नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की करारी हार के बाद पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी दरार सामने आने लगी हैं. चुनावी नतीजों के अगले ही दिन पार्टी और परिवार के मुखिया लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी से नाता तोड़ने की घोषणा सोशल मीडिया पर की है.
इससे पहले लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को ख़राब आचरण का हवाला देते हुए पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया था.
तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और रमीज़ पर रोहिणी का आरोप
एक्स पर एक पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने लिखा, ‘मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं. यही संजय यादव और रमीज़ ने मुझे करने को कहा था.. और मैं पूरा दोष अपने ऊपर ले रही हूं.’
I’m quitting politics and I’m disowning my family …
This is what Sanjay Yadav and Rameez had asked me to do …nd I’m taking all the blame’s— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 15, 2025
संजय यादव राजद से राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले रमीज़ तेजस्वी के पुराने मित्र हैं.
हालांकि रोहिणी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि दोनों ने उनसे क्या करने को कहा था. लेकिन उनका यह ट्वीट लालू परिवार के अंदर आंतरिक मतभेद को साफ़ साफ़ दिखाता है.
रोहिणी राजनीति में ज्यादा सक्रिय चेहरा नहीं हैं, वे पेशे से डॉक्टर हैं और सिंगापुर में रहती हैं. अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने के बाद वह पूरे देश में चर्चित हुईं थीं.
उन्होंने साल 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत दर्ज नहीं कर सकीं थी.
रोहिणी के विरोधाभासी संकेत
चुनावों से पहले रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी से अपने रिश्ते को लेकर मिले-जुले संदेश दिए थे. एक समय उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया था और आरोप लगाया था कि उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है.
उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनौती देते हुए अपने पिता को किडनी देने के निर्णय का बचाव किया था और आलोचकों को माफी मांगने की चेतावनी दी थी.
इसके बावजूद, चुनाव अभियान के दौरान वे तेजस्वी के लिए प्रचार करती रहीं, उनके जन्मदिन पर तारीफ वाले संदेश साझा किए और पार्टी लाइन के समर्थन में खड़ी दिखाई दीं.
अब उन्होंने पार्टी की करारी हार के बाद पार्टी और परिवार को छोड़ने की घोषणा करके संदेश दिया है कि परिवार के भीतर लंबे समय से कोई गहरा मतभेद पनप रहा था.
ज्ञात हो कि शुक्रवार (14 नवंबर) को घोषित बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों में राजद ने अपने इतिहास का दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन किया. 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी केवल 25 सीटें जीत पाई. वहीं राजद के नेतृत्व में महागठबंधन ने महज 35 सीटें जीती.
