नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बाद अब गुजरात के अहमदाबाद में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अधिक काम का दवाब, अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और सर्वर समेत अन्य समस्याओं का हवाला देते हुए बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के रूप में कार्यरत लगभग 250 सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों ने गुरुवार (27 नवंबर) को अहमदाबाद के खोखरा स्थित एक डेटा अपलोडिंग केंद्र पर धरना दिया.
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, एसआईआर के तहत अमराईवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के लिए डेटा अपलोडिंग केंद्र, खोखरा स्थित केके शास्त्री कॉलेज में बीएलओ और चुनाव अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई. बाद में बीएलओ ने विरोध प्रदर्शन किया और अपनी समस्याओं का समाधान होने तक काम करने से इनकार कर दिया.
बीएलओ के रूप में कार्यरत 246 एएमसी स्कूल बोर्ड शिक्षकों ने एसआईआर लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे ‘अनुचित दबाव और धमकियों’ का हवाला दिया.
प्रदर्शनकारी शिक्षकों में से एक ने अखबार को बताया, ‘जब हमने अधिकारियों को बताया कि हम मैपिंग के लिए 2002 की मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो मुझे रुखाई से कहा गया कि मुझे केवल अमराईवाड़ी निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं को खोजना है, देश के बाकी हिस्सों से नहीं. हमें कोई समाधान या मदद नहीं दी गई, बल्कि उन्होंने (चुनाव अधिकारियों ने) लक्ष्य हासिल करने के लिए हम पर दबाव डाला.’
इस बीच बीएलओ, खासकर महिला शिक्षकों ने शिकायत की कि उनके मोबाइल नंबर सार्वजनिक होने से उन्हें रात में अनजान नंबरों से फोन आ रहे हैं, जिसमें अभद्रता की जा रही है.
सर्वर की समस्या
एक बीएलओ ने कहा, ‘मतदाता फॉर्म केवल अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत्यु (एएसडी) के रूप में जमा करने से लेकर प्रत्येक मतदाता की मैपिंग तक, बीएलओ को बेवजह धमकाया जा रहा है और काम पूरा करने के लिए दबाव डाला जा रहा है. एक तरफ अधिकारी हैं, दूसरी तरफ हमें अनजान नंबरों से अभद्र फोन आ रहे हैं. सरकार की ओर से सबसे बड़ी चूक यह है कि उन्होंने लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई. शायद ही कोई फॉर्म भरता है और हमसे ऐसा करने के लिए कहता है.’
इसके अलावा सर्वर की समस्या के कारण अपलोडिंग का काम प्रभावित होने के चलते शिक्षकों को रात में भी यह काम करने के लिए बुलाया जा रहा है.
एक अन्य बीएलओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमें आधी रात या रात के एक बजे भी अपने वरिष्ठों के फोन आते थे, जो हमें डेटा एंट्री करने और सर्वर के काम करने पर मैपिंग के लिए नाम अपलोड करने के लिए कहते थे. पिछले तीन हफ़्तों से हमारे पास परिवार के साथ समय बिताने का भी समय नहीं है.’
बीएलओ ने यह भी शिकायत की कि उन्हें सुबह सात बजे केंद्र पहुंचने दोपहर एक बजे तक फील्ड वर्क करने और दोपहर तीन बजे लंच ब्रेक के बाद फील्ड वर्क पर लौटने के लिए कहा जाता है.
बीएलओ आगे बताते हैं, ‘इसके बाद कोई समयसीमा नहीं होती, हमें जब भी ज़रूरत हो, उपलब्ध रहने के लिए कहा जाता है.’
‘ये काम बीस दिन का नहीं कम से कम दो महीनों का है’
बीएलओ के अनुसार, ‘यह 20 दिन का काम नहीं है, बल्कि इसके लिए कम से कम 60 दिन लगते हैं. यह अमराईवाड़ी विधानसभा का नहीं, बल्कि अहमदाबाद के सभी निर्वाचन क्षेत्रों का मुद्दा है.’
इस संबंध में अहमदाबाद नगर शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज पटेल ने अखबार को बताया, ‘इतनी मेहनत करने के बावजूद बीएलओ को धमकाया जा रहा है. अधिकारियों से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद हमारी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. बीएलओ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्हें मैपिंग के लिए तकनीकी कर्मचारियों और अतिरिक्त सहायक कर्मचारियों की आवश्यकता है. साथ ही बीएलओ ने यह भी मांग की है कि उन्हें अपने वार्ड के बाहर के इलाकों में काम करने के लिए मजबूर न किया जाए.’
बाद में शाम के समय पटेल ने कहा कि अधिकारी इन मुद्दों पर काम करने और उचित समाधान निकालने के लिए सहमत हो गए हैं.
अखबार द्वारा संपर्क किए जाने पर अमराईवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के एसआईआर के कार्यों की देखरेख कर रहे डिप्टी मामलतदार सागर कपाड़िया ने बताया, ‘बीएलओ की समस्याओं का समाधान कर दिया गया है. शुरुआत में सर्वर की समस्या थी, लेकिन अब यह ठीक काम कर रहा है.’
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य भर में 50,963 बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) अपना काम कर रहे हैं. अपडेटेड मतदाता सूची के अनुसार, राज्य में कुल 5.08 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं.
बुधवार को मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने बताया कि आठ जिलों में एसआईआर के लिए गणना फॉर्म का वितरण पूरा हो चुका है. बुधवार तक गुजरात में सबसे ज़्यादा (85.53 प्रतिशत) डिजिटलीकरण डांग जिले में हुआ है. एसआईआर की गणना का चरण 4 दिसंबर से शुरू होगा.
गाजियाबाद में 21 बीएलओ के खिलाफ केस दर्ज
वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जिला प्रशासन ने एसआईआर के दौरान कथित तौर लापरवाही बरतने वाले 21 बीएलओ के खिलाफ सिहानीगेट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इन बीएलओ पर गंभीर अनियमितताओं और आदेशों की लगातार अवहेलना का आरोप है.
साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में तैनात बीएलओ के खिलाफनिर्वाचन प्रभारी एवं नायब तहसीलदार आलोक कुमार यादव की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया है.
बीएलओ पर आरोप है कि उन्होंने मतदाता प्रपत्रों का वितरण समय पर नहीं किया. मतदाताओं से हस्ताक्षर संग्रह व रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन का काम अधूरा छोड़ दिया. इसके अलावा अधिकारियों की ओर से भेजे गए वॉट्सऐप संदेशों और फोन कॉल का भी जवाब नहीं दिया. प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही माना है.
मालूम हो कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) बहराइच और बरेली में काम में लापरवाही का हवाला देते हुए बीएलओ और एसआईआर के काम में लगे अन्य कर्मियों पर कई मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं.
गौतम बुद्ध नगर में दर्ज की गई अलग-अलग एफआईआर में 60 से अधिक कर्मचारियों को नामजद किया गया है. इनमें बीएलओ, सहायक और सुपरवाइज़र शामिल हैं. इन कर्मचारियों पर बार-बार निर्देश, चेतावनी देने और नोटिस देने के बाद भी अपने क्षेत्र में एसआईआर से जुड़ा काम न करवाने और उच्च अधिकारियों के आदेश न मानने के आरोप लगाए गए हैं.
इस बीच उत्तर प्रदेश समेत पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल और गुजरात समेत कई राज्यों से करीब दो दर्जन बीएलओ की मौत, आत्महत्या और इस्तीफ़े जैसे मामले सामने आए हैं, जो दूसरे चरण के दौरान देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे एसआईआर अभियान के बीच चिंता का कारण बने हुए हैं.
