बिहार चुनाव: लोजपा (राम विलास) के शानदार प्रदर्शन के दम पर एनडीए मज़बूत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में लोजपा (राम विलास) के प्रदर्शन ने सबको चौंकाया है. पार्टी 29 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, उनमें से 16 सीटें जीत गई है और 3 पर उसकी बढ़त क़ायम है. चिराग पासवान की बड़ी जीत एनडीए गठबंधन में भाजपा को मज़बूती प्रदान करेगी. लोजपा (राम विलास) के दम पर भाजपा बिना जदयू के साथ के बहुमत के आंकड़े के क़रीब पहुंचते दिख रही है.

2025 का चुनाव पहली बार ऐसा था जब लोजपा और जदयू एक गठबंधन में साथ आ कर चुनाव लड़ी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग साफ़ हो चुके हैं. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत लगभग तय हो चुकी है. गठबंधन 200 का आंकड़ा पार कर चुका है. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लेकिन इन सब के बीच एक पार्टी ने अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाया है, वो है चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास).

पार्टी 29 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, उनमें से 16 सीटें जीत गई है और 3 सीट पर उसकी बढ़त क़ायम है. 

चिराग पासवान की बड़ी जीत एनडीए गठबंधन में भाजपा को मजबूती प्रदान करेगी. लोजपा (राम विलास) के दम पर भाजपा बिना जदयू के साथ के बहुमत के आंकड़ें के बेहद करीब पहुंचते दिख रही है. 

साल 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) का विभाजन हुआ था. राम विलास पासवान के भाई और चिराग पासवान के चाचा पशुपति नाथ पारस से अलग होकर लोजपा (राम विलास) का चिराग पासवान के नेतृत्व में निर्माण हुआ था. 

इससे पहले लोक जनशक्ति पार्टी (अविभाजित) का सबसे अच्छा प्रदर्शन फरवरी 2005 में हुआ था, जब पार्टी ने 29 सीटें जीती थीं. हालांकि उस चुनाव में कोई भी गठबंधन सरकार बनाने में समर्थ नहीं हुई थी, और उस साल दोबारा चुनाव करवाने पड़े थे. 

रामविलास पासवान और नीतीश कुमार के रिश्ते कभी भी समान्य नहीं रहे.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2007 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान नीतीश कुमार ने दलितों में सबसे पिछड़े तबकों की मदद के लिए ‘महादलित’ श्रेणी बनाई थी. 22 उपजातियों में से 21 को इस श्रेणी में शामिल किया गया था, लेकिन पासवान समुदाय को इससे बाहर रखा गया, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच नाराज़गी और बढ़ गई. 

साल 2020 में चिराग पासवान ने 143 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमे से ज़्यादातर जदयू के खिलाफ थे. हालांकि जदयू महज एक ही सीट जीत पायी थी, लेकिन वह कई सीटों पर नीतीश कुमार की पार्टी की हार का कारण बनी थी. जदयू उस चुनाव में 43 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी. 

2025 का चुनाव पहली बार ऐसा था जब लोजपा और जदयू एक गठबंधन में साथ आ कर चुनाव लड़ी. 

क्या समीकरण बन रहे हैं?

भाजपा 89 सीटों (78 पर विजयी) पर आगे चल रही है, लोजपा 19 सीटों (15 पर विजयी) पर आगे चल रही है, हम 5 सीटों (4 पर विजयी) पर वहीं उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 4 सीटों (2 पर विजयी) पर आगे है. कुल मिला कर बिना जदयू के एनडीए 117 सीट ला रही है. ऐसे में भाजपा अपनी पार्टी से मुख्यमंत्री का नाम घोषित करने की मांग एनडीए गठबंधन के समक्ष रख सकती है. भाजपा को यह मजबूती लोजपा (राम विलास) के अच्छे प्रदर्शन के बदौलत मिली है.