नई दिल्ली: अफगानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीजी भारत दौरे पर आए हुए हैं. पिछले दो महीनों में यह तालिबान के मंत्रियों का दूसरा भारत दौरा है, जिसका उद्देश्य भारत-अफगानिस्तान के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना है. यह आधिकारिक दौरा ऐसे समय हो रहा है जब तालिबान ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों को स्थगित करने का निर्णय लिया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक्स पर लिखा, ‘अफगान उद्योग और वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीजी का भारत दौरे पर हार्दिक स्वागत है. द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है.’
तालिबान सरकार के मंत्री ने बुधवार (19 नवंबर) को इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का दौरा किया, जहां उन्होंने अफगान व्यापारियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया.
अफगान वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने भारत में मौजूद अफगान कारोबारियों से मुलाकात कर बाज़ार में पहुंच बढ़ाने और विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की. अज़ीजी ने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि वे भारत में कारोबार से जुड़े उनकी समस्याओं को भारतीय अधिकारियों के समक्ष रखेंगे.
इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल के साथ बैठक में अज़ीजी ने नई दिल्ली और काबुल में संयुक्त भारत-अफगान प्रदर्शनी लगाने की संभावनाओं पर चर्चा की और अफगानिस्तान के प्रतिभागियों के लिए वीज़ा प्रक्रिया आसान बनाने में सहयोग मांगा.
गौरतलब है कि एक महीने पहले, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताक़ी भारत दौरे पर आए थे, यह तालिबान के सत्ता में आने के बाद किसी वरिष्ठ अफगान अधिकारी की पहली भारत यात्रा थी. मुत्ताक़ी ने भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान के खनन, खनिज और ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश का निमंत्रण दिया था और कहा था कि काबुल अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने देगा.
उस दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत काबुल में अपने टेक्निकल मिशन को दूतावास का दर्जा देगा. उसी दिन मुत्ताक़ी ने पत्रकारों को बताया था कि भारत ने तालिबान को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में अपने राजनयिकों को नियुक्त करने की भी अनुमति दे दी है.
यह एक बड़ा एवं महत्वपूर्ण बदलाव था. ज्ञात हो कि अगस्त 2021 में तालिबान के कब्ज़े के बाद भारत ने काबुल से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया था, अफगान नागरिकों को जारी वीज़ा रद्द कर दिए थे और दूतावास बंद कर दिया था.
इसके करीब एक साल बाद, भारत ने बातचीत की कोशिशें फिर से शुरू की थी. जून 2022 में भारत ने काबुल में एक तकनीकी टीम भेजी, जो तब से उसके ‘डी-फ़ैक्टो’ मिशन के रूप में काम कर रही है.
उसके बाद इस वर्ष जनवरी में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दोहा में मुत्ताक़ी से मुलाकात की थी और फिर मई में जयशंकर और उनके तालिबानी समक्ष के बीच पहली फोन वार्ता हुई.
भारत-अफगानिस्तान संबंधों में आया सुधार क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है. अक्टूबर में जयशंकर और मुत्ताक़ी की बैठक से ठीक पहले, काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव तब फिर बढ़ गया था जब रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पाकिस्तानी बलों ने काबुल और पकतिका प्रांत में तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक नेता को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए. इसके बाद अफगान बलों ने ‘प्रतिशोध’ के रूप में जवाबी कार्रवाई की.
इसके बाद क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है.
लेकिन इस महीने तीसरे दौर की वार्ता विफल होने के बाद तालिबान ने पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंध निलंबित कर दिए. दोनों देशों के बीच सीमा पार आतंकवाद रोकने के तरीकों पर असहमति दूर नहीं हो सकी और बातचीत रुक गई. 11 अक्टूबर से दोनों देशों के बीच सीमा चौकियां बंद हैं और जमीनी झड़पों के कारण व्यापार पूरी तरह ठप है.
हालांकि, 13 नवंबर को अफगानिस्तान के उपप्रधानमंत्री (आर्थिक मामलों के) मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर ने काबुल में व्यापारियों, उद्योगपतियों और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की एक सभा में बोलते हुए अफगान कारोबारियों से पाकिस्तान के रास्ते होने वाले व्यापार के लिए विकल्प तलाशने को कहा. उन्होंने व्यापारियों से कहा कि वे पाकिस्तान में अपने सभी लंबित अनुबंध तीन महीनों के भीतर निपटा लें.
भारत दौरे से पहले, अफगान वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि अज़ीजी की भारत यात्रा का एक उद्देश्य ‘चाबहार बंदरगाह की क्षमताओं का प्रभावी उपयोग’ करना भी है. भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित कर रहा है, जिसे हाल ही में अमेरिका से प्रतिबंधों में छूट मिली है.
रॉयटर्स के अनुसार, अफगानिस्तान अब ईरान की टैरिफ रियायतों का अधिक उपयोग कर रहा है और पाकिस्तान को बायपास करते हुए माल चाबहार भेज रहा है ताकि बार-बार होने वाली सीमा बंदी और रास्ते में मिलने वाली बाधाओं से बचा जा सके और उन मार्गों पर निर्भरता कम की जा सके.
