करोड़ नाम हैं. एसआईआर से पहले 24 जून, 2025 तक राज्य में 7.89 करोड़ मतदाता थे. 1 अगस्त, 2025 को जब मसौदा सूची जारी की गई, तब 7.24 करोड़ नाम थे और 65 लाख हटाए गए थे.

चुनाव तैयारियों का आकलन करने के लिए चुनाव आयोग 4-5 अक्टूबर को पटना का दौरा करेगा और उम्मीद है कि विधानसभा चुनावों की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी.