बिहार: भाजपा की बाग़ियों पर कार्रवाई के बाद निलंबित पूर्व मंत्री आरके सिंह ने पार्टी से इस्तीफ़ा दिया

बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के वरिष्ठ नेता आरके सिंह समेत तीन नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया. सिंह ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि बिहार में अडानी पावर के साथ राज्य सरकार द्वारा 25 साल के लिए किए गए पावर सप्लाई एग्रीमेंट में 62 हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, जिसमें सरकार के मंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं.

आरके सिंह समेत तीन नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए भाजपा से निलंबित कर दिया गया है. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के एक दिन बाद ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना ध्यान बागी नेताओं पर केंद्रित कर उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया है.

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के वरिष्ठ नेता आरके सिंह उन तीन नेताओं में शामिल हैं जिन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया गया है.

पार्टी की कार्रवाई का सामना करने वाले अन्य दो नेता विधान परिषद सदस्य अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल हैं.

बताया जा रहा है कि अपने आचरण को लेकर आलोचना और निलंबलन के तुरंत बाद आरके  सिंह ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.

उल्लेखनीय है कि बिहार भाजपा के राज्य मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा ने शनिवार सुबह नेताओं को नोटिस जारी कर उनके निलंबन की जानकारी दी और एक सप्ताह के भीतर यह बताने को कहा कि उन्हें पार्टी से क्यों न निष्कासित कर दिया जाए.

सिंह और अग्रवाल को भेजे गए कारण बताओ नोटिस में कहा गया है, ‘आप पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं. यह अनुशासन के दायरे में आता है. पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है. इससे पार्टी को नुकसान हुआ है. इसलिए, निर्देशानुसार, आपको पार्टी से निलंबित किया जा रहा है और यह बताने के लिए कहा गया है कि आपको पार्टी से क्यों न निष्कासित कर दिया जाए. इसलिए, कृपया इस पत्र की प्राप्ति के एक सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करें.’

सूत्रों का कहना है कि उनका निलंबन एक साधारण प्रक्रिया है और अंततः उन्हें निष्कासित कर दिया जाएगा.

मालूम हो कि बिहार के आरा से पूर्व सांसद आरके सिंह 2024 का चुनाव हारने के बाद से ही भाजपा और बिहार सरकार की आलोचना करते रहे हैं. वे अपने राज्य में एनडीए नेतृत्व और कुछ सहयोगी दलों के उम्मीदवारों की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं.

हाल ही में आरके सिंह ने आरोप लगाया था कि बिहार में 62 हज़ार करोड़ रुपये का बिजली घोटाला हुआ है, जिसमें सरकार के मंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं. उनका कहना है कि यह घोटाला अडानी पावर के साथ बिहार सरकार द्वारा 25 साल के लिए किए गए पावर सप्लाई एग्रीमेंट से जुड़ा है.

उन्होंने ख़ास तौर पर  उपमुख्यमंत्री और बिहार में भाजपा के प्रमुख उम्मीदवार सम्राट चौधरी पर निशाना साधा था.

प्रशांत किशोर द्वारा चौधरी और बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद आरके सिंह ने उन पर पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा था.

सिंह ने चौधरी और जायसवाल को ‘हत्या का आरोपी’ भी कहा था और लोगों से दागी उम्मीदवारों से दूर रहने की अपील की थी.

उन्होंने चौधरी से उनकी शैक्षणिक योग्यता पर उठे संदेहों को भी स्पष्ट करने की मांग की थी और गुस्से में गैंगस्टर से नेता बने जदयू के अनंत सिंह का भी नाम लिया था. उन्होंने कहा था, ‘इन्हें वोट देने से बेहतर है कि चुल्लू भर पानी में डूब मरें.’

ज्ञात हो कि सम्राट चौधरी और अनंत कुमार सिंह दोनों अपनी-अपनी सीटों से चुनाव जीत चुके हैं.

गौरतलब है कि बिहार कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सिंह, मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गृह सचिव थे. वे 2013 में भाजपा में शामिल हुए और 2014 और 2019 में आरा से दो बार सांसद चुने गए.

इसके बाद 2017 में उन्हें मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री बनाया गया था. 2024 के लोकसभा चुनाव में वे अपनी सीट हार गए थे.