नई दिल्ली: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पांच दिनों तक तीखी बहस और विपक्ष के हंगामे के बीच विवादित 27वां संवैधानिक संशोधन विधेयक आखिरकार गुरुवार (13 नवंबर) को संसद से पारित हो गया.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने गुरुवार इस विधेयक पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद यह संविधान का हिस्सा बन गया.
सेना को अतिरिक्त प्रभावी बनाने के अलावा इस संशोधन ने देश की स्वतंत्र न्यायपालिका को कार्यपालिका के अधीन एक विभाग में बदल दिया है. सुप्रीम कोर्ट के ऊपर एक नई अदालत बनाकर उसकी शक्तियों को सीमित कर दिया गया है.
यह विवादित संशोधन फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के अधिकारों और शक्तियों में बढ़ोतरी करता है.
27वें संशोधन के बाद सरकार द्वारा न्यायपालिका पर पूरी तरह नियंत्रण हो जाने का हवाला देकर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जजों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है.
विपक्षी दलों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस संशोधन की आलोचना करते हुए इसे पाकिस्तान के संवैधानिक और कानूनी इतिहास का सबसे अंधकारमय अध्याय बताया है. इस तरह पड़ोसी मुल्क की सेना ने अपने लिए ऐसा संवैधानिक और कानूनी संरक्षण हासिल कर लिया है, जिसकी पहले के तानाशाही शासकों ने कल्पना तक नहीं की होगी.
क्या है 27वां संवैधानिक संशोधन?
यह संशोधन न्यायपालिका की संरचना और सेना की कमांड व्यवस्था में बड़े बदलाव लाता है, साथ ही सरकारी अधिकारियों को असीमित छूट प्रदान करता है.
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ़ कमेटी के चेयरमैन का पद खत्म कर दिया गया है, और नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड सीधे सेना को सौंप दी गई है. नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर का एक नया पद बनाया जा रहा है, जो देश की परमाणु और अन्य रणनीतिक क्षमताओं की देखरेख करेगा. इस पद पर नियुक्ति प्रधानमंत्री करेंगे, लेकिन चयन की सिफ़ारिश सेना प्रमुख द्वारा होगी और यह पद केवल सेना के किसी अधिकारी को ही मिल सकेगा.
इसके साथ अब सेना प्रमुख चीफ ऑफ डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ होगा, यानी थलसेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों का सर्वोच्च प्रमुख होगा.
इसका मतलब यह हुआ कि आर्मी चीफ आसिम मुनीर अब चीफ ऑफ डिफ़ेन्स फ़ोर्सेज़ बन गए हैं, यानी अब नौसेना और वायुसेना भी उनके अधीन आ गई हैं.
वहीं इस संशोधन के बाद फ़ील्ड मार्शल/फाइव स्टार ऑफिसर को जीवनभर अपना पद, विशेषाधिकार और वर्दी रखने का अधिकार मिल गया है. साथ ही उन्हें आजीवन किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से पूरी तरह छूट मिल गई है. उन्हें उनके पद से केवल संसद में दो-तिहाई बहुमत के ज़रिये हीं हटाया जा सकता है.
फ़िलहाल आसिम मुनीर पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल हैं. जनरल अय्यूब ख़ान के बाद वे मुल्क के इतिहास में दूसरे फाइव-स्टार सेना अधिकारी हैं.
यानी, मुनीर अब पाकिस्तान के सभी कानून से ऊपर हो गए हैं, और उनके किसी भी कृत्य के लिए उन पर कभी कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.
पाकिस्तान के सेना प्रमुख बनने से पहले आसिम मुनीर देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सबसे कम अवधि तक रहने वाले प्रमुख थे. उन्हें अक्टूबर 2018 में तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने आईएसआई का निदेशक नियुक्त किया था, लेकिन मात्र आठ महीनों बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के दबाव में उन्हें उनके पद से हटा दिया गया.
बाद में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और उनके भाई, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने जनरल बाजवा के उत्तराधिकारी के रूप में आसिम मुनीर को चुना. जनरल बाजवा ने 29 नवंबर 2022 को छह वर्ष पूरे करने के बाद सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्ति ली, इसके बाद से मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं.
यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट की जगह पाकिस्तान में एक फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (एफसीसी) को देश की सर्वोच्च अदालत बनाता है, वहीं सुप्रीम कोर्ट को केवल सिविल और क्रिमिनल मामलों की अंतिम अपील सुनने वाली अदालत तक सीमित कर दिया गया है. संविधान से जुड़े सभी मामलों जैसे केंद्र और प्रांतों के बीच विवाद, जनहित के मामले और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई अब एफसीसी में होगी.
एफसीसी के मुख्य न्यायाधीश और सभी जज प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा सीधे चुने जाएंगे, और उनकी सेवानिवृति की उम्र 68 वर्ष होगी. इन जजों की नियुक्ति के लिए कोई तय मानदंड निर्धारित नहीं किया गया है. एफसीसी के फैसले से सुप्रीम कोर्ट और अन्य सभी अदालत बाध्य होंगे, लेकिन एफसीसी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए फैसलों से बाध्य नहीं होगी.
आगे चलकर, एक विशेष संसदीय समिति सुप्रीम कोर्ट और एफसीसी दोनों के मुख्य न्यायाधीशों का चयन करेगी. इन पदों के चयन के लिए भी कोई स्पष्ट मानदंड तय नहीं किया गया है. अब तक, सुप्रीम कोर्ट का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश स्वतः ही पाकिस्तान का मुख्य न्यायाधीश बनता था, जिसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती थी.
सुप्रीम कोर्ट, एफसीसी और हाई कोर्ट के लिए जज चुनने वाले पाकिस्तान ज्यूडिशियल कमीशन (जेसीपी) में अब सरकार का नियंत्रण अधिक होगा.
जेसीपी के 13 सदस्यों में से अब केवल पांच सदस्य ही न्यायपालिका से होंगे. जिसमें दो सरकार द्वारा नियुक्त एफसीसी के जज, सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठतम जज, और एक अतिरिक्त जज (सुप्रीम कोर्ट या एफसीसी में से) शामिल होंगे.
पहले जेसीपी के अधिकांश सदस्य न्यायपालिका से होते थे.
संशोधनों के तहत राष्ट्रपति और फ़ील्ड मार्शल, एडमिरल ऑफ द फ़्लीट और मार्शल ऑफ द एयर फ़ोर्स जैसे शीर्ष सैन्य पदों पर बैठे व्यक्तियों को आजीवन गिरफ्तारी और सभी तरह की आपराधिक व नागरिक कार्यवाही से छूट दे दी गई है.
