वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता में लगातार 15वें वर्ष गिरावट, भारत आंशिक रूप से स्वतंत्र: फ्रीडम हाउस

अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन फ्रीडम हाउस ने कहा है कि वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता में लगातार पंद्रहवें वर्ष गिरावट आई है. 72 में से 27 देशों में गिरावट देखी गई है, जबकि भारत ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ बना हुआ है और 51वें स्थान पर है. आखिरी बार संगठन ने 2021 में भारत को इंटरनेट नियंत्रण में ‘स्वतंत्र’ दर्जा मिलने का दावा किया था.

(इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन फ्रीडम हाउस ने कहा है कि वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता में लगातार पंद्रहवें वर्ष गिरावट आई है. 72 में से 27 देशों में गिरावट देखी गई है, जबकि भारत ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ बना हुआ है और 51वें स्थान पर है.

आखिरी बार संगठन ने 2021 में भारत को इंटरनेट नियंत्रण में ‘स्वतंत्र’ दर्जा मिलने का दावा किया था.

फ्रीडम ऑन द नेट 2025 रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे सत्तावादी सरकारों ने ऑनलाइन आयोजित विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सेंसरशिप और ऑफ़लाइन दमन का इस्तेमाल किया, लोकतांत्रिक देशों में लोगों को डिजिटल अभिव्यक्ति पर प्रतिबंधों में वृद्धि का सामना करना पड़ा है.

इसमें कहा गया है कि ऑनलाइन स्पेस में पहले से कहीं अधिक हेरफेर किया गया है, क्योंकि अधिकारी पसंदीदा नैरेटिव को बढ़ावा देने और सार्वजनिक चर्चा को विकृत करने की कोशिश करते हैं. रिपोर्ट में पाया गया कि जिन 18 देशों को ‘मुक्त’ इंटरनेट स्वतंत्रता का दर्जा प्राप्त है, उनमें से आधे देशों के स्कोर में कवरेज अवधि के दौरान गिरावट आई है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच, केन्या में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर, बांग्लादेश ने ‘वर्ष का सबसे मज़बूत सुधार हासिल किया है, क्योंकि छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह ने अगस्त 2024 में देश के दमनकारी नेतृत्व को उखाड़ फेंका.’

चीन और म्यांमार ‘इंटरनेट स्वतंत्रता के लिए दुनिया के सबसे खराब वातावरण’ बने हुए हैं, जबकि आइसलैंड में सबसे मुक्त ऑनलाइन वातावरण पाया गया.

भारत के मामले में रिपोर्ट में पाया गया कि देश में ऑनलाइन सूचना वातावरण फेक न्यूज और भ्रामक सामग्री से भरा हुआ है, खासकर पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हुआ था.

सोशल मीडिया एआई-जनित या भ्रामक वीडियो और सूचनाओं से भरा हुआ था, जिसमें दोनों देशों के प्रभावशाली लोग और सरकार समर्थित संस्थाएं भड़काऊ और भड़काऊ सामग्री की बाढ़ ला रही थीं.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘अप्रैल 2025 में कश्मीर में हुए एक आतंकवादी हमले के बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया, तो दोनों देशों में सरकार से जुड़े प्रभावशाली लोगों और टिप्पणीकारों ने भड़काऊ और एआई-जनित सामग्री की बाढ़ ला दी, जिससे समाचार और सूचना के विश्वसनीय स्रोत गायब हो गए.’

9 मई को पाकिस्तान द्वारा एक भारतीय रफाल विमान को कथित तौर पर मार गिराए जाने के बारे में सीएनएन की एक रिपोर्ट पर आधारित एक समाचार रिपोर्ट के कारण द वायर की वेबसाइट भी कई घंटों तक अवरुद्ध रही.

इसके अलावा, अगस्त 2025 में रिपोर्ट की कवरेज अवधि के बाद भारतीय अधिकारियों ने बताया कि स्टारलिंक ने भारतीय कानून के अनुपालन में स्थानीय यूजर्स का डेटा भारत में संग्रहीत करने पर सहमति व्यक्त की है. यह तब हुआ जब सरकार ने जनवरी में उपग्रह सेवा के गैरकानूनी उपयोग की जांच शुरू की थी.

डेटा गोपनीयता के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां कमज़ोर क़ानून और व्यापक सरकारी निगरानी वाले देशों में आयु-सत्यापन कानूनों का दुरुपयोग होना स्वाभाविक है, वहीं मज़बूत गोपनीयता कानूनों वाले देशों में भी साइबर सुरक्षा उल्लंघन होते हैं.

भारत की आधार प्रणाली का उदाहरण देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे इससे जुड़े थर्ड पार्टी डेटाबेस में कई बार डेटा उल्लंघन हुए, जिसके परिणामस्वरूप लाखों आधार संख्याएं लीक हो गईं, जिससे धोखाधड़ी और साइबर अपराध में वृद्धि हुई.

इसी तरह, अमेरिका में अगस्त 2025 में यह बताया गया कि अमेरिकी दूरसंचार अवसंरचना में घुसपैठ करने के लिए एक वर्षों लंबे अभियान – जिसे साल्ट टाइफून कहा जाता है – ने चीनी सरकार से जुड़े हैकरों के एक समूह को करोड़ों अमेरिकियों से संबंधित डेटा चुराने में सक्षम बनाया.

यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी देश की सरकार द्वारा लागू किए गए छह प्रमुख इंटरनेट नियंत्रणों में से भारत सभी का उपयोग करता है – सोशल मीडिया या संचार प्लेटफार्मों पर राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक सामग्री की नाकाबंदी; आईसीटी नेटवर्क को जानबूझकर बाधित करना; सरकार समर्थक टिप्पणीकार जो ऑनलाइन चर्चाओं में हेरफेर करते हैं; ब्लॉगर या आईसीटी यूजर्स को राजनीतिक या सामाजिक सामग्री के लिए गिरफ्तार किया जाना, कैद किया जाना या लंबे समय तक हिरासत में रखा जाना; ब्लॉगर या आईसीटी यूजर्स पर शारीरिक हमला किया जाना या उनकी हत्या (हिरासत में भी) शामिल है.

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स मोदी सरकार की उस व्यवस्था को चुनौती दे रहा है जो केंद्रीय और राज्य एजेंसियों और पुलिस को एक वेबसाइट के ज़रिए, जिसे एक्स ‘सेंसरशिप पोर्टल’ कहता है, सीधे तकनीकी कंपनियों को सोशल मीडिया सामग्री हटाने के आदेश देने की अनुमति देती है.

चीन, बांग्लादेश, क्यूबा, ​​ईरान, म्यांमार, रूस, पाकिस्तान, तुर्की और वेनेज़ुएला ऐसे अन्य देश हैं जो इंटरनेट की आज़ादी को प्रतिबंधित करने के लिए इन छह नियंत्रणों का इस्तेमाल करते हैं.

इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट नियंत्रण के मामले में आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कोस्टा रिका सबसे स्वतंत्र देश हैं.

गौरतलब है कि पिछले हफ़्ते भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विवादास्पद  डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2025 के नियमों को तत्काल प्रभाव से अधिसूचित किया. आलोचकों का कहना है कि यह कानून पारदर्शिता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए नई बाधाएं पैदा करता है.