2019–20 से 2024–25 के बीच 4.57 करोड़ मनरेगा जॉब कार्ड हटाए गए: सरकार

लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि 2019–20 से 2024–25 के बीच मनरेगा के 4.57 करोड़ जॉब कार्ड हटाए गए, जबकि 6.54 करोड़ नए बनाए गए. बिहार में सबसे अधिक 1.04 करोड़ कार्ड हटाए गए. 2022–23 में हटाने का आंकड़ा रिकॉर्ड 2.24 करोड़ तक पहुंचा. सरकार ने इसे ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया है.

(फोटो साभार: फेसबुक/Pawan Lovvanshi)

नई दिल्ली: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (9 दिसंबर) को लोकसभा को सूचित किया कि वर्ष 2019–20 से 2024–25 के बीच देशभर में मनरेगा के 4.57 करोड़ जॉब कार्ड हटाए गए हैं, जबकि इसी अवधि में 6.54 करोड़ नए जॉब कार्ड बनाए गए.

राज्यों में, बिहार ने 2019–20 से 2024–25 के बीच मनरेगा के तहत सबसे अधिक जॉब कार्ड हटाने का रिकॉर्ड दर्ज किया है. इस अवधि में बिहार ने 1.04 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड हटाए, जो सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहीं अधिक है. बिहार में 2022-23 और 2023-24 में कार्ड हटाए जाने की संख्या में खास तौर पर बढ़ोतरी हुई, जब 79.82 लाख जॉब कार्ड हटाए गए.

बिहार के बाद उत्तर प्रदेश का स्थान रहा, जहां इसी अवधि में 91.48 लाख जॉब कार्ड हटाए गए. ओडिशा में 44.07 लाख जॉब कार्ड हटाए गए. संसद के सामने रखे गए आंकड़ों में बताया गया कि मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भी बड़ी संख्या में जॉब कार्ड हटाए – क्रमशः 37.90 लाख और 36.14 लाख.

पिछले छह वर्षों के आंकड़ों में सबसे अधिक जॉब कार्ड हटाए जाने के मामले 2022–23 में सामने आए. 2019–20 में कुल 14.32 लाख जॉब कार्ड हटाए गए थे, जो 2020–21 में बढ़कर 27.96 लाख हो गए. 2021–22 में यह संख्या 50.31 लाख तक पहुंच गई. इसके बाद 2022–23 में यह आंकड़ा उछलकर अभूतपूर्व 2.24 करोड़ तक पहुंच गया, जो छह वर्षों में सबसे अधिक है. 2023–24 में यह संख्या घटकर 1.01 करोड़ रही, और 2024–25 में अब तक 38.59 लाख जॉब कार्ड हटाए गए.

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में यह भी सामने आया कि इस वर्ष 10 अक्टूबर से 14 नवंबर के बीच मात्र 36 दिनों में 16.31 लाख श्रमिकों के जॉब कार्ड हटाए गए. आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 11.07 लाख जॉब कार्ड हटाए गए, इसके बाद ओडिशा (80,896), जम्मू-कश्मीर (79,070), तेलंगाना (95,084) और केरल (20,124) का स्थान रहा. उत्तर प्रदेश ने इसी अवधि में 17,236 जॉब कार्ड हटाए.

चौहान ने कहा कि जॉब कार्ड हटाना एक ‘नियमित प्रक्रिया’ है, जिसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश मुख्यतः फर्जी या डुप्लिकेट प्रविष्टियां, गलत जानकारी, स्थायी पलायन, ग्राम पंचायतों का शहरी क्षेत्रों में पुनर्वर्गीकरण या जॉब कार्ड धारक की मृत्यु जैसे कारणों के चलते करते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि, ‘हालांकि, श्रमिकों/जॉब कार्डों को हटाते समय राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी पात्र या योग्य परिवार का जॉब कार्ड न हटाया जाए, और इसके लिए अधिनियम के प्रावधानों तथा मंत्रालय द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन आवश्यक है.’

मंत्री ने आगे बताया कि श्रमिक कई माध्यमों से शिकायत दर्ज कर सकते हैं – NREGASoft शिकायत निवारण मॉड्यूल, स्थानीय अधिकारियों को लिखित आवेदन, टेलीफोन हेल्पलाइन, ग्राम पंचायत की शिकायत रजिस्टर और राष्ट्रीय शिकायत पोर्टल CPGRAMS  शामिल हैं.

डिजिटल प्रणालियों के चलते बड़े पैमाने पर लोगों बाहर किए जाने की आशंकाओं के जवाब में सरकार ने कहा कि न तो राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस), जो वास्तविक समय में जियो-टैग्ड उपस्थिति रिकॉर्ड करता है, और न ही आधार पेमेंट ब्रिज सिस्टम (एपीबीएस), जॉब कार्ड हटाने का आधार हो सकता है. एनएमएमएस जनवरी 2023 से अधिकांश कार्यस्थलों पर अनिवार्य है, जबकि एपीबीएस आधारित वेतन भुगतान 1 जनवरी 2024 से अनिवार्य किया गया है.