नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार ने सोमवार (8 दिसंबर) को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2014 (जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सत्ता में आई) से अब तक 6,444 मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किए हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान एजेंसी ने 16,404 व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ 2,416 चार्जशीट दाखिल की है और 11,106 छापे मारे हैं.
सरकार ने आगे बताया कि विशेष मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालतों ने इन 11 वर्षों में 56 मामलों में 121 लोगों को दोषी ठहराया है. वहीं, आयकर विभाग ने इस अवधि में 13,877 मामले दर्ज किए और 9,657 छापेमारी की.
सरकार के डेटा के अनुसार, ईडी ने 2021-22 में 11,16 पीएमएलए मामले, 2020-21 में 996, 2022-23 में 953 और 2024-25 में 775 मामले दर्ज किए.
चालू वर्ष 2025-26 में वित्तीय अपराध जांच एजेंसी ने नवंबर तक 556 पीएमएलए मामले दर्ज किए हैं. ईडी ने 2023-24 में पीएमएलए मामलों में 2,600, 2024-25 में 2,317 और 2025 के पहले आठ महीनों में 2,267 छापेमारी की.
पिछले 11 वर्षों में दायर 2,416 आरोप पत्रों में से 1,843 मुख्य और 573 पूरक थे, जिनमें 13,112 व्यक्तियों और 3,292 कंपनियों (कुल 16,404) के नाम शामिल थे.
महज़ 53 मामलों में दोषसिद्धि के आदेश पारित किए गए हैं
इस संबंध में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया, ‘1 अप्रैल, 2014 से 30 नवंबर, 2025 तक की अवधि के दौरान पीएमएलए की विशेष अदालतों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मुद्दे पर 56 मामलों में गुण-दोष के आधार पर निर्णय सुनाए हैं, जिनमें से 53 मामलों में दोषसिद्धि के आदेश पारित किए गए हैं और 121 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘…इस अवधि के दौरान दोषसिद्धि दर, यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मुद्दे पर गुण-दोष के आधार पर तय किए गए कुल मामलों के प्रतिशत के रूप में अभियुक्तों को दोषी ठहराए गए मामलों की कुल संख्या 53/56*100=94.64% है…’
इससे पहले अखबार ने अक्टूबर में बताया था कि ईडी ने अपराध से प्राप्त आय को कुर्क करने के अपने मुख्य कार्य पर अधिक ध्यान केंद्रित करके अपनी रणनीति में बदलाव किया है.
एजेंसी ने वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 30,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में 15,000 करोड़ रुपये मूल्य को छू लिया है.
अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष यह संख्या और भी बढ़ सकती है.
1.70 लाख करोड़ मूल्य की संपत्तियां कुर्क
कुल मिलाकर, 2005 से अब तक पीएमएलए के तहत 8,100 मामलों में 1.70 लाख करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं.
गौरतलब है कि आयकर विभाग ने 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में क्रमशः 1,252, 4,527 और 3,512 अभियोजन मामले दायर किए. 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 (नवंबर के अंत तक) में क्रमशः 1,226, 173, 195, 387, 502, 611 और 271 मामले दर्ज किए.
गौरतलब है आयकर मामलों में 522 लोगों को दोषी ठहराया गया और 963 को बरी कर दिया गया. वहीं, विभाग ने 3,345 मामले वापस ले लिए.
इससे पहले इसी सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा लोकसभा में पेश किए गए डेटा से पता चला कि अगस्त 2019 की शुरुआत से ईडी ने 93 ऐसे मामलों में विशेष पीएमएलए अदालतों के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट भी दायर की, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बना था.
पीएमएलए के 2019 के संशोधन, जो उस वर्ष 1 अगस्त को लागू हुआ था, से पहले जिन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता था, उन्हें क्षेत्रीय विशेष प्रवर्तन निदेशक की पूर्व स्वीकृति से बंद कर दिया जाता था. 1 जुलाई, 2005 – जब पीएमएलए लागू होना शुरू हुआ – और 31 जुलाई, 2019 के बीच ऐसे 1,185 मामले बंद किए गए.
