हरियाणा में मनरेगा की बदहाली: 8 लाख मज़दूर, लेकिन सिर्फ 2,000 परिवारों को ही मिला 100 दिन का काम

लोकसभा में सरकार ने स्वीकार किया है कि हरियाणा में मनरेगा के तहत पंजीकृत 8 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से सिर्फ कुछ हज़ार परिवारों को ही 100 दिन का रोज़गार मिला है. इसके अलावा मनरेगा के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाला फंड भी लगातार घटा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खुलासा किया है कि पिछले दो वर्षों में हरियाणा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पंजीकृत 8 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से केवल कुछ हजार परिवारों को ही 100 दिन का गारंटीकृत रोजगार मिल पाया.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अंबाला से कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों में हरियाणा में किसी भी बेरोज़गारी भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है.

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने संसद को बताया कि 2022-23 और 2023-24 में हरियाणा में 8,06,439 सक्रिय श्रमिक मनरेगा के तहत पंजीकृत थे, लेकिन इन वर्षों में क्रमशः केवल 3,447 और 2,555 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिल सके.

वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में हरियाणा में 8,06,422 सक्रिय श्रमिक हैं, लेकिन अब तक केवल 2,191 परिवारों को ही पूरे 100 दिन का काम मिल सका है.

पासवान ने कहा, ‘मनरेगा एक मांग-आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रम है. अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, हर पात्र ग्रामीण परिवार को हर वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिन का मजदूरी रोजगार पाने का अधिकार है, यदि वह अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार है. जिन मामलों में राज्य सरकार निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहती है, वहां अधिनियम की धारा 7 के तहत बेरोज़गारी भत्ता देय हो जाता है.’

पासवान ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा के लिए मनरेगा के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए धन में कमी आई है. जहां 2020-21 में केंद्र ने 764.55 करोड़ रुपये जारी किए थे, वहीं 2024-25 में यह आवंटन घटकर 590.19 करोड़ रुपये रह गया है.